
Mayawati Gangajal Sankalp Yatra: राजनीति में निष्ठा और आस्था का जब अनोखा संगम होता है, तो ऐसे दृश्य देखने को मिलते हैं जो हर किसी का ध्यान खींच लेते हैं। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को 5वीं बार प्रदेश की कमान दिलाने की कामना के साथ बसपा समर्थक आशुतोष पाठक ने एक अनोखी ‘गंगाजल संकल्प यात्रा’ निकाली।
पारंपरिक रूप से धार्मिक प्रतीकों से दूरी बनाकर रखने वाली बसपा के समर्थकों में अब भक्ति और राजनीतिक निष्ठा का यह नया रूप देखने को मिल रहा है। आशुतोष पाठक ने न केवल बसपा सुप्रीमो को ‘मैया’ कहकर संबोधित किया, बल्कि उन्हें मां दुर्गा का अवतार बताते हुए उत्तर प्रदेश में उनकी वापसी की मंगलकामना की।
संत रविदास घाट से 1090 चौराहे तक की ‘गंगाजल यात्रा’
27 अक्टूबर की सुबह 10 बजे, वाराणसी के ऐतिहासिक संत रविदास घाट पर विधि-विधान से गंगा आरती और पूजा-अर्चना के साथ यात्रा का शुभारंभ हुआ। वाराणसी से पवित्र गंगाजल लेकर आशुतोष पाठक विभिन्न जिलों से होते हुए लखनऊ पहुंचे। यात्रा का समापन लखनऊ के 1090 चौराहे (प्रस्तावित मायावती मंदिर स्थल) पर हुआ, जहां उन्होंने पवित्र गंगाजल अर्पित कर विशेष पूजा-अर्चना की।
मायावती जी मेरी ‘मैया’ हैं!
यात्रा के दौरान आशुतोष पाठक काफी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि मैया मायावती जी के प्रति असीम श्रद्धा और सामाजिक न्याय की भावना के साथ मैंने यह संकल्प यात्रा निकाली है। मैं मां गंगा से प्रार्थना करता हूं कि उत्तर प्रदेश में सुख, शांति, समृद्धि और सामाजिक न्याय की फिर से बहाली हो और मैया मायावती जी पांचवीं बार राज्य की बागडोर संभालें।
पहले भी बटोर चुके हैं सुर्खियां
आशुतोष पाठक का मायावती के प्रति यह अनोखा समर्पण पहली बार नहीं दिखा है। वे पहले भी अपने बयानों और हरकतों को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। वे मायावती को माँ दुर्गा के स्वरूप में प्रस्तुत कर उनकी पूजा कर चुके हैं। इससे पहले वे मायावती के लखनऊ स्थित आवास पर एक बड़ा पोस्टर लेकर पहुंचे थे, जिसमें मायावती को ‘दुष्टों का संहार करने वाली देवी’ दर्शाया गया था। हालांकि सुरक्षा कारणों से पुलिस ने उन्हें रोक दिया था।
पाठक का कहना है कि जिस प्रकार मां दुर्गा ने दुष्टों और असुरों का संहार किया था, ठीक उसी तरह मायावती जी ने अपने शासनकाल में अपराधियों और असामाजिक तत्वों पर नकेल कसी थी। आज उत्तर प्रदेश को फिर से उसी मजबूत नेतृत्व की जरूरत है।


