
SWIFT vs BRICS Pay: पश्चिमी देशों के वित्तीय और आर्थिक वर्चस्व को चुनौती देने के लिए ब्रिक्स (BRICS) देशों के समूह ने एक बड़ा कदम उठाया है। नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सीमा पार (Cross-Border) भुगतान को बढ़ावा देने के लिए ‘ब्रिक्स पे’ (BRICS Pay) में निवेश की अपनी प्रतिबद्धता जताई।
भुगतान प्रणालियों में “सभी के लिए एक नियम लागू नहीं हो सकता” के सिद्धांत को अपनाते हुए ब्रिक्स नेताओं ने 'ब्रिक्स पेमेंट्स टास्क फोर्स' (BPTF) को अधिक तेज़, सस्ते, सुलभ, पारदर्शी और सुरक्षित व्यावहारिक विकल्प तैयार करने को कहा है।
तक्षशिला संस्थान के जियोस्ट्रैटेजी प्रोग्राम के अध्यक्ष मनोज केवलरमानी के अनुसार, “इसका लक्ष्य किसी एक एकल वैश्विक प्रणाली को तैयार करना नहीं है, बल्कि ऐसे विकल्पों का समूह बनाना है जिससे सदस्य देश अपने वित्तीय लेनदेन के जोखिमों को कम कर सकें।”
- ब्रिक्स पे (BRICS Pay) क्या है और यह कैसे काम करता है?
- क्या ब्रिक्स पे अमेरिकी डॉलर (USD) और SWIFT नेटवर्क को रिप्लेस करेगा?
- BRICS Pay में भारत के UPI और RuPay की क्या भूमिका है?
- सिक्के/मुद्रा के बजाय स्थानीय करेंसी में व्यापार कैसे होगा?
- SWIFT क्या है और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यह क्यों विवादों में आया?
ब्रिक्स पे क्या है और कैसे काम करेगा? (What is BRICS Pay?)
'ब्रिक्स पे' एक विकेंद्रीकृत डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र (Decentralized Digital Payment Ecosystem) है, जिसे पहली बार 2018 में ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल द्वारा प्रस्तावित किया गया था।
यह कोई नई एकल मुद्रा (Single Currency) नहीं है, बल्कि यह सदस्य देशों की मौजूदा घरेलू भुगतान संरचनाओं को आपस में जोड़ने वाला एक नेटवर्क है।

ब्रिक्स की बदलती तस्वीर (Expanding BRICS Horizon)
2006 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन (BRIC) द्वारा गठित इस समूह में 2010 में दक्षिण अफ्रीका शामिल हुआ था। हाल के वर्षों में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और इंडोनेशिया के जुड़ने से अब इसमें 11 सदस्य देश शामिल हो चुके हैं। यह समूह वैश्विक स्तर पर बेहद शक्तिशाली बन चुका है:
- वैश्विक आबादी: दुनिया की लगभग 49% जनसंख्या
- वैश्विक जीडीपी: दुनिया की कुल जीडीपी का लगभग 40% हिस्सा
स्विफ्ट (SWIFT) की वर्तमान भूमिका और चुनौतियाँ
वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन का मुख्य माध्यम बेल्जियम स्थित SWIFT (Society for Worldwide Interbank Financial Telecommunication) नेटवर्क है। यह 11,000 से अधिक वित्तीय संस्थानों को जोड़ने वाला एक सुरक्षित मैसेजिंग नेटवर्क है।
स्विफ्ट पर निर्भरता का जोखिम : फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस के प्रमुख बैंकों को स्विफ्ट नेटवर्क से बाहर (Block) कर दिया। इस घटना ने विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मन में यह डर पैदा कर दिया कि पश्चिमी नियंत्रण वाली वित्तीय प्रणाली का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा सकता है।
हांगकांग विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर एलेजांद्रो रेयेस के अनुसार, इसी निर्भरता और डर ने वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों की मांग को तेज किया है।

ब्रिक्स पे v/s स्विफ्ट : क्या यह SWIFT की जगह ले सकता है?
विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि ब्रिक्स पे का मकसद SWIFT को रातों-रात पूरी तरह खत्म करना नहीं है, बल्कि उसके समानांतर एक सुरक्षित विकल्प खड़ा करना है।
- SWIFT का एडवांटेज : स्विफ्ट के पास दशकों में विकसित हुआ विशाल वैश्विक नेटवर्क, अंतरराष्ट्रीय मानक और विश्वसनीयता है।
- बहुध्रुवीय व्यवस्था (Pluralistic System) : प्रो. एलेजांद्रो रेयेस के अनुसार, असली बदलाव यह होगा कि वैश्विक भुगतान प्रणाली अब खंडित और बहुलवादी बनेगी, जहाँ कई प्रणालियाँ एक साथ काम करेंगी।
- तकनीकी चुनौती : नैटिक्सिस की मुख्य अर्थशास्त्री एलिसिया गार्सिया हेरेरो के अनुसार, सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत के UPI, चीन के CIPS और ब्राजील के Pix जैसी अलग-अलग घरेलू प्रणालियों को ब्रिक्स पे के जरिए बिना किसी रुकावट के एक साथ जोड़ा जा सकेगा या नहीं।
BRICS Pay और SWIFT का तुलनात्मक ढांचा

आर्थिक विश्लेषक प्रियंका शंकर के अनुसार, ब्रिक्स पे वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में एक बड़े रणनीतिक बदलाव का प्रतीक है। भले ही यह तुरंत अमेरिकी डॉलर या स्विफ्ट के प्रभुत्व को खत्म न कर पाए, लेकिन यह उभरती अर्थव्यवस्थाओं को पश्चिमी प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक तनावों से बचाने के लिए एक सुरक्षित, सस्ता और स्वतंत्र वित्तीय सुरक्षा कवच ज़रूर प्रदान करता है।


