क्या वाकई रोकी जा सकती है एआई के विकास की रफ्तार?

क्या वाकई रोकी जा सकती है एआई के विकास की रफ्तार?

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साहिबा खान

एंथ्रोपिक के सुरक्षा शोधकर्ता जेकब कॉक्सन ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा देकर पूरी दुनिया का ध्यान इस तकनीक के खतरनाक पहलू की ओर खींच लिया है। लेकिन कई जानकार अचानक आए इन बयानों पर संदेह जता रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी एआई कंपनी का एक शोधकर्ता अचानक एक दिन उठ कर इतना बड़ा बयान कैसे दे सकता है? साथ ही, लोगों को आशंका है कि ऐसे प्रतिस्पर्धा वाले माहौल में अमेरिका और चीन क्या वाकई इन चेतावनियों के चलते अपने अपने एआई मॉडलों के विकास पर लगाम कसेंगे? ALSO READ: खाड़ी में बदलता ताकत का संतुलन, यमन युद्ध से सऊदी अरब पर बढ़ा संकट

 

एआई का विकास यानी इंसानों के लिए खतरा?

कॉक्सन ने सार्वजनिक तौर पर आरोप लगाया कि एआई मॉडल विकसित करने वाली अग्रणी कंपनियां सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी कर रही हैं और “हम इंसानों की जिंदगियों के साथ खेल रही हैं।” कॉक्सन के अनुसार, इन प्रयोगशालाओं में काम करने वाले कई वैज्ञानिक अंदर ही अंदर मानते हैं कि यदि विकास की यही बेतहाशा रफ्तार जारी रही, तो यह तकनीक इस दशक के खत्म होने से पहले ही मानव सभ्यता के विनाश का कारण बन सकती है।

 

इस चौंकाने वाले खुलासे के तुरंत बाद एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने एआई विकास की तेज रफ्तार को वैश्विक स्तर पर धीमा करने की बात कही ताकि इसके जोखिमों को समझा जा सके। उनकी इस मांग का ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन, एक्स-एआई के इलॉन मस्क और गूगल डीपमाइंड के डेमिस हसाबिस ने भी समर्थन किया।

 

हाल के महीनों में कई ऐसी रिपोर्टें सामने आईं जहां एआई सिस्टम अपनी तय सीमाओं को तोड़कर खुद ही इंटरनेट तक पहुंचे, वेबसाइटों को हैक किया और अपने काम के डिजिटल सबूत मिटा दिए। ALSO READ: ईल मछली की तस्करी का रहस्यमयी और खतरनाक खेल

 

आईपीओ से पहले पीआर स्टंट या वाकई सुरक्षा की चिंता?

प्रतिस्पर्धा और अरबों डॉलर का निवेश दांव पर होने के कारण कोई भी अकेली कंपनी खुद से रफ्तार धीमी करने का जोखिम नहीं लेना चाहती। फिलहाल सुरक्षा के नाम पर एंथ्रोपिक और ओपनएआई ने केवल बाहरी स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को सुरक्षा जांच की अनुमति दी है। हालांकि, कई विश्लेषकों ने अमोदेई की नीयत पर सवाल उठाए हैं। समाचार एजेंसी एएफपी से बात करते हुए टेक उद्यमी ब्रायन रोमेले ने कहा कि यह संभावित आईपीओ से ठीक पहले खुद को बाजार में “जिम्मेदार कंपनी” के रूप में पेश करने का पैंतरा है।

 

खबरों के मुताबिक, एंथ्रोपिक कंपनी जल्द ही शेयर बाजार में कदम रखने जा रही है और अपनी लिस्टिंग से ठीक पहले कंपनी खुद को बाजार में एक “जिम्मेदार, सुरक्षित और नैतिक” ब्रांड के रूप में पेश करना चाहती है। वॉल स्ट्रीट के बड़े संस्थागत निवेशक एआई के अनियंत्रित खतरों और कानूनी जोखिमों को लेकर काफी सतर्क रहते हैं; ऐसे में जानकारों का मानना है कि खुद को सुरक्षा के पैमाने पर अव्वल दिखाकर कंपनी अपनी ब्रांड वैल्यू को सुरक्षित करना चाहती है और निवेशकों का भरोसा जीतना चाहती है।

 

