हिल्सा मछली पर भारत-बांग्लादेश में हंगामा, बांग्‍लादेश नहीं दे रहा भारत को मछली, दुर्गा पूजा पर होगा असर, क्‍या है विवाद?

हिल्सा मछली पर भारत-बांग्लादेश में हंगामा, बांग्‍लादेश नहीं दे रहा भारत को मछली, दुर्गा पूजा पर होगा असर, क्‍या है विवाद?

Hilsa fish

मछली को लेकर भारत और बांग्‍लादेश में जंग छिड़ गई है। जिस मछली के लिए यह विवाद शुरू हुआ है उसका नाम है हिल्‍सा। दरअसल, इस बार बांग्‍लादेश ने मछली के निर्यात की अभी तक अनुमति नहीं दी है। जिससे दोनों देशों में इसे लेकर विवाद की स्‍थिति बन गई है। बता दें कि भारत में कुछ ही दिनों में दुर्गा पूजा की शुरुआत होगी, ऐसे में भारत में मछली की मांग होगी।

जिस बांग्लादेश की हिल्सा का इंतजार पश्चिम बंगाल समेत देश के कई हिस्सों में हर साल दुर्गा पूजा के दौरान रहता है, इस बार उसके भारत पहुंचने पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। बांग्लादेश ने इस साल भारत को हिल्सा निर्यात की अनुमति नहीं दी है। इतना ही नहीं, उसने भारत से हिल्सा का आयात भी रोक दिया है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ ही हफ्ते पहले भारत ने करीब 500 टन हिल्सा बांग्लादेश भेजी थी।

क्‍यों है हिल्‍सा मछली को लेकर विवाद : मामला सिर्फ एक मछली के आयात-निर्यात का नहीं है. हिल्सा बंगाली संस्कृति और खान-पान का बेहद अहम हिस्सा है। भारत और बांग्लादेश दोनों तरफ इसके चाहने वालों की बड़ी संख्या है। खासकर दुर्गापूजा के दौरान पश्चिम बंगाल के बाजारों में बांग्लादेशी हिल्सा की मांग काफी बढ़ जाती है। लेकिन इस बार बांग्लादेश ने भारत को हिल्सा भेजने के लिए अब तक विशेष अनुमति नहीं दी है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल फिश इंपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव सैयद अनवर मकसूद के मुताबिक हर साल सितंबर के मध्य में बांग्लादेश सरकार भारत को सीमित मात्रा में हिल्सा निर्यात की अनुमति देती है। इस साल वह समय निकल गया। मकसूद के मुताबिक 23 सितंबर को बांग्लादेश ने एक सर्कुलर जारी कर भारत से हिल्सा के आयात से जुड़े परमिट भी रद्द कर दिए। यानी बांग्लादेश ने भारत से हिल्सा लेना भी रोक दिया।

बता दें कि आमतौर पर दुर्गा पूजा के समय भारत बांग्लादेश से हिल्सा खरीदता था। बांग्लादेश दुनिया के बड़े हिल्सा उत्पादक देशों में है और उसकी पद्मा नदी की हिल्सा की भारत में खास मांग रहती है। लेकिन, इस बार बांग्लादेश में हिल्सा का उत्पादन कम रहने की खबरों के बीच वहां घरेलू मांग पूरी करने के लिए भारतीय हिल्सा खरीदी गई। पिछले करीब दो महीनों में भारत ने बांग्लादेश को लगभग 500 टन हिल्सा भेजी। यानी पहली बार बड़े पैमाने पर हिल्सा का प्रवाह भारत से बांग्लादेश की तरफ हुआ। और अब उसी समय बांग्लादेश ने भारत को हिल्सा भेजने का रास्ता बंद कर दिया है।

बांग्‍लादेश में हिल्‍सा कम हुई : बांग्लादेश में इस साल हिल्सा का उत्पादन कम रहने की बात सामने आई है। वहां हिल्सा की घरेलू मांग भी काफी ज्यादा है। ऐसे में वहां के कारोबारियों ने भारत का रुख किया। पश्चिम बंगाल के मछली कारोबारियों के मुताबिक भारत से बांग्लादेश भेजी गई हिल्सा का बड़ा हिस्सा गुजरात से आया। मछली को भरूच बंदरगाह के रास्ते भेजा गया, जबकि कुछ आपूर्ति पश्चिम बंगाल के हावड़ा थोक बाजार से भी हुई। यानी जिस बांग्लादेश को आमतौर पर हिल्सा का बड़ा निर्यातक माना जाता है, इस बार उसे अपनी घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए भारत से हिल्सा खरीदनी पड़ी।

क्‍यों दुर्गा पूजा में हिल्‍सा की होती है मांग : बता दें कि गुजरात में मिलने वाली हिल्सा में काफी मात्रा में रो यानी मछली के अंडे होते हैं। भारतीय बाजार में ऐसी हिल्सा की मांग सीमित मानी जाती है, लेकिन बांग्लादेश में रो वाली हिल्सा को खास पसंद किया जाता है। खासकर चटगांव और सिलहट जैसे इलाकों में इसके खरीदार हैं। मछली के अंडों को अलग निकालकर भी इस्तेमाल किया जाता है। कुछ मामलों में इनके प्रसंस्करण और दूसरे देशों में दोबारा निर्यात की भी बात सामने आई है। इसलिए गुजरात की हिल्सा बांग्लादेशी बाजार के लिए एक खास उत्पाद बन गई।

क्‍या है भारत बांग्लादेश के बीच हिल्सा का इतिहास : बता दें कि बांग्लादेश ने 2012 में भारत को हिल्सा निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि 2019 से उसने दुर्गापूजा के आसपास सीमित अवधि के लिए भारत को हिल्सा भेजने की अनुमति देना शुरू किया। इसके बाद हर साल दुर्गा पूजा से पहले बंगाल के बाजारों में बांग्लादेशी हिल्सा की चर्चा शुरू हो जाती थी। आंकड़ों पर नजर डालें तो सितंबर 2019 में भारत ने बांग्लादेश से करीब 500 टन हिल्सा आयात की थी। 2020 में यह मात्रा करीब 1,850 टन और 2021 में करीब 1,200 टन रही। 2022 में करीब 1,300 टन हिल्सा भारत पहुंची। 2023 में यह आंकड़ा करीब 587 टन और 2024 में करीब 577 टन रहा। लेकिन पिछले साल आयात तेजी से घटकर करीब 150 टन रह गया। अब 2026 में स्थिति पूरी तरह उलट गई है। भारत ने ही करीब 500 टन हिल्सा बांग्लादेश भेज दी है।

कैसे होगा भारत पर असर : भारत में भी हिल्सा का उत्पादन भी होता है। इसलिए बांग्लादेश से हिल्सा नहीं आने का मतलब यह नहीं है कि भारतीय बाजारों में हिल्सा बिल्कुल उपलब्ध नहीं होगी। लेकिन, पश्चिम बंगाल में दुर्गापूजा के दौरान बांग्लादेशी हिल्सा की जो विशेष मांग रहती है, उस पर असर पड़ सकता है। खासकर पद्मा नदी की हिल्सा को लेकर ग्राहकों में अलग आकर्षण है। मछली कारोबारियों का कहना है कि अगर बांग्लादेश ने जल्द निर्यात की अनुमति नहीं दी तो त्योहार से पहले वहां से हिल्सा मंगाना मुश्किल होगा। इसका सीधा असर उपलब्धता और कीमत पर पड़ सकता है।