एस. जयशंकर ने क्यों दी ‘4F संकट’ की चेतावनी? जानिए इंदिरा गांधी ने 1966 में भारत को ऐसे ही संकट से कैसे निकाला था

एस. जयशंकर ने क्यों दी '4F संकट' की चेतावनी? जानिए इंदिरा गांधी ने 1966 में भारत को ऐसे ही संकट से कैसे निकाला था

S Jaishankar 4F crisis warning

S Jaishankar 4F crisis warning: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की नाजुक स्थिति को रेखांकित करते हुए एक गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय 4F संकट—Fuel (ईंधन), Food (खाद्यान्न), Fertilizer (उर्वरक), और Finance (वित्त)—की ज़द में है।
यह चेतावनी सुनते ही सोशल मीडिया पर यह चर्चा छिड़ गई कि क्या भारत एक बार फिर भोजन या ईंधन के संकट की ओर बढ़ रहा है?

जब 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय देश में गंभीर अनाज संकट पैदा हुआ था, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को देशवासियों से हफ्ते में एक वक्त का भोजन छोड़ने (उपवास रखने) की भावुक अपील करनी पड़ी थी। उस समय अमेरिका से हर दिन तीन अनाज के जहाज भारत आते थे और भारत को ‘शिप-टू-माउथ’ (जहाज से पेट तक) अर्थव्यवस्था कहा जाता था।

लेकिन आज, 61 साल बाद, स्थिति काफी अलग है। भारत के गोदामों में आपातकालीन जरूरत से तीन गुना ज्यादा चावल भरा पड़ा है। इसके बावजूद विदेश मंत्री ‘खाद्य संकट’ और 4F की बात क्यों कर रहे हैं? आइए इस संकट के चारों स्तंभों को आसान भाषा में समझते हैं।

S Jaishankar 4F crisis warning

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इतिहास से सबक: इंदिरा गांधी का वह एक वाक्य

1966 के भीषण सूखे के दौरान जब अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने भारत पर दबाव बनाने के लिए गेहूं से भरे जहाजों को रोक दिया था, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को अमेरिकी राष्ट्रपति से फोन पर बात करनी पड़ी थी।

बातचीत खत्म होने के बाद इंदिरा गांधी ने अपने सहयोगियों से कहा था: “मैं नहीं चाहती कि भारत को फिर कभी भोजन के लिए किसी के सामने हाथ फैलाना पड़े।”

इस एक संकल्प ने भारत में ‘हरित क्रांति’ (Green Revolution) की नींव रखी, जिसके बाद भारत खाद्यान्न में पूरी तरह आत्मनिर्भर बना।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की 4F चेतावनी भारत में तत्काल भुखमरी का संकेत नहीं है, बल्कि यह इस बात की ताकीद है कि वैश्विक उथल-पुथल के दौर में ऊर्जा सुरक्षा, उर्वरक आत्मनिर्भरता, आपूर्ति श्रृंखला और वित्तीय स्थिरता को बनाए रखना भारत के टिकाऊ विकास के लिए बेहद आवश्यक है।