इसके अलावा, आलोचकों का मानना है कि इस कदम का मकसद “रेगुलेटरी कैप्चर” यानी सरकारी नियमों के जरिए अपनी बढ़त को हमेशा के लिए पुख्ता करना है। यदि सरकारें एआई सुरक्षा के नाम पर कड़े नियम, भारी-भरकम ऑडिट और अस्थायी रोक लगाती हैं, तो एंथ्रोपिक और ओपनएआई जैसी पहले से स्थापित कंपनियां इसका खर्च तो झेल जाएंगी, लेकिन नए या छोटे स्टार्टअप्स और ओपन-सोर्स डेवलपर्स इस दौड़ से बाहर हो जाएंगे।

 

व्हाइट हाउस के पूर्व एआई सलाहकार डेविड सैक्स ने भी तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “यह दिखावा करना पूरी तरह से बंद करें कि एआई विकास को धीमा करने की आपकी मंशा परोपकार से प्रेरित है।” उन्होंने चेतावनी दी, “यदि आपके एआई उत्पादों के जरिए कोई विनाशकारी साइबर हमला होता है, तो आपकी कंपनियों को भारी कानूनी देनदारियों का सामना करना पड़ेगा।”

 

इसके साथ ही 14 सितंबर, सोमवार को यूरोपीय संघ (ईयू) के प्रवक्ता थॉमस रेनियर का भी बयान सामने आया जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि संघ इनोवेशन का समर्थन करता है, लेकिन कंपनियों को पहले यह साबित करना होगा कि उनकी तकनीक नागरिकों के लिए सुरक्षित है। ALSO READ: सर्दी से पहले जर्मनी का गैस भंडार 15 साल के निचले स्तर पर

 

अमेरिका-चीन की भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बीच कसी जाएगी एआई पर लगाम?

एआई की रफ्तार पर लगाम लगाने में अमेरिका का राजनीतिक रुख और चीन के साथ उसकी रणनीतिक होड़ सबसे बड़ी रुकावट मानी जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने चेतावनियों को खारिज करते हुए एआई आलोचकों को “नकारात्मक ताकतें” करार दिया और कहा कि अमेरिका इस तकनीक में दुनिया में नंबर वन बना रहेगा।

रिपब्लिकन नेताओं को डर है कि सख्त नियमों से देश में नवाचार की गति धीमी हो जाएगी और चीन इस दौड़ में अमेरिका से आगे निकल जाएगा। अमोदेई का तर्क है कि सरकारी निगरानी बेहद जरूरी है और समन्वय केवल लोकतांत्रिक देशों के बीच होना चाहिए, साथ ही चीन को एडवांस चिप्स के निर्यात पर पाबंदी लगनी चाहिए।

 

वहीं चीन की राष्ट्रीय गुप्तचर एजेंसी के प्रमुख और राज्य सुरक्षा मंत्री चेन यिक्सिन ने चेतावनी दी है कि विरोधी ताकतें जनरेटिव एआई का इस्तेमाल “राजनीतिक अफवाहें फैलाने और देश के खिलाफ माहौल बनाने” के लिए कर रही हैं। उन्होंने लिखा, “वे हमारे खिलाफ जनमत और वैचारिक युद्ध चला रहे हैं, जो हमारी राजनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है।” चेन ने एंथ्रोपिक के 'क्लॉड मिथॉस' और ओपनएआई के 'चैटजीपीटी-5.5-साइबर' की हैकिंग क्षमताओं को अपने साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जोखिम बताया। सितंबर के अंत में ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात में एआई सुरक्षा पर बात होने की उम्मीद है।

 

शेयर बाजारों में रिकॉर्ड गिरावट

एआई विकास को धीमा करने की चेतावनियों का सीधा असर सोमवार को वैश्विक शेयर बाजारों पर देखने को मिला। एशियाई और यूरोपीय बाजारों में एआई, सेमीकंडक्टर और मेमोरी चिप निर्माता कंपनियों के शेयर तेजी से गिर गए। ओपनएआई के प्रमुख निवेशक सॉफ्टबैंक के शेयर 10.7 प्रतिशत टूट गए। बाजार में मचे इस हड़कंप का बड़ा कारण सैम ऑल्टमैन का वह बयान भी रहा, जिसमें उन्होंने सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए इस साल कंपनी का आईपीओ न लाने की बात कही।