​काशी का कायाकल्प : 35,156 करोड़ के विकास ने बदली तस्वीर, GDP बढ़कर 56,900 करोड़ पहुंची

​काशी का कायाकल्प : 35,156 करोड़ के विकास ने बदली तस्वीर, GDP बढ़कर 56,900 करोड़ पहुंची

​Kashi Vishwanath Corridor

Kashi Vishwanath Corridor: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अथक प्रयासों से साकार हुआ ‘श्री काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर’ आज पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा आर्थिक इंजन बनकर उभरा है। ​दिसंबर 2021 में कॉरिडोर के लोकार्पण के बाद से अब तक 25 करोड़ 28 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर चुके हैं, जिससे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को ₹12,500 करोड़ से अधिक का सीधा लाभ मिला है।

 

​रिंग रोड, नमो घाट, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और देश की पहली शहरी पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे प्रणाली जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने काशी के पर्यटन, व्यापार और आर्थिकी में अभूतपूर्व उछाल ला दिया है। आज काशी प्राचीन विरासत और आधुनिक विकास का एक वैश्विक मॉडल बन चुकी है।

​जीडीपी और प्रति व्यक्ति आय में ऐतिहासिक छलांग

  • ​जीडीपी में दोगुनी से अधिक बढ़ोतरी : वर्ष 2017 में वाराणसी की कुल जीडीपी (GDDP) जो मात्र ₹22,586 करोड़ थी, वह बुनियादी ढांचागत सुधारों और कॉरिडोर की बदौलत बढ़कर ₹56,900 करोड़ पर पहुँच गई है। वर्तमान में यहाँ की जीडीपी विकास दर 12.4% दर्ज की गई है। 
  • ​ऐतिहासिक प्रति व्यक्ति आय : वाराणसी की प्रति व्यक्ति आय अब ₹1,14,685 हो गई है, जो पहली बार ₹1 लाख के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर चुकी है। 

पर्यटन के क्षेत्र में रिकॉर्ड तोड़ उछाल

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार तीसरी बार सांसद चुने जाने और उनकी जन-कल्याणकारी विकास नीतियों के कारण पर्यटकों की आमद ने सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं:

  • ​रिकॉर्ड फुटफॉल : वर्ष 2014 से जुलाई 2026 तक काशी में 52 करोड़ 71 लाख से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ। 
  • ​तेज रफ्तार : वर्ष 2024 में 11 करोड़ से अधिक पर्यटक आए थे, जबकि 2026 के शुरुआती 7 महीनों में ही 4.65 करोड़ से ज्यादा पर्यटक काशी पहुंचे। वर्तमान में औसतन 20 से 30 लाख पर्यटक प्रतिमाह आ रहे हैं। 
  • ​विदेशी पर्यटकों में 120 गुना उछाल : कोविड काल (2021) में जहां केवल 2,566 विदेशी पर्यटक आए थे, वहीं 2024-2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 3 लाख प्रति वर्ष के पार पहुँच गया है। पिछले एक साल में दुनिया के 139 देशों के लोगों ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए हैं। 

व्यावसायिक और स्थानीय अर्थव्यवस्था
1.25 लाख करोड़ रुपए की विशाल टूरिज्म इकॉनमी : श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के ऑडिट के अनुसार

  • ​स्थानीय पर्यटक : औसतन ₹7,000 खर्च करते हैं।
  • ​बाहरी राज्यों के पर्यटक : औसतन ₹8,000 खर्च करते हैं।
  • ​अंतरराष्ट्रीय पर्यटक : औसतन ₹20,000 खर्च करते हैं।
  • ​सीधा कैश इन्फ्लो : केवल 2026 के शुरुआती 7 महीनों में पर्यटन के चलते वाराणसी की लोकल इकॉनमी में 1200 करोड़ से ज्यादा का सीधा कैश इन्फ्लो दर्ज हुआ है। ​

​Kashi Vishwanath Corridor


रोजगार और व्यापार में भारी उछाल 

  • ​पर्यटन क्षेत्र में 50% रोजगार बढ़ा है।
  • ​नाविकों की आय में 90% और होटल संचालकों की आय में 80% तक की वृद्धि दर्ज की गई है। 
  • ​लगभग 1200 नए पंजीकृत होटल/गेस्ट हाउस खुले हैं।
  • ​बनारसी साड़ी, हैंडीक्राफ्ट, गुलाबी मीनाकारी और धातु की मूर्तियों के व्यापार में 40% से 65% तक की वृद्धि हुई है।

विशेषज्ञों और अधिकारियों की राय

​विश्वभूषण मिश्र (मुख्य कार्यपालक अधिकारी, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर) के मुताबिक पर्यटकों के निरंतर प्रवाह से स्थानीय व्यापारियों, दुकानदारों, नाविकों, पुजारियों और होटल व्यवसायियों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए द्वार खुले हैं।

 

 

BHU अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व प्रमुख ​प्रो. बीवी सिंह के अनुसार काशी में कई असंगठित व्यवसाय अब संगठित रूप लेने लगे हैं। ब्रांड ‘बनारस’ की धाक पूरे देश ने स्वीकार की है। टूरिज्म वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल मेहता ने कहा कि काशी में धार्मिक टूरिज्म अब ‘रिपीटिटिव टूरिज्म’ बन चुका है। सुगम रोड, एयर और रेल कनेक्टिविटी के चलते देश के किसी भी कोने से आना आसान हो गया है। यूपी सरकार के 1 लाख करोड़ के पर्यटन एमओयू में से 55,000 करोड़ का निवेश अकेले वाराणसी के लिए है। आने वाले समय में यहां ‘स्पोर्ट्स टूरिज्म’ भी देखने को मिलेगा।

​विकास कार्यों का महा-अभियान : भविष्य की तस्वीर

  • ​करोड़ों का निवेश : काशी के इस ऐतिहासिक कायाकल्प के लिए सरकार द्वारा कुल ₹35,156 करोड़ से अधिक लागत की 486 विकास परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं, जबकि ₹17,915 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं। 
  • ​रिंग रोड : इसमें ₹5,000 करोड़ से अधिक की लागत से बनी 60 किमी लंबी रिंग रोड प्रमुख है। 
  • ​धार्मिक और सांस्कृतिक सर्किट : काशी आने वाले 70% श्रद्धालु दक्षिण भारत से और 15% अन्य राज्यों से होते हैं। ये श्रद्धालु काशी दर्शन के बाद विंध्यवासिनी धाम, प्रयाग, अयोध्या, मथुरा और चित्रकूट की यात्रा भी करते हैं, जिससे पूरा राज्य आर्थिक रूप से सशक्त हो रहा है।