उत्तर प्रदेश पुलिस ने साइबर स्पेस में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले ऑनलाइन अपराधों, यौन उत्पीड़न और शोषण के मामलों पर बेहद सख्त और प्रभावी कार्रवाई की है। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा चलाए गए अभियान और क्विक ऑपरेशन की वजह से ऑनलाइन शोषण और उत्पीड़न के जाल में फंसे अब तक कुल 24 बच्चों का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है।
जानिए किस तरह अपराध को अंजाम देते हैं अपराधी
उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से जारी आधिकारिक प्रेस नोट के मुताबिक अपराधी अपनी पहचान छिपाकर या पड़ोस, पारिवारिक या सामाजिक संबंधों का फायदा उठाकर बच्चों का यौन शोषण करते हैं। कुछ मामलों में अपराधी बच्चों से संबंधित आपत्तिजनक फोटो और वीडियो बना लेते हैं और फिर उन्हें ब्लैकमेल कर गलत काम करने पर मजबूर करते हैं। कई बार डिजिटल माध्यमों से ऐसी चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लोइटेशन एंड एब्यूज मैटेरियल (CSEAM) सामग्री तैयार कर उसे व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, स्नैपचैट और जीमेल जैसे ऑनलाइन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए बेचा और प्रसारित किया जाता है। यह सामग्री बच्चों के अधिकारों और उनकी गरिमा का गंभीर उल्लंघन है और इसे वैश्विक स्तर पर सबसे गंभीर साइबर अपराधों में से एक माना जाता है। CSEAM का प्रसार बच्चों को लंबे समय तक शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक क्षति पहुंचा सकता है।
यूपी पुलिस को कैसे मिलती है इन अपराधों की सूचना?
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ ऑनलाइन अपराधों की जानकारी मुख्य रूप से दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय तंत्रों के जरिए पुलिस तक पहुंचती है।
1. NCMEC और CYBER TIPLINE (अंतरराष्ट्रीय तंत्र)
National Center for Missing & Exploited Children (NCMEC) अमेरिका स्थित एक गैर-लाभकारी संस्था है। ये बच्चों के यौन शोषण, ऑनलाइन उत्पीड़न और लापता बच्चों से संबंधित मामलों पर काम करती है। NCMEC द्वारा संचालित Cyber Tipline एक सेंट्रलाइज रिपोर्टिंग सिस्टम है। इसके जरिए मेटा, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, स्नैपचैट, टिकटॉक जैसी इलेक्ट्रॉनिक सर्विस प्रदाता कंपनियां संभावित CSEAM सामग्री और ऑनलाइन यौन शोषण गतिविधियों की रिपोर्ट भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) को भेजती हैं।
गृह मंत्रालय (भारत सरकार) के अधीन संचालित I4C और NCMEC के बीच 01 अप्रैल 2024 से एक MoU इफेक्टिव है। इसके तहत भारत से जुड़ी साइबर टिपलाइन रिपोर्ट्स सीधे I4C को मिलती हैं। I4C की OCWC (Online Cybercrime against Women and Children) इकाई इन रिपोर्ट्स का विश्लेषण कर संबंधित राज्यों और पुलिस एजेंसियों को कार्रवाई के लिए भेजती है।
2. NCRP (राष्ट्रीय पोर्टल)
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा संचालित नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) के माध्यम से भी शिकायतें प्राप्त होती हैं। इस राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर पीड़ित व्यक्ति अपनी पहचान छिपाकर भी ऑनलाइन अपराध की शिकायत दर्ज करा सकता है।
I4C के OCWC के माध्यम से NCMEC और NCRP से प्राप्त शिकायतों और सूचनाओं का सबसे पहले उत्तर प्रदेश साइबर मुख्यालय स्तर पर परीक्षण किया जाता है। इसके बाद इन रिपोर्ट्स को संबंधित पुलिस कमिश्नरेट या जिलों को आगे की विधिक कार्रवाई के लिए भेजा जाता है। जिलों की पुलिस इन सूचनाओं का वेरिफिकेशन करती हैं। प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध पाए जाने पर नियमानुसार एफआईआर (FIR) दर्ज की जाती है। जांच के दौरान उपलब्ध डिजिटल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की भूमिका की जांच की जाती है। पर्याप्त सबूत मिलने पर आरोपियों की गिरफ्तारी की जाती है और सक्षम अदालत में चार्जशीट दाखिल की जाती है। इसके साथ ही पीड़ितों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाते हैं।
बच्चों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता
उत्तर प्रदेश पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वह बाल यौन शोषण सहित महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले सभी प्रकार के ऑनलाइन साइबर अपराधों की रोकथाम, पीड़ितों की पहचान और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त विधिक कार्रवाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

