
IFS Siddharth Babu: जब दो महाशक्तियों के शीर्ष नेता किसी मेज पर आमने-सामने बैठते हैं, तो उनकी बातचीत का एक-एक शब्द और लहजा पूरे वैश्विक परिदृश्य को बदल सकता है। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच एक बेहद समझदार, कूटनीतिक रूप से दक्ष और भरोसेमंद ट्रांसलेटर (अनुवादक) की मौजूदगी अनिवार्य हो जाती है।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक की तस्वीरों में दोनों नेताओं के ठीक बीच एक युवा अधिकारी नजर आए। आइए जानते हैं कौन हैं ये अधिकारी और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में इनका क्या रोल है:
कौन हैं IFS सिद्धार्थ बाबू?
- पद और बैच : पीएम मोदी के साथ दिखाई दे रहे यह अधिकारी सिद्धार्थ बाबू हैं, जो 2017 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी हैं।
- वर्तमान जिम्मेदारी : वे वर्तमान में विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs – MEA) के ईस्ट एशिया डिविजन (East Asia Division) में उप सचिव (Deputy Secretary) के पद पर तैनात हैं।
- चीनी भाषा में महारत : सिद्धार्थ बाबू ने चीनी भाषा (Mandarain) में विशेष प्रशिक्षण और महारत हासिल की है। इसी विशेषज्ञता के चलते उन्हें भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच अनुवाद (Translation) और भाषाई सहायता (Linguistic Support) की जिम्मेदारी सौंपी गई।
क्यों अहम होती है एक ट्रांसलेटर की भूमिका?
अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं और द्विपक्षीय सम्मेलनों में अनुवादक का काम सिर्फ शब्दों का अनुवाद करना नहीं होता, बल्कि इसके पीछे कई संवेदनशील पहलू शामिल होते हैं:
- कूटनीतिक बारीकियां (Diplomatic Nuances) : चीनी भाषा (मैंडरिन) की शब्दावली बेहद जटिल होती है। किसी एक शब्द का गलत अर्थ दोनों देशों के बीच गलतफहमी पैदा कर सकता है। ऐसे में अनुवादक को दोनों भाषाओं की कूटनीतिक भाषा पर बारीक पकड़ होनी चाहिए।
- सख्त गोपनीयता और भरोसा : शीर्ष नेताओं के बीच होने वाली गोपनीय बातचीत की जानकारी केवल अनुवादक के पास ही होती है। इसलिए इसके लिए अत्यधिक विश्वसनीय और परिपक्व अधिकारियों का ही चयन किया जाता है।
- नेताओं का सही संदेश पहुंचाना : नेता जिस भावना, जोर और लहजे में अपनी बात कह रहे हैं, उसे बिना किसी बदलाव के दूसरी भाषा में सटीक रूप से सामने रखना अनुवादक का ही काम होता है।
बैकग्राउंड में रहकर रचते हैं इतिहास
अक्सर कैमरों की नजरें पीएम मोदी और शी जिनपिंग जैसे बड़े नेताओं पर ही टिकी रहती हैं, लेकिन पर्दे के पीछे रहकर देश के हितों को साधने और कूटनीतिक संवाद को सुगम बनाने में सिद्धार्थ बाबू जैसे प्रतिभावान IFS अधिकारियों का बहुत बड़ा योगदान होता है।


