बागेश्वर धाम में महिलाओं की सुरक्षा पर धीरेंद्र शास्त्री की अपील पर हर्षानंद गिरि का पलटवार, उठाए आश्रमों की व्यवस्था पर सवाल

बागेश्वर धाम में महिलाओं की सुरक्षा पर धीरेंद्र शास्त्री की अपील पर हर्षानंद गिरि का पलटवार, उठाए आश्रमों की व्यवस्था पर सवाल

भोपाल। बागेश्वर धाम में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की अपील के बाद अब साध्वी हर्षानंद गिरि उर्फ हर्षा रिछारिया का बयान सामने आया है। धीरेंद्र शास्त्री ने महिलाओं से अकेले बागेश्वर धाम नहीं आने और अकेले आने की स्थिति में किसी अनजान व्यक्ति या सेवादार पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करने की अपील की थी। इसके बाद हर्षानंद गिरि ने आश्रमों में महिलाओं की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि हर्षानंद ने अपने बयान में न तो बागेश्वर धाम का नाम लिया और न ही धीरेंद्र शास्त्री का लेकिन उन्हो्ंने महिलाओं के अकेले आश्रम नहीं आने के बयान का जिक्र किया है। 

 

क्या कहा बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने?- बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने शनिवार को छतरपुर में अपने दरबार में श्रद्धालुओं, खासकर माताओं और बहनों से सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि महिलाएं अकेली बागेश्वर धाम न आएं। अगर किसी कारण से उन्हें अकेले आना पड़े तो किसी अनजान व्यक्ति या धाम के सेवादार पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और वहां ज्यादा दिनों तक न रुकें।  

 

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सनातन के ऊपर चारों तरफ से हमले हो रहे हैं। बागेश्वर धाम पर जो भी लोग आते हैं, उनसे मेरी प्रार्थना है। माताएं-बहनें अकेली न आएं। अगर अकेली आएं, तो किसी भी व्यक्ति पर यहां भरोसा न करें। अनजान व्यक्ति पर अथवा यहां के किसी सेवादार पर। साथ ही यहां बहुत अधिक दिनों तक न ठहरें, क्योंकि यहां ऐसी कोई विशेष व्यवस्था नहीं है। उन्होंने आगे धाम की सुरक्षा व्यवस्था की सीमा बताते हुए कहा कि पूरा धाम करीब पांच किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है और हर जगह सुरक्षा उपलब्ध कराना संभव नहीं है। उनके मुताबिक मंदिर और हॉल की जिम्मेदारी धाम प्रबंधन ले सकता है, लेकिन पूरे क्षेत्र की जिम्मेदारी नहीं ली जा सकती।

 

धीरेंद्र शास्त्री ने धार्मिक स्थलों पर सामने आ रही घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि वह नहीं चाहते कि बालाजी धाम किसी घटना के कारण बदनाम हो। उन्होंने श्रद्धालुओं को मंदिर और प्रांगण के अलावा किसी अन्य स्थान पर जाने से बचने की सलाह भी दी।  उन्होंने कहा कि आए दिन किसी न किसी धाम का सुन रहे हैं। आए दिन किसी न किसी धाम पर कोई न कोई कलंक लग रहा है। अभी वृंदावन धाम में हो गया। हम नहीं चाहते कि बालाजी धाम बदनाम हो। सब प्रकार के लोग आते हैं। माताओं को भरोसा नहीं करना चाहिए। अकेली आ गईं, तो मंदिर और इस प्रांगण के अलावा कहीं जाना मत। इतना बड़ा इलाका है, सब जगह सुरक्षा तो लगा नहीं सकते।

 

हर्षानंद गिरि ने आश्रमों पर उठाए सवाल-पंडित धीरेंद्र शास्त्री की अपील के बाद मॉडल से संन्यास लेकर साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया ने अब लोगों से आश्रम नहीं जाने की अपील की है। इसके साथ ही उन्होंने आश्रमों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। धीरेंद्र शास्त्री का नाम लिए बिना  हर्षानंद गिरि ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी आश्रम से यह कहा जा रहा है कि महिलाएं अकेली न आएं और आश्रम के सेवादारों पर भी आंख मूंदकर भरोसा न करें, तो फिर परिवार अपने बच्चों और महिलाओं को वहां कैसे भेजे।

 

सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर उन्होंने कहा कि अब यह जो कुछ आश्रमों से बयान आ रहे हैं कि हमारे आश्रम में माताएं-बहनें न आएं। और अगर आ रही हैं तो आश्रम के किसी भी सेवादार पर भरोसा न करें। हम किसी माता-बहन की सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं ले रहे हैं। अब आप समझ रहे हो कि अगर किसी संत को खुद के आश्रम के सेवादारों पर भरोसा नहीं है तो उस आश्रम में भरोसा करके आप कैसे अपने बच्चों को, आप कैसे अपने परिवार को भेज सकते हैं? कौन ले रहा है सुरक्षा की गारंटी आश्रम के अंदर? कौन बोल रहा है कि तुम आओ और मैं तुम्हें पूरी सुरक्षा दूंगा। सच्चाई यही है। आप उसे स्वीकार करें, नहीं करें वो आपकी मर्जी है। मैं यह नहीं कह रही कि हर आश्रम बुरा है, लेकिन कुछ आश्रम सही नहीं हैं, क्यों इस दुविधा में फंसना है कि कौन-सी जगह सुरक्षित है और कौन-सी असुरक्षित? मत जाओ ना आश्रमों में! जाओ, दर्शन करके वापस अपने घर आओ।

 

हर्षानंद गिरि ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी संत को अपने ही आश्रम के सेवादारों पर भरोसा नहीं है, तो श्रद्धालुओं से उस व्यवस्था पर भरोसा करने की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं और परिवारों को किसी आश्रम में भेजने से पहले वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।  हर्षानंद गिरि ने यह भी स्पष्ट किया कि वह सभी आश्रमों को गलत या असुरक्षित नहीं बता रही हैं। उनका कहना है कि जहां सुरक्षा को लेकर सवाल या दुविधा हो, वहां लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।