LAC पर बदली ड्रैगन की चाल: चीन ने घटाए सैनिक, भारतीय सेना ने क्यों नहीं कम की अपनी चौकसी?

LAC पर बदली ड्रैगन की चाल: चीन ने घटाए सैनिक, भारतीय सेना ने क्यों नहीं कम की अपनी चौकसी?

china and india on LAC

पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से भारत और चीन की सीमाओं पर हालात में एक बड़ा बदलाव दर्ज किया गया है। रक्षा मंत्रालय की हालिया सालाना रिपोर्ट (2025-26) से खुलासा हुआ है कि चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास अपनी फौज में कमी की है, लेकिन इसके बावजूद भारतीय सेना ने अपनी सतर्कता और तैयारियों में कोई ढील नहीं दी है। ALSO READ: BRICS Summit 2026: शी जिनपिंग ने ग्लोबल साउथ को मजबूत करने पर दिया जोर, पेश कीं 5 पहल

 

चीनी सेना की तैनाती में कमी

रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की अग्रिम मोर्चों पर तैनाती में खासी गिरावट आई है। अब उत्तरी सीमाओं और पारंपरिक ट्रेनिंग क्षेत्रों में चीन की ओर से लगभग 10 कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड के बराबर ही बल तैनात हैं। जानकारों का मानना है कि साल 2024 में हुई सैनिकों की वापसी (डिसएंगेजमेंट) प्रक्रिया के बाद, चीन ने अब भारत की 'डि-एस्केलेशन' की दूसरी शर्त पर अमल करना शुरू कर दिया है।

 

हालांकि, अभी 'डि-इंडक्शन' यानी सैनिकों को पूरी तरह वापस उनकी स्थाई बैरकों में भेजने की तीसरी शर्त पूरी होना बाकी है। रणनीतिक जानकारों का मानना है कि जब तक यह अंतिम चरण पूरा नहीं होता, तब तक गलवान झड़प से पहले वाली सामान्य स्थिति बहाल नहीं मानी जा सकती। ALSO READ: BRICS Summit : भारत ने दुनिया को दिया सहयोग का नया मॉडल, PM मोदी ने बताए 4 बड़े स्तंभ

 

भारत का रुख: पूरी तैयारी और अटूट सतर्कता

चीन के सैनिकों की संख्या घटाने के बावजूद, भारतीय सेना ने किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति से निपटने के लिए एलएसी के सभी सेक्टरों में अपनी मजबूत पकड़ और तैनाती बरकरार रखी है। रक्षा रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारतीय सेना किसी भी नई चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह मुस्तैद और सही सामरिक स्थिति में है।

 

कूटनीतिक बातचीत और कड़े पहरे का तालमेल

सीमाई इलाकों में स्थिरता आने के पीछे दोनों देशों के बीच हुए उच्च स्तरीय राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य संवाद को एक बड़ी वजह माना जा रहा है। गौरतलब है कि ब्रिक्स समिट के दौरान भारत आए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई द्विपक्षीय बातचीत में इस बात पर सहमति बनी थी कि दोनों देशों को अपने मतभेदों को विवादों में नहीं बदलने देना चाहिए।

 

बहरहाल, कूटनीतिक मोर्चे पर भले ही बर्फ पिघलती दिख रही हो, लेकिन भारतीय सैन्य नेतृत्व कूटनीति के साथ-साथ रक्षात्मक सतर्कता के मामले में कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है।