
Manipur Violence: जातीय हिंसा और तनाव की आग में झुलस रहे पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर में स्थिति एक बार फिर बेहद संवेदनशील हो गई है। पिछले 24 घंटों के भीतर कुकी समुदाय के 5 युवकों की हत्या की खबरें सामने आने के बाद राज्य के पर्वतीय जिलों में उबाल आ गया है। 28 अक्टूबर से लापता दो कुकी युवकों के शव राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (NH-2) के समीप बरामद किए जाने के बाद कुकी बहुल इलाकों में तनाव चरम पर पहुंच गया है। हिंसा और संभावित झड़पों की आशंका को देखते हुए नागा और कुकी बहुल क्षेत्रों में भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है।
मणिपुर में शांति बहाल करने के तमाम प्रशासनिक दावों के बीच जातीय संघर्ष का दायरा लगातार चौड़ा होता जा रहा है। ताजा घटनाक्रम में 28 अक्टूबर से लापता दो कुकी युवकों के शव सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम द्वारा एनएच-2 के पास बरामद किए गए हैं। यह इलाका नागा-बहुल सेनापति जिले को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग पर स्थित है। बरामद किए गए शवों की पहचान ताफौ कुकी गांव निवासी 21 वर्षीय थांगगिनलुन कॉन्ग्लोई और 20 वर्षीय पाओगिनलाल हांगसिंग के रूप में हुई है। ALSO READ: 12 घंटे का बंद और कटे सिर पर 48 घंटे का अल्टीमेटम! मणिपुर में फिर भड़की हिंसा की आग, जानिए क्या हैं हालात?
24 घंटे में 5 मौतें, कुकी संगठनों का बंद जारी
एनएच-2 से दो युवकों के शव मिलने से ठीक एक दिन पहले नागा-बहुल नान्गपोई (नोनी) जिले में तीन अन्य कुकी नागरिकों की हत्या का मामला सामने आया था। महज 24 घंटों के भीतर कुकी समुदाय के पांच लोगों के मारे जाने के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया है।
लापता युवकों की तलाश और हत्यारों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर कुकी नागरिक संगठन ‘कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी’ (COTU) द्वारा बुलाए गए आम बंद का असर व्यापक रूप से देखने को मिल रहा है। रविवार को भी बंद जारी रहा, जिससे राजमार्गों पर आवाजाही ठप रही और सामान्य जीवन प्रभावित हुआ। ALSO READ: मणिपुर में नहीं थम रहा जातीय तांडव: 2 दिनों में 6 हत्याएं, कोल्ड स्टोरेज में रखे गए कुकी पीड़ितों के शव! नागा गांव पर भी हमला
NSCN-IM पर आरोप
ताजा हत्याओं के बाद राज्य के राजनीतिक नेतृत्व में भी हलचल तेज हो गई है। कुकी समुदाय से आने वाली उपमुख्यमंत्री नेमचा किपजेन और नागा समुदाय के वरिष्ठ नेता लोसी दिखो दोनों ने ही इन हत्याओं की कड़े शब्दों में निंदा की है और शांति बनाए रखने की अपील की है।
यद्यपि मणिपुर पुलिस ने अभी तक हत्याओं के पीछे शामिल संदिग्धों या संगठनों के नामों का आधिकारिक खुलासा नहीं किया है, लेकिन कुकी संगठनों ने खुले तौर पर नागा सशस्त्र समूह ‘एनएससीएन-आईएम’ (NSCN-IM) पर इस वारदात को अंजाम देने का आरोप लगाया है। उल्लेखनीय है कि NSCN-IM वर्ष 1997 से केंद्र सरकार के साथ संघर्ष विराम समझौते के तहत है।
फरवरी से अब तक 60 से अधिक मौतें
ये हत्याएं ऐसे संवेदनशील समय में हुई हैं जब एक तरफ मैतेई और दूसरी तरफ नागा संगठनों ने कुकी उग्रवादी समूहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर इंफाल घाटी और नागा-बहुल जिलों में बड़े पैमाने पर रैलियां निकालकर अपने आंदोलन को तेज कर दिया है। पूर्वोत्तर मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नागा और कुकी समुदायों के बीच प्रत्यक्ष संघर्ष शुरू होता है, तो राज्य की स्थिति और अधिक बेकाबू हो सकती है। इस वर्ष फरवरी से जारी इस नए दौर के संघर्ष में अब तक 60 से अधिक लोगों की जानें जा चुकी हैं।


