
Garba Entry Controversy : नवरात्रि शुरू होने से पहले महाराष्ट्र में गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में मुस्लिमों की एंट्री को लेकर विवाद गहरा गया है। विश्व हिन्दू परिषद (VHP) की ओर से गरबा और डांडिया आयोजनों में मुस्लिमों की एंट्री रोकने की मांग के बाद यह मुद्दा चर्चा में आया। अब बागेश्वर धाम के कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान ने इस बहस को और सुर्खियों में ला दिया है। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि लोगों को अपने-अपने त्योहार मनाने चाहिए और गरबा जैसे हिन्दू धार्मिक आयोजन में दूसरे धर्म के लोगों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठाया। इस पर मुख्यमंत्री देवेंन्द्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस का बयान भी सामने आया था।
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क्या बोले धीरेंद्र शास्त्री?
गरबा में मुस्लिमों की एंट्री को लेकर पूछे गए सवाल पर बाबा बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि सभी लोगों को अपने-अपने धार्मिक त्योहार मनाने चाहिए। उन्होंने इसी संदर्भ में “मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम” वाली टिप्पणी की। उनके बयान का मूल तर्क यह है कि अगर गरबा नवरात्रि और देवी पूजा से जुड़ा धार्मिक आयोजन है, तो इसमें भागीदारी को धार्मिक परंपरा और आस्था के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। यह पहली बार नहीं है जब धीरेंद्र शास्त्री ने गरबा में गैर-हिंदुओं की भागीदारी पर टिप्पणी की है। सितंबर 2025 में भी उन्होंने गरबा आयोजनों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर सवाल उठाते हुए अलग बयान दिया था।
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विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
महाराष्ट्र में नवरात्रि और गरबा आयोजनों से पहले विश्व हिंदू परिषद ने मांग की कि गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में मुस्लिमों को प्रवेश नहीं दिया जाए। VHP की ओर से आयोजकों से प्रतिभागियों की पहचान सत्यापित करने की बात कही गई। रिपोर्टों के मुताबिक, संगठन ने आधार कार्ड से पहचान जांचने और प्रवेश से पहले तिलक लगाने जैसी शर्तों की भी बात रखी। यही मांग आगे चलकर राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गई।
नितेश राणे ने क्या कहा?
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे ने VHP की मांग का समर्थन किया। उन्होंने गरबा में आने वाले लोगों की पहचान जांचने की बात कही। राणे ने यह भी कहा कि केवल पहचान पत्र की जांच पर्याप्त नहीं होनी चाहिए और प्रवेश से पहले हनुमान चालीसा का पाठ कराने की बात कही। उन्होंने नवरात्रि जैसे आयोजनों के दौरान कथित 'लव जिहाद' को लेकर भी आरोप लगाए।

अमृता फडणवीस ने क्या कहा था?
इस मुद्दे पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस का रुख अलग दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि त्योहार सभी के लिए खुले होने चाहिए और यदि कोई मुस्लिम व्यक्ति शांतिपूर्वक गरबा देखने या उसका आनंद लेने आता है तो इसमें उन्हें गलत नहीं लगता। इस बयान ने इसलिए भी ध्यान खींचा क्योंकि यह VHP और नितेश राणे के रुख से अलग दृष्टिकोण सामने रखता है।
रामदास आठवले और आदित्य ठाकरे का भी आया बयान
केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने VHP की मांग का विरोध किया। उन्होंने संविधान में सभी धर्मों के लोगों को समान अधिकार मिलने का हवाला देते हुए कहा कि लोगों को एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होने का अधिकार है। वहीं शिवसेना (UBT) के नेता आदित्य ठाकरे ने भी VHP की अपील पर सवाल उठाए। उन्होंने मुंबई जैसे शहरों में त्योहारों में शामिल होने वाले लोगों की पहचान को धर्म के बजाय शहर के नागरिक के रूप में देखने की बात कही।


