
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच पश्चिम एशिया में हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते और सैन्य कार्रवाई के विकल्प खुले रखने की बात कही है। वहीं, ईरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है, लेकिन अमेरिकी हमले दोबारा शुरू होने की स्थिति में भी तेहरान अपने रुख में बदलाव नहीं करेगा। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
ईरान युद्ध से जुड़े घटनाक्रम के बीच सऊदी अरब में ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरें भी सामने आई हैं। दूसरी ओर, मिस्र की संसद ने सऊदी अरब की रक्षा में मदद के लिए सैनिक भेजने से संबंधित राष्ट्रपति के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इन घटनाओं से क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रखा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि वह अभी इस पर फैसला कर रहे हैं कि ईरान के साथ समझौता किया जाए या सैन्य कार्रवाई के जरिए उसे निर्णायक रूप से कमजोर किया जाए। ट्रंप ने ईरान पर बड़े पैमाने पर नए अमेरिकी हमलों की संभावना से इनकार नहीं किया है।
दूसरी ओर, ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है। हालांकि, तेहरान ने संकेत दिया है कि अमेरिकी हमले फिर शुरू होने पर भी वह अपनी मौजूदा शर्तों और रुख से पीछे नहीं हटेगा। दोनों देशों के बीच बातचीत और सैन्य कार्रवाई की आशंकाओं के बीच स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। किसी संभावित समझौते या नए हमले को लेकर अभी अंतिम निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।
कच्चे तेल की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। सोमवार की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 115 डॉलर प्रति बैरल रही। पिछले सप्ताह आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं के बीच तेल की कीमतों में तेजी आई थी।
पश्चिम एशिया के अलावा यूक्रेन संकट और उत्तरी गोलार्ध में सर्दियों की तैयारियों के कारण भी ऊर्जा बाजार पर दबाव बना हुआ है। सर्दियों में गैस की मांग बढ़ने की आशंका के बीच तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर चिंताएं और बढ़ सकती हैं।
यदि संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति या समुद्री परिवहन प्रभावित होता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आयात पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए भी तेल की कीमतों में लगातार तेजी चिंता का विषय बन सकती है।
सऊदी अरब में तीन ड्रोन मार गिराने का दावा
यमन में सरकार का समर्थन करने वाले सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने सोमवार को दावा किया कि उसने सऊदी राजधानी रियाद और देश के दक्षिणी क्षेत्र में तीन ड्रोन को मार गिराया है।
गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मालिकी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ड्रोन को रोककर नष्ट किए जाने की जानकारी दी। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ड्रोन कहां से आए थे। यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोही पिछले कई सप्ताह से सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे हैं। ये हमले यमन संघर्ष में सऊदी अरब की भूमिका के विरोध में किए जा रहे हैं।
इससे पहले सोमवार को गठबंधन ने यह भी दावा किया था कि सऊदी वायु रक्षा प्रणाली ने रियाद की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को रोककर नष्ट कर दिया। क्षेत्र में लगातार हो रहे हमलों से सऊदी अरब के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
नेतन्याहू और इजरायली सेना प्रमुख के बीच मतभेद की खबर
इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और सेना प्रमुख एयाल जमीर के बीच ईरान को लेकर मतभेद होने की खबर सामने आई है। इजरायली टीवी चैनल चैनल-12 ने रविवार को दावा किया कि ईरान के संबंध में जारी एक नए निर्देश को लेकर दोनों के बीच मतभेद पैदा हुए हैं।
हालांकि, नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने इन खबरों का खंडन किया है। CBS News की रिपोर्ट के अनुसार, मामले की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ इजरायली सूत्र ने मतभेद की खबर को विश्वसनीय बताया है।
सूत्र के मुताबिक, विवाद का मुख्य मुद्दा ईरान पर नए हमलों का समर्थन या विरोध नहीं, बल्कि उनकी समय-सीमा हो सकती है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि सेना प्रमुख जमीर नए हमलों के विचार के पूरी तरह खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उनके समय को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
सूत्र के अनुसार, इजरायली सैन्य नेतृत्व का मानना हो सकता है कि तत्काल ऐसी स्थिति नहीं है, जिसके लिए बहुत कम समय में नए हमले करना जरूरी हो। हालांकि, मतभेदों की वास्तविक प्रकृति और किसी संभावित सैन्य कार्रवाई पर आधिकारिक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
ईरानी राष्ट्रपति बोले- अमेरिकी नीतियों से पूरी दुनिया प्रभावित
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया में अमेरिका की वजह से पैदा हुई असुरक्षा पूरी दुनिया को प्रभावित कर रही है। वह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निमंत्रण पर गैस निर्यातक देशों के मंच (GECF) की बैठक में शामिल होने के लिए मॉस्को जाने की तैयारी कर रहे थे।
पेजेशकियान ने कहा कि GECF में 12 सदस्य देश और आठ पर्यवेक्षक सदस्य हैं। उनके अनुसार, यह समूह वैश्विक गैस आपूर्ति के 70 प्रतिशत से अधिक हिस्से से जुड़ा है।
ईरानी राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में युद्ध और असुरक्षा के कारण ऊर्जा के निर्बाध प्रवाह में बाधा आई है। उन्होंने कहा कि मॉस्को यात्रा के दौरान ऊर्जा परिवहन मार्गों की सुरक्षा और अस्थिरता खत्म करने पर चर्चा की जाएगी।
मिस्र की संसद ने सऊदी अरब की मदद के लिए सैनिक भेजने को मंजूरी दी
मिस्र की संसद ने सोमवार को राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिसके तहत सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों के हमलों से बचाने के लिए सैनिक भेजे जा सकते हैं।
मिस्र के सरकारी समाचार पत्र अल-अहराम के अनुसार, संसद ने सऊदी अरब के समर्थन के लिए आवश्यक कदम उठाने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी। इससे पहले राष्ट्रपति अल-सीसी ने कहा था कि यह मिशन रक्षात्मक होगा और इसमें यमन पर हमला करना शामिल नहीं होगा। मिस्र के संविधान के अनुसार, विदेश में सैन्य अभियान के लिए सशस्त्र बलों की तैनाती से पहले राष्ट्रपति को राष्ट्रीय रक्षा परिषद से परामर्श और संसद के दो-तिहाई सदस्यों की मंजूरी लेनी होती है।
मिस्र अब तक पश्चिम एशिया के हालिया सैन्य संघर्षों से दूरी बनाए रखने और मध्यस्थता की कोशिशों में शामिल रहने की नीति अपनाता रहा है। सैनिक भेजने से जुड़ी मंजूरी के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा में उसकी भूमिका पर भी नजर रहेगी।
आगे क्या होगा?
ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत जारी रहने के बावजूद सैन्य कार्रवाई की आशंका बनी हुई है। सऊदी अरब में ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराने के दावे तथा मिस्र की संसद का फैसला संघर्ष के व्यापक क्षेत्रीय प्रभाव को दर्शाते हैं।
इस बीच, तेल की कीमतों में तेजी वैश्विक बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक बातचीत, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों से यह तय होगा कि ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ता है या तनाव कम होने की दिशा बनती है।


