LTCG Tax: शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए बड़ी खबर है। सरकार शेयरों से होने वाले मुनाफे पर लगने वाले LTCG टैक्स के नियम बदल सकती है। इस पर अगले कुछ हफ्तों में फैसला हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार बजट से पहले इस पर फैसला ले सकती है।
फिलहाल, लिस्टेड शेयरों को बेचने पर एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये से ज्यादा के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) पर 12.5% टैक्स लगता है। इस टैक्स में इंडेक्सेशन का फायदा नहीं मिलता। वहीं, अनलिस्टेड शेयरों पर ये छूट सीमा लागू नहीं होती।
मामले की जानकारी रखने वाले एक सरकारी अधिकारी ने Moneycontrol को बताया कि टैक्स व्यवस्था में बदलाव पर जल्द फैसला हो सकता है। सरकार दूसरे बड़े देशों में लागू टैक्स दरों से भारतीय व्यवस्था की तुलना कर रही है।
विदेशी निवेशकों की निकासी से बढ़ी चिंता
सरकार ने LTCG टैक्स के मौजूदा नियमों और उनके असर पर कई बैठकें की हैं। इनमें उद्योग जगत, SEBI, CBDT, बैंकों और दूसरे संबंधित पक्षों के प्रतिनिधि शामिल हुए। चर्चा में विदेशी निवेशकों की ओर से बाजार से पैसा निकालने का मुद्दा भी उठा।
सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से 3.1 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। यह रकम पूरे 2025 में निकाले गए 1.7 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा है।
कई देशों में LTCG टैक्स का सिस्टम नहीं
चर्चा से जुड़े एक वरिष्ठ बैंक अधिकारी के मुताबिक, सरकार को लगता है कि भारतीय शेयर बाजार को विदेशी निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बनाने की जरूरत है। इसके लिए टैक्स व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।
अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर, हांगकांग, UAE, जापान और कनाडा में विदेशी निवेशकों को शेयरों से होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स पर आम तौर पर टैक्स नहीं देना पड़ता। हालांकि, कुछ शर्तें लागू होती हैं। चीन में कुछ शेयरों पर छूट है, जबकि कुछ पर 10% टैक्स लगता है।
13 अक्टूबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा था कि सरकार LTCG टैक्स हटाने को लेकर लोगों के विचार सुनने के लिए तैयार है।
डॉलर में मुनाफे के हिसाब से टैक्स पर भी विचार
सरकार एक और विकल्प पर विचार कर रही है। यह है विदेशी निवेशकों के मुनाफे की गणना डॉलर में करना। अभी कैपिटल गेन्स की गणना रुपये में होती है।
Trifecta Capital के को-फाउंडर राहुल खन्ना ने Moneycontrol से कहा था कि रुपये में गिरावट आने पर विदेशी निवेशकों का वास्तविक डॉलर रिटर्न घट सकता है। ऐसे में टैक्स की कैलकुलेशन में रुपये और डॉलर की एक्सचेंज रेट में आए बदलाव को भी ध्यान में रखना चाहिए।
उदाहरण से समझिए
राहुल खन्ना के मुताबिक- मान लीजिए किसी विदेशी निवेशक ने 90 रुपये प्रति डॉलर की दर पर भारतीय शेयरों में पैसा लगाया। जब वह निवेश बेचता है, तब डॉलर की दर 100 रुपये हो जाती है। ऐसी स्थिति में रुपये में दिखने वाला मुनाफा और डॉलर में मिलने वाला वास्तविक रिटर्न अलग हो सकता है।
विदेशी निवेशक अक्सर मुद्रा में होने वाले उतार-चढ़ाव से बचने के लिए हेजिंग नहीं करते। इसकी लागत ज्यादा हो सकती है। ऐसे में रुपये में मुनाफा दिखने के बावजूद डॉलर के हिसाब से उनका वास्तविक रिटर्न काफी कम रह सकता है।
फिलहाल, सरकार ने LTCG टैक्स में बदलाव को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं किया है। मनीकंट्रोल ने वित्त मंत्रालय से भी इस बारे में प्रतिक्रिया मांगी थी, लेकिन खबर छपने तक जवाब नहीं मिला था।
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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

