
भारतीय शेयर बाजार में इस हफ्ते भारी उठापटक देखी गई। सेंसेक्स में 364 अंकों की गिरावट दर्ज की गई तो निफ्टी भी 191 अंकों की गिर गया। 3 दिन बाजार हरे निशान में तो 2 दिन लाल निशान में रहा। एनएसई की शेयर बाजार में लिस्टिंग ने भी निवेशकों को निराश ही किया। जानिए मार्केट ट्रेड और निवेशकों के लिए कैसा रहेगा सितंबर का तीसरा सप्ताह। ALSO READ: 3 दिन हड़ताल की वजह से बंद रहेंगे बैंक, 2 बड़े फैसलों से मिलेगी ग्राहकों को राहत
कैसी रही सेंसेक्स और निफ्टी की चाल
सोमवार को सेंसेक्स 600 अंकों की बढ़त के साथ 74895 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 83 अंक बढ़कर 23429 पर पहुंच गया। मंगलवार को सेंसेक्स 330 अंक गिरकर 74529 पर जा पहुंचा तो निफ्टी 85 अंक गिरकर 23329 पर जा पहुंचा। बुधवार को सेंसेक्स 299 अंक बढ़कर 74828 पर जा पहुंचा तो निफ्टी 118 अंक की बढ़त के साथ 23447 पर बंद हुआ।
गुरुवार को शेयर बाजार में भारी गिरावट हुई। सेंसेक्स 1248 अंक गिरकर 73580 पर जा पहुंचा तो निफ्टी 384 अंक गिरकर 23063 पर जा पहुंचा। बिकवाली का दबाव इतना व्यापक रहा कि सभी सेक्टोरल इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। हफ्ते के आखिरी दिन सेंसेक्स 315 अंकों की बढ़त के साथ 73896 पर बंद हुआ। निफ्टी 77 अंक बढ़कर 23141 पर आ गया। ALSO READ: बैंक कर्मचारियों की 3 दिन की हड़ताल का ऐलान: किन मांगों पर अड़े हैं कर्मचारी, क्या होगा असर?
इन फैक्टर्स से तय हुई बाजार की चाल
सितंबर के चौथे हफ्ते भी शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों ने जमकर मुनाफा वसूली की। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार में खरीदी कर बड़ी गिरावट नहीं होने दी। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की मजबूती और क्रूड की कीमतों में उतार चढ़ाव ने भी शेयर बाजार की चाल पर असर डाला। हालांकि हफ्ते के आखिरी दिन बैंक, ऑटो आदि शेयरों में वैल्यू बाइंग के चलते बाजार में उछाल आया। पश्चिम एशिया संकट की वजह से भी निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं।
क्यों गिर रहा है बाजार?
बाजार विशेषज्ञ योगेश बागौरा के अनुसार, अमेरिकी बांड बाजार में यिल्ड का बढ़ना भारत ही नहीं पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए खराब है। 3 साल वाली बॉन्ड का प्रतिफल 5 प्रतिशत, 10 साल वाली बॉन्ड का प्रतिफल 5.2 प्रतिशत, 30 साल वाली बॉन्ड का प्रतिफल 5.5 प्रतिशत पर पहुंच गया है। यह 2007 के बाद का उच्चतम स्तर है। जितना यिल्ड मजबूत होगा रुपया उतना कमजोर होगा।
उन्होंने कहा कि महंगा तेल और कमजोर रुपया महंगाई बढ़ा रहा है। देश को उधारी भी महंगी पड़ रही है। भारत का यिल्ड भी 7.14 प्रतिशत पर पहुंच गया है। यह अब तक का उच्चतम स्तर है। इकोनॉमी स्टेबल होने की वजह से निवेशकों की दिलचस्पी अमेरिका में ज्यादा है। भारत में ब्याज दर घटने की गुंजाइश भी फिलहाल ना के बराबर है। देश का फॉरेक्स रिजर्व भी घटा है। यह सब भारतीय शेयर बाजार के लिए भी नकारात्मक संकेत है। इसी वजह से बाजार में मुनाफा वसूली भी हावी है। ALSO READ: त्योहारी सीजन से पहले महंगाई से बड़ी राहत: सरकार ने घटाया खाद्य तेलों पर आयात शुल्क, सस्ते होंगे सोयाबीन-पाम और सूरजमुखी तेल
कैसा रहेगा अगला हफ्ता?
बागौरा के अनुसार, सितंबर के आखिरी हफ्ते में भी शेयर बाजार रेंज बाउंड ही रहेगा। बैंक कर्मचारियों की 3 दिवसीय हड़ताल का भी शेयर बाजार पर नकारात्मक असर हो सकता है। निफ्टी में नीचे में 22500 पर महत्वपूर्ण सपोर्ट है। अगर बाजार इससे नीचे बंद होता है तो आने वाले दिनों में बाजार में और गिरावट आ सकती है। ऊपर में बाजार 23600-23,700 तक आ सकता है।
NSE के IPO को 5.69 गुना अभिदान
एनएसई के आईपीओ में कुल 5.69 गुना या 90,300 करोड़ रुपए के आवेदन मिले। यह 2024 में आए 27,870 करोड़ के बाद दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ हैं। कंपनी के शेयर बीएसई पर 24 सितंबर को सूचीबद्ध हुए। 24 सितंबर 2026 को 1,800 पर लिस्ट हुआ था, जो इसके 1,785 के इश्यू प्राइस से लगभग 0.84% के मामूली प्रीमियम पर था।
2 दिन बंद रहेगी ट्रेडिंग विंडो
प्राइवेट सेक्टर के बैंक यस बैंक ने शेयर बाजार को जानकारी दी कि बैंक के नामित व्यक्तियों और उनके तत्काल परिजनों के लिए बैंक की प्रतिभूतियों में कारोबार की ट्रेडिंग विंडो 1 अक्टूबर 2026 से 2 दिन बंद रहेगी। यह फैसला SEBI (Prohibition of Insider Trading) Regulations, 2015 और बैंक की इनसाइडर ट्रेडिंग रोकथाम से जुड़ी आचार संहिता के तहत लिया गया है।
अस्वीकरण : यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।


