US Midterm Elections: अमेरिका में मंगलवार 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव के लिए वोटिंग हो रही है। इस चुनाव से तय होगा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों में अपना बहुमत बचा पाती है या डेमोक्रेटिक पार्टी उनमें से एक या दोनों सदनों पर कब्जा कर लेती है। इसका असर ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के अगले दो सालों पर पड़ सकता है।
भारत में चुनाव पर नजर रखने वाले लोगों के लिए नतीजों का सिलसिला बुधवार 4 नवंबर की सुबह से शुरू होगा। अमेरिका के इन चुनावों को ट्रंप सरकार के कामकाज पर जनता की राय के तौर पर भी देखा जा रहा है। ईरान के साथ लंबे समय से जारी युद्ध, महंगाई, व्यापार शुल्क यानी टैरिफ और देश के भीतर बढ़ते राजनीतिक मतभेद जैसे मुद्दे चुनाव में अहम हैं। अगर डेमोक्रेटिक पार्टी कांग्रेस के किसी एक सदन या दोनों में बहुमत हासिल कर लेती है तो ट्रंप के फैसलों पर संसद की निगरानी और जांच बढ़ सकती है।
3 नवंबर को अमेरिका में वोटिंग, 435 हाउस सीटों पर चुनाव
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव 3 नवंबर को हो रहे हैं। इस चुनाव में प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इसके अलावा सीनेट की 100 सीटों में से 37 सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। देश के 36 राज्यों में गवर्नर पद के लिए भी वोटिंग होगी। आपको बता दें कि अमेरिकी कांग्रेस के दो सदन होते हैं- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट।
हाउस के सदस्यों का कार्यकाल दो साल का होता है, इसलिए इसकी सभी सीटों पर हर दो साल में चुनाव होता है। वहीं सीनेटर छह साल के लिए चुने जाते हैं। सीनेट की सीटों को तीन हिस्सों में बांटा गया है और हर दो साल में लगभग एक-तिहाई सीटों पर चुनाव होता है। इन चुनावों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस के दोनों सदनों में अपना नियंत्रण बनाए रखेगी या डेमोक्रेट्स उसे चुनौती देकर बहुमत हासिल कर लेंगे।
भारत में कब शुरू होगी वोटिंग और कब बंद होंगे पोलिंग स्टेशन?
अमेरिका में अलग-अलग टाइम जोन होने की वजह से सभी राज्यों में मतदान एक साथ शुरू या खत्म नहीं होता। वहां 3 नवंबर को स्थानीय समय के अनुसार सुबह से वोटिंग शुरू होगी और पश्चिम की ओर बढ़ते हुए अलग-अलग समय पर पोलिंग स्टेशन बंद होंगे। भारत में पहली वोटिंग प्रक्रिया मंगलवार 3 नवंबर की शाम से शुरू हो जाएगी। मतदान पूरी रात चलेगा और आखिरी पोलिंग स्टेशन बुधवार 4 नवंबर की सुबह बंद होंगे।
अमेरिका के पूर्वी हिस्से में कुछ राज्यों के पोलिंग स्टेशन शाम 7 बजे ईस्टर्न टाइम (ET) पर बंद होने शुरू होंगे। भारतीय समय के अनुसार यह बुधवार सुबह 5:30 बजे होगा। इसके बाद अलग-अलग राज्यों में मतदान खत्म होने के साथ वोटों की गिनती और शुरुआती नतीजे सामने आने लगेंगे। अलास्का के कुछ पश्चिमी इलाकों में आखिरी पोलिंग स्टेशन 4 नवंबर को अमेरिकी समय के अनुसार देर रात तक खुले रह सकते हैं।
भारत में कब से आने लगेंगे अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजे?
भारत में चुनाव के शुरुआती नतीजे बुधवार 4 नवंबर की सुबह करीब 5:30 बजे से आने शुरू हो सकते हैं। यह वह समय है जब अमेरिका के पूर्वी हिस्से के कई राज्यों में वोटिंग खत्म होने लगेगी। हालांकि अमेरिका में पूरे देश के लिए वोटों की गिनती का कोई एक तय समय नहीं है। हर राज्य अपने नियमों के हिसाब से वोटों की गिनती करता है।
कुछ राज्यों में डाक से भेजे गए बैलेट यानी पोस्टल वोट की प्रक्रिया चुनाव के दिन से पहले शुरू हो जाती है, जबकि कुछ राज्यों में इनकी गिनती के नियम अलग हैं। इसलिए शुरुआती रुझान आने के बावजूद यह जरूरी नहीं है कि बुधवार सुबह ही यह साफ हो जाए कि हाउस और सीनेट में किस पार्टी को बहुमत मिलेगा। जिन सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी होगा, वहां पोस्टल वोट और दूसरे लंबित बैलेट की गिनती पूरी होने तक नतीजों का इंतजार करना पड़ सकता है।
किन मुद्दों पर हो रहा है चुनाव?
