INDIA ब्लॉक मार्च मामले में सुनवाई, CJI सूर्यकांत ने वकीलों की भूमिका पर उठाए सवाल

INDIA ब्लॉक मार्च मामले में सुनवाई, CJI सूर्यकांत ने वकीलों की भूमिका पर उठाए सवाल

cji suryakant

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी दलों के INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कुछ वकीलों की भूमिका पर सवाल उठाए। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने पूछा कि क्या सुप्रीम कोर्ट परिसर के भीतर भी प्रदर्शन किए जा सकते हैं? उन्होंने कहा कि इस मामले में बार के कुछ सदस्यों की भागीदारी की भी जांच होनी चाहिए।

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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ इस मामले से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान CJI ने कहा, “क्या सुप्रीम कोर्ट के अंदर प्रदर्शन हो सकते हैं? बार के कुछ सदस्य भी इसमें शामिल हुए थे। हमें इसका जवाब चाहिए।” पीठ ने कहा कि इस मामले में राजनीतिक नेताओं, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए जाएंगे।

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12 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक ने निकाला था मार्च

 

यह मामला 12 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के नेताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट की तरफ निकाले गए मार्च से जुड़ा है। विपक्षी दलों के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। दिल्ली पुलिस ने भगवान दास रोड पर बैरिकेडिंग लगाकर मार्च को रोक दिया था। हालांकि, बाद में विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को याचिका सौंपने के लिए सुप्रीम कोर्ट परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई थी।

 

इस घटना के बाद चार वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अदालत परिसरों के भीतर और आसपास राजनीतिक प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए दिशा-निर्देश बनाने की मांग की। याचिका में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव और महुआ मोइत्रा सहित कई राजनीतिक नेताओं के प्रदर्शन से जुड़े आचरण की जांच करने की मांग भी की गई है।

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प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों पर पुलिस कार्रवाई का आरोप

सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर भी सुनवाई कर रहा है, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस पर ज्यादती करने के आरोप लगाए गए हैं। याचिकाओं में प्रदर्शनकारियों, वकीलों और पत्रकारों को कथित रूप से अवैध हिरासत में लेने और उनके साथ मारपीट करने के आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा सार्वजनिक आवागमन पर प्रतिबंध लगाने, परिवहन सेवाएं कथित तौर पर बंद करने और जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल के दर्जे से हटाने के फैसले पर भी सवाल उठाए गए हैं।