
जम्मू कश्मीर में वक्फ बोर्ड की ओर से दरगाहों और वक्फ के अधीन धार्मिक स्थलों में पक्षियों को दाना डालने तथा खाद्य सामग्री बांटने पर जारी निर्देश ने सोमवार को कश्मीर में विवाद खड़ा कर दिया। बोर्ड की अध्यक्ष दरख्शां अंद्राबी द्वारा जारी आदेश के बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। लोगों ने इसे वर्षों पुरानी धार्मिक-सामाजिक परंपरा में अनावश्यक हस्तक्षेप करार दिया।
क्या था वक्फ बोर्ड का आदेश
वक्फ बोर्ड ने अपने नियंत्रण वाली दरगाहों के परिसरों में कबूतरों समेत पक्षियों को दाना डालने और खाद्य सामग्री, जिसमें पारंपरिक तहरी/तेहरी भी शामिल है, बांटने पर रोक लगाने की बात कही थी। आदेश का तर्क परिसर में स्वच्छता और व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ा बताया गया, लेकिन घाटी में इसका असर तत्काल धार्मिक भावना से जुड़े विवाद के रूप में सामने आया।
आदेश पर लोगों ने जताई नाराजगी
कश्मीर में कई दरगाहों और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं द्वारा पक्षियों को दाना डालना लंबे समय से धार्मिक आस्था और स्थानीय संस्कृति का हिस्सा माना जाता रहा है। ऐसे में प्रतिबंध की खबर फैलते ही लोगों में असंतोष बढ़ गया। सोशल मीडिया पर भी आदेश को लेकर बहस तेज हुई और कई लोगों ने वक्फ बोर्ड से इसे वापस लेने की मांग की।
वक्फ बोर्ड ने बदला आदेश
विरोध बढ़ने के बाद वक्फ बोर्ड को अपने आदेश में बदलाव करना पड़ा। हालांकि संशोधित निर्देश में किन बिंदुओं को बदला गया है, इसकी पूरी तस्वीर तत्काल स्पष्ट नहीं हो सकी है।
घटना ने एक बार फिर कश्मीर में धार्मिक स्थलों के प्रशासन और स्थानीय परंपराओं के बीच संतुलन का सवाल खड़ा कर दिया है। प्रशासन के सामने चुनौती अब यह है कि दरगाह परिसरों में स्वच्छता, भीड़ प्रबंधन और खाद्य वितरण से जुड़े व्यावहारिक मुद्दों का समाधान किया जाए, लेकिन ऐसा करते समय श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं भी आहत न हों। सोमवार का विवाद इसी संतुलन की जरूरत को रेखांकित करता है।