इस बार का चुनाव सिर्फ सांसदों और गवर्नरों को चुनने तक सीमित नहीं है। इसे ट्रंप की नीतियों पर जनता की राय के तौर पर देखा जा रहा है। ईरान के साथ युद्ध, महंगाई, रोजमर्रा की चीजों की कीमतें, दूसरे देशों पर लगाए गए टैरिफ और इमिग्रेशन यानी दूसरे देशों से अमेरिका आने वाले लोगों से जुड़े नियम चुनाव के बड़े मुद्दे हैं। रिपब्लिकन पार्टी ट्रंप की नीतियों और उनके फैसलों के आधार पर वोट मांग रही है। डेमोक्रेटिक पार्टी महंगाई, सरकार के कामकाज और ट्रंप प्रशासन के फैसलों को लेकर सवाल उठा रही है।
रॉयटर्स/इप्सोस के 2 नवंबर को जारी सर्वे के मुताबिक ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 32% थी। ये उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के सबसे निचले स्तर के करीब है। सर्वे में कांग्रेस चुनाव के लिए 46% रजिस्टर्ड वोटरों ने डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन किया जबकि 38% ने रिपब्लिकन पार्टी को चुना। हालांकि यह देशभर के वोटरों की पसंद का सर्वे है। इससे अलग-अलग राज्यों और सीटों पर जीत का सीधा अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
डेमोक्रेट्स की नजर हाउस और सीनेट में बढ़त पर
चुनाव से पहले आए सर्वे में डेमोक्रेटिक पार्टी को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बढ़त मिलने की संभावना जताई जा रही थी। पार्टी की कोशिश है कि वह हाउस में बहुमत हासिल करे और सीनेट में भी अपनी स्थिति मजबूत बनाए। सीनेट में डेमोक्रेट्स के लिए चुनौती ज्यादा बड़ी है।
100 सदस्यों वाले इस सदन में बहुमत हासिल करने के लिए उन्हें मौजूदा स्थिति के मुकाबले कम से कम चार सीटों का नेट फायदा चाहिए। पार्टी की नजर मिशिगन, मेन, ओहायो, कंसास, टेक्सास, आयोवा और अलास्का जैसे राज्यों पर है। दूसरी ओर रिपब्लिकन पार्टी के सामने दोनों सदनों में अपना बहुमत बचाने की चुनौती है। अगर डेमोक्रेट्स हाउस पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं, तो ट्रंप प्रशासन के फैसलों पर संसद में सवाल उठाने और जांच कराने की उनकी ताकत बढ़ सकती है।
ट्रंप ने 32 दिनों में 20 राज्यों का दौरा किया
चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में ट्रंप ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए कई रैलियां कीं। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने बताया कि ट्रंप ने आखिरी 32 दिनों में 20 राज्यों का दौरा किया और 30 चुनावी रैलियों को संबोधित किया। इनमें ज्यादातर रिपब्लिकन पार्टी के मजबूत माने जाने वाले राज्य थे।
चुनाव प्रचार के आखिरी दिन ट्रंप ने वॉशिंगटन के लिंकन मेमोरियल रिफ्लेक्टिंग पूल के पास कार्यक्रम किया। इस दौरान उन्होंने टैक्स में कटौती, टैरिफ और बॉर्डर सिक्योरिटी जैसे मुद्दों के बजाय राजधानी में हुए बदलावों और निर्माण कार्यों पर ज्यादा बात की। डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रचार को पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी मजबूती दी। उन्होंने ओहायो, मिशिगन और जॉर्जिया में रैलियां कीं। जॉर्जिया में ओबामा ने कहा कि यह चुनाव ट्रंप प्रशासन के फैसलों पर रोक लगाने का एक अहम मौका है।
अगर डेमोक्रेट्स जीते तो ट्रंप के लिए क्या बदलेगा?
अमेरिका में राष्ट्रपति और कांग्रेस की शक्तियां अलग-अलग हैं। राष्ट्रपति सरकार चलाते हैं जबकि कांग्रेस कानून बनाने, बजट को मंजूरी देने और सरकार के कामकाज की निगरानी करने में अहम भूमिका निभाती है। अगर डेमोक्रेटिक पार्टी हाउस या सीनेट में बहुमत हासिल कर लेती है तो ट्रंप प्रशासन के लिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना पहले जितना आसान नहीं रहेगा।
ऐसी स्थिति में कांग्रेस की समितियां सरकारी फैसलों, खर्च और प्रशासनिक कामकाज की जांच कर सकती हैं। ट्रंप की नीतियों पर सुनवाई और सवाल-जवाब बढ़ सकते हैं। कानून पास कराने के लिए उन्हें विपक्षी सांसदों का समर्थन भी जुटाना पड़ सकता है। हालांकि चुनाव में हार के बाद भी ट्रंप राष्ट्रपति बने रहेंगे। उनका मौजूदा कार्यकाल जनवरी 2029 तक है। राष्ट्रपति के तौर पर उनके पास एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी करने और कांग्रेस से पास हुए कानून पर वीटो लगाने जैसी शक्तियां बनी रहेंगी।
ट्रंप ने रिपब्लिकन पार्टी के दोनों सदनों में बहुमत खोने की आशंका पर कहा था कि ऐसी स्थिति में वह मिस्टर वीटो बन जाएंगे। उनका इशारा राष्ट्रपति के उस अधिकार की ओर था, जिसके तहत वह कांग्रेस से पास किसी बिल को मंजूरी देने से इनकार कर सकते हैं। हालांकि कांग्रेस दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से राष्ट्रपति के वीटो को पलट सकती है।
चुनाव में भारतीय मूल के कई उम्मीदवार भी मैदान में
इन चुनावों में भारतीय मूल के कई अमेरिकी नागरिक भी अलग-अलग पदों के लिए किस्मत आजमा रहे हैं। ओहायो में भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी गवर्नर पद के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला डेमोक्रेटिक पार्टी की एमी एक्टन से है। इसके अलावा भारतीय मूल की नित्या रमन लॉस एंजिलिस के मेयर पद के लिए अपनी पूर्व बॉस करेन बास के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद रो खन्ना, अमी बेरा, प्रमिला जयपाल और सुहास सुब्रमण्यम फिर से चुनाव मैदान में हैं। वहीं पिया दांडिया और अमीश शाह जैसे भारतीय मूल के उम्मीदवार भी पहली बार अमेरिकी कांग्रेस में जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इन उम्मीदवारों की जीत पर भी भारतीय-अमेरिकी समुदाय की नजर रहेगी।

