सरकार ने 14,500 करोड़ की एनर्जी स्टोरेज स्कीम को दी मंजूरी! इन सेक्टर्स की कंपनियों को हो सकता है बड़ा फायदा

केंद्रीय कैबिनेट ने 4 नवंबर को 14,500 करोड़ रुपये की वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) स्कीम को मंजूरी दे दी। इस स्कीम के तहत FY31 तक 92 GWh की ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज क्षमता तैयार करने में मदद दी जाएगी। सरकार का मकसद बिजली ग्रिड में रिन्यूएबल एनर्जी की बड़ी हिस्सेदारी को जोड़ने के लिए स्टोरेज का ढांचा मजबूत करना है। इन प्रोजेक्ट्स में कुल 97,600 करोड़ रुपये का निवेश होने का अनुमान है और सरकार FY27 से FY31 के बीच वित्तीय मदद देगी।

92 GWh में 60 GWh पंप्ड हाइड्रो, 30 GWh बैटरी

स्कीम में सबसे बड़ा हिस्सा पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज का है। कुल 92 GWh में से 60 GWh पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज, 30 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और 2 GWh वैकल्पिक स्टोरेज तकनीकों के लिए रखे गए हैं। मतलब कुल क्षमता का करीब दो-तिहाई हिस्सा अकेले पंप्ड हाइड्रो से आएगा।

पैमाने को ऐसे देखें कि 1 GWh का मतलब 10 लाख यूनिट बिजली है। यानी ये स्कीम 9.2 करोड़ यूनिट बिजली जमा करके रखने लायक क्षमता तैयार करने में मदद करेगी। कुल 97,600 करोड़ रुपये के निवेश में सरकार की VGF करीब 15% बैठती है, बाकी निवेश प्रोजेक्ट लगाने वालों की तरफ से आएगा।

क्यों जरूरी है एनर्जी स्टोरेज?

सोलर और विंड से बिजली हमेशा एक जैसी नहीं बनती। धूप और हवा के हिसाब से उत्पादन घटता-बढ़ता रहता है। इसी उतार-चढ़ाव को संभालने और चौबीसों घंटे बिजली सप्लाई पक्की करने के लिए बड़े स्टोरेज प्रोजेक्ट्स अहम माने जाते हैं। ये स्कीम ऐसे प्रोजेक्ट्स को आर्थिक तौर पर फायदेमंद बनाने के लिए लाई गई है।

स्टोरेज सिस्टम उस वक्त की फालतू रिन्यूएबल बिजली को सोख लेते हैं, जब उत्पादन ज्यादा हो, और उसे तब छोड़ते हैं जब उत्पादन गिर जाए या मांग बढ़ जाए। मसलन, दोपहर में जब सोलर पैनल खूब बिजली बना रहे हों, तब अतिरिक्त बिजली स्टोर हो जाए और शाम को सूरज ढलने के बाद काम आए। इससे ग्रिड का संतुलन बनाए रखने के लिए पारंपरिक बिजली उत्पादन पर निर्भरता घटती है।

कैबिनेट ने कहा कि ये स्कीम ग्रिड की स्थिरता मजबूत करेगी, रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड से बेहतर तरीके से जोड़ेगी और भरोसेमंद व किफायती चौबीसों घंटे बिजली की उपलब्धता में मदद करेगी।

मौजूदा क्षमता का 170%, 2032 की जरूरत का 22%

इस स्कीम से जुड़ने वाली क्षमता देश की मौजूदा ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज क्षमता के 170% के बराबर है। मतलब आज जितनी स्टोरेज क्षमता है, ये नई क्षमता उसकी 1.7 गुना होगी।

आगे की जरूरत भी कहीं ज्यादा है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) की नेशनल इलेक्ट्रिसिटी प्लान के मुताबिक भारत को 2031-32 तक 411.4 GWh एनर्जी स्टोरेज क्षमता की जरूरत होगी। इसमें 236.22 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज और 175.18 GWh पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज शामिल है। 2029-30 तक ही ये जरूरत 336.4 GWh पर पहुंचने का अनुमान है।

नई VGF स्कीम के तहत आने वाली 92 GWh क्षमता FY32 की अनुमानित जरूरत का करीब 22% पूरा करेगी। यानी बाकी करीब 78% जरूरत को पूरा करने के लिए आगे भी बड़े पैमाने पर स्टोरेज प्रोजेक्ट्स की जरूरत पड़ेगी।

बोली से बंटेगी क्षमता, किसे मिलेगी मदद

स्कीम के तहत एनर्जी स्टोरेज क्षमता टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग के जरिए बांटी जाएगी। यानी जो कंपनी बोली में कम टैरिफ पर काम करने को तैयार होगी, प्रोजेक्ट उसकी तरफ जाएगा।

बैटरी स्टोरेज और पंप्ड हाइड्रो प्रोजेक्ट्स के लिए सरकारी और निजी, दोनों तरह की बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) VGF की हकदार होंगी। वहीं वैकल्पिक स्टोरेज तकनीक वाले प्रोजेक्ट्स सरकारी और निजी क्षेत्र की कंपनियां लगा सकेंगी।

बैटरी प्रोजेक्ट्स में 40% डोमेस्टिक कंटेंट जरूरी

घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए स्कीम में एक अहम शर्त रखी गई है। इसके तहत मदद पाने वाले बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स में कम से कम 40% डोमेस्टिक कंटेंट होना जरूरी होगा। मतलब बैटरी प्रोजेक्ट के हर 100 रुपये के सामान में कम से कम 40 रुपये का हिस्सा देश में बना होना चाहिए।

सरकार के मुताबिक इस प्रावधान का मकसद देसी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना, घरेलू उद्योग के लिए मौके बनाना और आयात किए जाने वाले कंपोनेंट्स पर निर्भरता कम करना है। ये स्कीम बैटरी मैन्युफैक्चरिंग के लिए पहले से चल रहे सप्लाई-साइड इंसेंटिव्स के साथ मिलकर काम करेगी और देश की एनर्जी स्टोरेज सप्लाई चेन को मजबूत करेगी।

4 GWh से 92 GWh तक, सरकार की स्टोरेज योजनाओं का सफर

ये मंजूरी बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स को VGF के जरिए फायदेमंद बनाने की सरकार की पिछली कोशिशों को आगे बढ़ाती है। सितंबर 2023 में कैबिनेट ने 4 GWh बैटरी स्टोरेज क्षमता तैयार करने के लिए 3,760 करोड़ रुपये की बजटीय मदद वाली स्कीम को मंजूरी दी थी। बाद में बैटरी की कीमतें घटने पर इसे बढ़ाकर करीब 13.85 GWh कर दिया गया।

जून 2025 में बिजली मंत्रालय ने 30 GWh और बैटरी स्टोरेज क्षमता के लिए VGF मदद का दायरा बढ़ाया। इसके लिए पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड से 5,400 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद तय की गई। अब नई स्कीम ने सरकार की इस मदद का दायरा बैटरी से आगे बढ़ाकर पंप्ड हाइड्रो और वैकल्पिक स्टोरेज तकनीकों तक पहुंचा दिया है।

किन सेक्टर्स की कंपनियों को हो सकता है फायदा?

  • हाइड्रो पावर और पंप्ड स्टोरेज डेवलपर्स
  • बैटरी मैन्युफैक्चरिंग
  • पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट
  • EPC, कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर
  • रिन्यूएबल एनर्जी (सोलर और विंड)
  • बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम)
  • नई स्टोरेज टेक्नोलॉजी
  • पावर फाइनेंसिंग