चुनाव आयोग में आंतरिक कलह? दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार दर्ज कराई आपत्तियां, विपक्ष ने उठाए सवाल

चुनाव आयोग में आंतरिक कलह? दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार दर्ज कराई आपत्तियां, विपक्ष ने उठाए सवाल

Gyanesh Kumar

भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) में फैसले लेने का अधिकार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी शामिल हैं। ECI के नियमों के मुताबिक, अगर तीन में से दो चुनाव आयुक्त किसी मामले पर सहमत होते हैं, तो बहुमत का फैसला ही मान्य होता है। बहरहाल SIR पर इंडियन एक्सप्रेस की खबर पर बवाल मच गया। विपक्ष ने भी इस मामले में चुनाव आयोग पर सवाल उठाने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट से भी मामले को संज्ञान देने की सलाह दी। ALSO READ: 2,700 की कैंसर दवा 27,000 में! सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह मरीजों से ‘दिनदहाड़े डकैती’ है, अधिकारियों की चुप्पी पर उठाए सवाल

 

चुनाव आयुक्तों के बीच सहमति पर सवाल

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव आयोग के अंदर दो चुनाव आयुक्तों की जानकारी के बिना उन मामलों पर फैसले लिए गए, जिन पर उन दोनों चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी।

 

रिपोर्ट के अनुसार, जून 2025 में भारतीय चुनाव आयोग ने बिहार से SIR की शुरुआत की। इसके बाद 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13 करोड़ से ज्यादा नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर हुए। इसी प्रक्रिया के दौरान नए वोटर्स के रजिस्ट्रेशन, पुराने वोटर्स के नाम और अपीलों से जुड़े कई सवाल सामने आए। आयोग के भीतर भी इसी दौरान असहमति दर्ज होने लगी। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बीते 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज कीं। एक ही दिन में अधिकतम चार बार आपत्ति दर्ज की गई। ये आपत्तियां उन फैसलों और निर्देशों को लेकर थीं, जो उनके मुताबिक, उनकी सहमति के बिना जारी किए गए।

 

विपक्ष ने उठाए सवाल

कांग्रेस ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, मोदी के चहेते ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग में अपनी मनमर्जी चला रहे हैं। इस बारे में खुद दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार शिकायत की है। शिकायत में साफ कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्त – सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी नहीं दी जाती। उनसे सलाह नहीं ली जाती। उनसे बिना पूछे या बताए हुए फैसले लिए जा रहे हैं। ये 14 शिकायतें मुख्य तौर से – SIR, फॉर्म 6 में बदलाव, नए वोटर का रजिस्ट्रेशन, वोटर लिस्ट से नाम हटाना और जोड़ना, नाम बहाल करने के आदेशों के खिलाफ अपील, वोटर लिस्ट की सुरक्षा और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर है।

 

पार्टी ने कहा कि इन शिकायतों से साफ होता है कि तीन सदस्यों वाले चुनाव आयोग में सिर्फ ज्ञानेश कुमार की चल रही है। ज्ञानेश अपने बॉस मोदी की तरह तानाशाही कर रहे हैं और मोदी को खुश करने के लिए ‘वोट चोरी’ का काम कर रहे हैं। हम पहले भी कहते आए हैं – मोदी ने चुनाव आयोग पर कब्जा कर रखा है। ज्ञानेश कुमार मोदी के हाथ की कठपुतली है। इंडियन एक्सप्रेस की इस रिपोर्ट से ये बात साबित होती है। मोदी और ज्ञानेश ने मिलकर देश के लोकतंत्र को बहुत नुकसान पहुंचाया है। लेकिन ये बात याद रखना – वक्त आने पर सबका हिसाब होगा, जवाबदेही तय होगी। इस अपराध की सजा जरूर मिलेगी।

सपा नेता अखिलेश यादव ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि ये एक बेहद गंभीर समाचार है कि पिछले 10 महीनों में 2 चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के गलत निर्णयों पर 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज़ कराई है। इसका सीधा मतलब ये है कि सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं। एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी कोई सुनवाई नहीं है तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और ख़तरनाक हालात हैं। कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर सांविधानिक अपराध है। ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय स्वत: संज्ञान ले!

चुनाव आयोग ने मतेभदों के आरोपों पर दी सफाई

इस मामले पर चुनाव आयोग ने सफाई देते हुए कहा है कि ECI में मतभेदों के बावजूद सर्वसम्मति से फैसले लिए जाते हैं। कई मीडिया खबरों में मामले की सीधी जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया कि किसी भी चुनाव आयुक्त ने कोई असहमति नहीं जताई। उन्होंने केवल कुछ टिप्पणियां की थीं जिन पर आयोग ने विचार किया। ECI द्वारा लिए गए सभी फैसलों पर तीनों अधिकारियों मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के हस्ताक्षर हैं।