
SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर 2 चुनाव आयुक्तों की आपत्ति संबंधी इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट पर बवाल के बाद बुधवार को चुनाव आयोग ने भी सफाई दी। आयोग ने कहा कि सभी निर्णय बहुमत से हुए, सिर्फ कुछ ही नोट्स दिखाए जा रहे हैं। आयोग में सभी फैसले बहुमत से लिए गए हैं। ALSO READ: भारत के दुश्मन हैं CEC ज्ञानेश कुमार, SIR पर CJP नेता अभिजीत दीपके ने भी खोला मोर्चा
चुनाव आयोग ने प्रेस नोट जारी कर कहा, ECI संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत काम करने वाली संवैधानिक संस्था है। किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य बात है। ये अंतिम फैसला लेने से पहले निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। न केवल तीनों कमिश्नर, बल्कि आयोग का हर अधिकारी चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आयोग को अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह से अधिकृत है।
इसमें कहा गया है कि 10 महीनों के दौरान की कुछ खास आंतरिक टिप्पणियों/अवलोकनों को उजागर करना, जबकि बड़ी संख्या में मंजूरियों, फैसलों, निर्देशों और पहलों को नजरअंदाज करना, तस्वीर का केवल एक हिस्सा ही दिखाता है। हाल के महीनों में, आयोग ने कई फैसले लिए हैं, निर्देश जारी किए हैं, लगभग 40 नई पहलें शुरू की हैं और देश भर में मतदाता सूची संशोधन (SIR सहित) के संचालन सहित कई चुनावी सुधार किए हैं। ये सभी फैसले पिछले एक साल में पूरे आयोग के सर्वसम्मत फैसलों का परिणाम हैं।
बयान के अनुसार, आयोग ने हाल ही में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुदुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में बड़े चुनाव सफलतापूर्वक कराए हैं। चुनाव आयोग पूरी ईमानदारी के साथ अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। ALSO READ: ‘वोट चोरी देशद्रोह है…’, चुनाव आयोग और भाजपा पर भड़के राहुल गांधी,कहा- बख्शे नहीं जाओगे
क्या है मामला?
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव आयोग के अंदर दो चुनाव आयुक्तों की जानकारी के बिना उन मामलों पर फैसले लिए गए, जिन पर उन दोनों चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, जून 2025 में भारतीय चुनाव आयोग ने बिहार से SIR की शुरुआत की। इसके बाद 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13 करोड़ से ज्यादा नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर हुए। इसी प्रक्रिया के दौरान नए वोटर्स के रजिस्ट्रेशन, पुराने वोटर्स के नाम और अपीलों से जुड़े कई सवाल सामने आए। आयोग के भीतर भी इसी दौरान असहमति दर्ज होने लगी। ALSO READ: चुनाव आयोग में आंतरिक कलह? दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार दर्ज कराई आपत्तियां, विपक्ष ने उठाए सवाल
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बीते 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज कीं। एक ही दिन में अधिकतम चार बार आपत्ति दर्ज की गई। ये आपत्तियां उन फैसलों और निर्देशों को लेकर थीं, जो उनके मुताबिक, उनकी सहमति के बिना जारी किए गए।


