इंदौर में डरा रहे आत्‍महत्‍या के आंकड़े, मध्‍यप्रदेश में रोज 42 लोग जिंदगी से हार रहे, मौत को गले लगाने का ट्रेंड क्‍यों बढ़ा?

suicide indore

इंदौर में मालवा की माटी शामिल है। इस मिट्टी की तासीर लोगों को मौज-मस्‍ती और फाका मस्‍ती सिखाती है। पोहे- जलेबी और चाय पर गपशप के बाद मलंग होकर इंदौर की गलियों में तफरी करना और भियाओ राम कहकर हर आदमी का अभिवादन करना यहां का रिवाज है। ऐसे में वो कौनसी फिक्र है जो इंदौर के आदमी को अंदर ही अंदर खाए जा रही है और वो आत्‍महत्‍या जैसे कदम उठा रहा है। पिछले कुछ समय से इंदौर में आत्‍महत्‍या के मामलों में उछाल आया है। यूं तो पूरे मध्‍यप्रदेश में सुसाइड के इस ट्रेंड ने चौंका दिया है, लेकिन इंदौर की तस्‍वीर भी डरा रही है।

दरअसल, आत्‍महत्‍या को लेकर एनसीआरबी की रिपोर्ट में मप्र के लिए डरावनी तस्वीर सामने आई है। आत्‍महत्‍याओं के मामलों ने पूरे प्रदेश को झकझौर के रख दिया है। यहां लगातार लोग आत्‍महत्‍या कर रहे हैं। आत्‍महत्‍या करने वालों में हाउस वाइफ, स्‍टूडेंट, किसान और सरकारी कर्मचारी शामिल हैं।

आत्महत्या के मामले में मप्र देश के टॉप-3 राज्यों में है। प्रदेश में प्रतिदिन 42 लोग जिंदगी से हार मानकर मौत को गले लगा रहे हैं। एमपी में साल 2024 में 15 हजार 491 लोगों ने आत्महत्या की थी। सबसे ज्‍यादा हैरान करने वाली बात है कि इंदौर प्रदेश में सबसे ज्‍यादा आत्महत्या दर (34.6) वाला देश का चौथा और भोपाल (28.4) सातवां शहर बन गया है।

इंदौर में 30 प्रतिशत बढोतरी : एक रिपोर्ट की माने तो पिछले एक साल में इंदौर में आत्‍महत्‍याओं के मामले में 30 प्रतिशत बढोतरी हुई है। यहां हर महीने 50 से ज्‍यादा आत्‍महत्‍या के मामले दर्ज हो रहे हैं। रोजाना शहर में सुसाइड के मामलों की खबर आ रही है। इस मामलों में सभी वर्ग और उम्र में लोग शामिल हैं। बता दें कि मध्‍यप्रदेश में स्टेट मेंटल हेल्थ पॉलिसी साल 2019 से प्रस्‍तावित है, इस पर अब तक कुछ नहीं हो सका है।

suicide indore

मध्‍यप्रदेश में आत्‍महत्‍या का ग्राफ

  • गृहणियों : 2296
  • सरकारी कर्मचारी : 164
  • स्‍टूडेंट : 1447
  • किसान : 7.9 प्रतिशत
  • देश में छात्र आत्महत्याओं में मप्र की हिस्सेदारी 10% है।
  • 2024 में 716 छात्रों और 731 छात्राओं ने खुदकुशी की।

(NCRB की एक्‍सीडेंटल डेथ एंव सुसाइड रिपोर्ट के मुताबिक)

भोपाल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक, डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी ने वेबदुनिया को बताया कि इंदौर सहित मध्यप्रदेश में बढ़ती आत्महत्याएं केवल व्यक्तिगत असफलता की कहानी नहीं हैं, बल्कि बदलते सामाजिक और मनोवैज्ञानिक परिदृश्य का संकेत हैं। आज लोगों के पास संवाद के साधन पहले से अधिक हैं, लेकिन भावनात्मक सहारा पहले से कम महसूस हो रहा है। सोशल मीडिया पर लगातार तुलना, सफलता का दबाव, रिश्तों में अस्थिरता, आर्थिक अनिश्चितता और अकेलेपन की बढ़ती भावना मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल रही है।

suicide indore

अवसाद, चिंता, नशा : आत्‍महत्‍या के कई कारण : आत्महत्या को किसी एक कारण या एक व्यक्ति से जोड़कर देखना अक्सर वास्तविक समस्या को समझने में बाधा बन जाता है। अधिकांश मामलों में इसके पीछे कई कारकों का जटिल मेल होता है, जिनमें अवसाद, चिंता, नशे की समस्या, व्यक्तित्व संबंधी कठिनाइयां, पारिवारिक तनाव और संकट के समय पर्याप्त सहयोग का अभाव शामिल हो सकते हैं।

उपाय : लोगों को स्ट्रेस कॉपिंग में दक्ष बनाना
मेरे विचार से आत्महत्या रोकथाम का सबसे बड़ा और दीर्घकालिक उपाय लोगों को स्ट्रेस कॉपिंग में दक्ष बनाना है। जीवन में तनाव, असफलता, अस्वीकृति, आर्थिक दबाव और रिश्तों की चुनौतियां पूरी तरह समाप्त नहीं की जा सकतीं, लेकिन उनसे निपटने की क्षमता विकसित की जा सकती है। दुर्भाग्य से हमारे शिक्षा तंत्र में गणित, विज्ञान और तकनीक तो सिखाई जाती है, लेकिन तनाव प्रबंधन, भावनात्मक नियंत्रण, समस्या समाधान और मदद मांगने के कौशल पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है। हमें ऐसी पीढ़ी तैयार करनी होगी जो केवल सफल होना ही नहीं, बल्कि असफलताओं को भी संभालना जानती हो। मानसिक दृढ़ता, भावनात्मक लचीलापन और सहायता लेने की संस्कृति विकसित किए बिना आत्महत्या की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

suicide indore

ऐसे संकेत दिखें तो हो जाएं अलर्ट

  • आत्महत्या के बारे में बात करना।
  • ज्‍यादा चिंता, बेचैनी या घबराहट।
  • कोई मकसद महसूस नहीं होना।
  • गुस्सा या चिड़चिड़ापन बढ़ना।
  • अपनी प्रिय वस्तुएं दूसरों को देना।
  • शराब या अन्‍य नशे का सेवन बढ़ाना।
  • खुद को अलग-थलग करना।
  • अकेले-अकेले रहना
  • निजी, बैंक आदि के कामों के बारे में जानकारी देना।