Delhi Pollution: देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। बढ़ते प्रदूषण की वजह से लोगों को खराब हवा में सांस लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है। मंगलवार को इंडिया गेट के आसपास AQI 374 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने एक दिन पहले ही ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण यानी स्टेज-II की पाबंदियां लागू की थीं। इसके बावजूद राजधानी में प्रदूषण का स्तर चिंताजनक बना हुआ है। वहीं, ठंड बढ़ने, हवाओं की रफ्तार कम होने और आसपास के राज्यों में पराली जलाने से आने वाले दिनों में प्रदूषण की समस्या और बढ़ सकती है।
सोमवार को कितना था AQI
सोमवार को दिल्ली का औसत AQI 324 दर्ज किया गया था, जो हवा की ‘बहुत खराब’ स्थिति को दर्शाता है। दिवाली से पहले बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए CAQM ने पूरे दिल्ली-NCR में GRAP के दूसरे चरण की पाबंदियां लागू कर दीं। इसके तहत सड़कों की मशीनों से सफाई और धूल कम करने के लिए नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाएगा। इसके अलावा, निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाया गया है। लोगों को सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से मेट्रो, CNG और इलेक्ट्रिक बसों की संख्या और सेवाओं को भी बढ़ाया जाएगा।
हर साल बढ़ता है प्रदुषण
दिल्ली में हर साल अक्टूबर से प्रदूषण बढ़ने लगता है। इस साल देर तक हुई बारिश और तेज हवाओं के कारण कुछ समय तक प्रदूषण का असर कम रहा। लेकिन अब ठंड बढ़ने और हवाओं की रफ्तार कम होने से प्रदूषण फिर बढ़ने लगा है। हवा धीमी होने के कारण धुआं और धूल के कण एक जगह जमा हो जाते हैं, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है। वहीं, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने से निकलने वाला धुआं भी दिल्ली की हवा को खराब कर रहा है। इस साल बारिश देर तक होने की वजह से पंजाब और हरियाणा में फसलों की कटाई भी देर से हुई। इसके कारण पराली जलाने का समय अक्टूबर के आखिरी दिनों से बढ़कर नवंबर तक पहुंच गया है। इस दौरान सर्दियों में हवाएं भी धीमी चलती हैं, जिससे पराली का धुआं हवा में फैलने के बजाय आसपास जमा हो जाता है और प्रदूषण बढ़ जाता है।
21 अक्टूबर को ही लगाया गया GRAP-1
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए CAQM ने 21 अक्टूबर को ही GRAP का पहला चरण लागू कर दिया था। उस समय राजधानी का AQI 244 दर्ज किया गया था। इसके तहत लोगों को निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। साथ ही, वाहनों के PUC सर्टिफिकेट की जांच तेज करने, सड़क किनारे खाने-पीने की दुकानों और व्यावसायिक तंदूरों में कोयले व लकड़ी जलाने पर रोक लगाने जैसे कदम उठाए गए। इसके अलावा, प्रदूषण कम करने के लिए डीजल जनरेटर के इस्तेमाल को भी सीमित किया गया।
दिल्ली में लागू है GRAP 2
GRAP के दूसरे चरण में प्रदूषण कम करने के लिए कई अतिरिक्त कदम उठाए गए हैं। इसके तहत सड़कों की मशीनों से बार-बार सफाई की जाएगी और धूल कम करने के लिए पानी का छिड़काव बढ़ाया जाएगा। साथ ही, निजी गाड़ियों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने और सार्वजनिक परिवहन की सुविधाएं बेहतर करने पर जोर दिया गया है। अगर प्रदूषण का स्तर और बढ़ता है, तो GRAP के तीसरे और चौथे चरण की सख्त पाबंदियां लागू की जा सकती हैं। इनमें BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल कारों के चलने पर रोक लगाने के साथ-साथ सबसे गंभीर स्थिति में ऑड-ईवन नियम लागू करना भी शामिल है।

