कॉजपा के नेताओं ने न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका वापस ली

कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) द्वारा उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ाए जाने को चुनौती के लिए उच्च न्यायालय में दायर याचिका बुधवार को वापस ले ली।

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने कॉजपा के सह-संयोजकों की ओर से पेश वकील से कहा कि वे विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष बुधवार को होने वाली सुनवाई का नतीजा देखें और यदि उनकी शिकायत बरकरार रहती है तो अपीलीय अदालत का रुख करें।

न्यायाधीश ने दास और रांका को याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए स्पष्ट किया कि उन्होंने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

अदालत ने सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी की कि इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर करना उचित कानूनी उपाय नहीं है।

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कॉजपा के नेताओं ने दशहरा की छुट्टियों के कारण बंद उच्च न्यायालय में तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था, जिसके बाद अदालत ने मामले पर सुनवाई की।

दास और रांका ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के 19 अक्टूबर के उस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसके तहत उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी गई थी।

दास और रांका को 13 अक्टूबर को उस समय हिरासत में लिया गया था, जब उन्होंने जंतर मंतर में घुसने के लिए कथित तौर पर बंद फाटक को फांदा था। दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

मंदिर मार्ग थाने में नवनियुक्त विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने सोमवार को दोनों को अपने समक्ष पेश किए जाने के बाद उनकी न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ाने का आदेश दिया था।

दास और रांका ने कॉजपा के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज लहराया था और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए थे। इसके बाद उन्हें 13 अक्टूबर को हिरासत में लेकर एहतियातन गिरफ्तार कर लिया गया था।

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