
अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं। इन मिडटर्म के नतीजे अमेरिकन नेशनल लेजिस्लेचर, स्टेट गवर्नरशिप और हजारों लोकल ऑफिस में पावर बैलेंस को तय करते हैं। मिडटर्म चुनाव यानी राष्ट्रपति के 4 साल के कार्यकाल के ठीक बीच में होने वाले संसद के चुनाव।
इस चुनाव से ट्रंप की कुर्सी को तो खतरा नहीं है, लेकिन ट्रंप की ताकतों पर कुछ खतरा जरूर है। वोटिंग खत्म होते ही गिनती शुरू हो जाएगी और 4 नवंबर को नतीजे आ जाएंगे।
क्या होता है मिडटर्म इलेक्शन : मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच होते हैं। इनमें राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव नहीं होता, बल्कि कांग्रेस के दोनों सदनों के साथ कई राज्यों के महत्वपूर्ण पदों के लिए मतदान होता है। इस बार प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर चुनाव होगा। इसके अलावा, 39 राज्यों में गवर्नर पद के चुनाव निर्धारित हैं। नई यानी 120वीं कांग्रेस जनवरी 2027 में कामकाज शुरू करेगी।
ट्रंप की ताकत हो जाएंगी सीमित : राष्ट्रपति की शक्तियां संविधान से आती हैं न कि सिर्फ कांग्रेस के बहुमत से। अगर ट्रंप मिडटर्म में रिपब्लिकन हाउस, सीनेट या दोनों हार जाते हैं तो ट्रंप की ताकत सीमित हो जाएगी, लेकिन वे पूरी तरह कमजोर नहीं होंगे। ट्रम्प पहले की तरह एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी कर सकते हैं, कांग्रेस के किसी भी बिल पर वीटो लगा सकते हैं और विदेश नीति व सैन्य कार्रवाइयों पर फैसले ले सकते हैं।
क्या ट्रंप की ताकतों पर होगा असर?
कानून टैक्स कटौती : ट्रंप की मनमाफिक नए कानून टैक्स कटौती या सख्त इमिग्रेशन बिल पास नहीं करा पाएंगे। उनके पास इसके लिए पर्याप्त वोट नहीं होंगे।
फैसलों पर जांच : समितियों पर डेमोक्रेट्स का कंट्रोल हो सकता है। वे ट्रंप प्रशासन के कामकाज, फैसलों वगैरह पर जांच शुरू कर सकते हैं। सम भेज सकते हैं।
खर्चों को लेकर खींचतान : हाउस सरकारी बजट पास करता है। ट्रंप और डेमोक्रेट्स के बीच सरकारी खर्चों को लेकर खींचतान बढ़ सकती है। सरकारी कामकाज ठप पड़ सकता है।
ट्रंप की नियुक्तियां मुश्किल : अगर सीनेट में डेमोक्रेट्स का बहुमत आ गया, तो ट्रंप की पसंद के नए जजों कैबिनेट मंत्रियों और अन्य अधिकारियों की नियुक्तियां मुश्किल हो सकती हैं।
ट्रंप को और क्या-क्या नुकसान हो सकता है?
मिडटर्म चुनाव के बाद अमेरिका की राजनीति 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की ओर बढ़ने लगेगी। ऐसे में ट्रंप को 2 बड़े नुकसान हो सकते हैं।
क्या पार्टी पर कम हो सकती है पकड़ : ट्रम्प का यह दूसरा कार्यकाल है। कानूनन वे तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बन सकते। उनके ‘लेम-डक’ प्रेसिडेंट बनने और पार्टी पर पकड़ कमजोर होने का खतरा है। अगले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए कुछ रिपब्लिकन नेता ट्रम्प की बात मानना और उनका बचाव करना बंद कर सकते हैं। वे अपनी अलग राजनीतिक पहचान बना सकते हैं।
ट्रंप परिवार के क्रिप्टो कारोबार की जांच : ट्रम्प परिवार से जुड़ी World Liberty Financial नाम की एक क्रिप्टो कंपनी है। इसका USD1 नाम का स्टेबलकॉइन है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मई 2025 में आबू धाबी की निवेश फर्म MGX ने क्रिप्टो एक्सचेंज Binance में 2 अरब डॉलर का निवेश किया था। इस सौदे में USD1 का इस्तेमाल हुआ। ऐसे में USD1 के पीछे जमा संपत्तियों से मिलने वाले ब्याज से ट्रंप परिवार को करीब 80 मिलियन डॉलर का मुनाफा हो सकता है। इसके अलावा ट्रंप के राष्ट्रपति पद संभालने से पहले भी UAE की One Investment की ओर से इस क्रिप्टो कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी लेने के आरोप लगते रहे हैं। बाद में Binance के फाउंडर चांगपेंग झाओ पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे और वे जेल भी गए, तो अक्तूबर 2025 में ट्रंप ने उन्हें क्षमादान दे दिया। इसके चलते ट्रंप पर निजी फायदे के आरोप लगे।
बचने के लिए क्या करेंगे ट्रंप : 2020 में जब जो बाइडेन अमेरिका के राष्ट्रपति बने, तब से ट्रंप चुनाव में गड़बड़ी की बाते कह रहे हैं। तब ऐसा माहौल बना कि 6 जनवरी को हजारों ट्रम्प समर्थक अमेरिकी संसद तक पहुंच गए थे। ट्रम्प ने सितंबर में रिपब्लिकन पार्टी के कन्वेंशन में सहयोगियों से कहा कि उनकी (डेमोक्रेट्स) तरह चीटिंग करो। ट्रंप के कई सलाहकारों ने उन्हें चुनाव में धांधली की आशंका के चलते इमरजेंसी लगाने का भी सुझाव दिया है। इसे चुनाव प्रक्रिया में केंद्रीय एजेंसियों की हिस्सेदारी बढ़ जाएगी। हालांकि रिपोर्ट्स हैं कि ट्रम्प ने यह सुझाव खारिज कर दिया है, क्योंकि इमरजेंसी लगाने से चुनाव प्रक्रिया में राष्ट्रपति का कंट्रोल नहीं हो जाएगा। ट्रम्प प्रशासन फर्जीवाड़े के नाम पर इलेक्शन अधिकारियों को चुनाव परिणाम बदलने, खारिज करने, या टालने के लिए धमका सकता है। 2020 का राष्ट्रपति चुनाव हारने के बाद भी ट्रम्प ने ऐसा किया था। इससे काउंटिंग में रुकावट आएगी। जनवरी 2020 में फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन के एजेंट्स ने जॉर्जिया के फुल्टन काउंटी में चुनाव ऑफिस पर छापा मारा और चुनाव से जुड़े सैकड़ों रिकॉर्ड जब्त कर लिए थे। इसके अलावा चुनाव निगरानी के लिए 1000 फेडरल इलेक्शन मॉनिटर्स तैनात किए गए हैं। यह 2024 राष्ट्रपति चुनाव के समय तैनात 590 अधिकारियों से लगभग दोगुने हैं। सुरक्षा का हवाला देकर वोटिंग के दिन सैनिकों की तैनाती भी बढ़ाई जा सकती है, जिससे लोगों में डर का माहौल बना सकता है।


