जेलेंस्की को अमेरिकी अफसरों ने बंद कमरे में फटकार लगाई:कहा- आपसे ट्रम्प बहुत नाराज हैं, यूक्रेनी राष्ट्रपति को सफाई देनी पड़ी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प दूसरों की आलोचना करें तो ठीक, लेकिन कोई उन्हें जवाब दे दे तो वे नाराज हो जाते हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को एक बार फिर इसका सामना करना पड़ा। नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में मंगलवार को बंद कमरे में बैठक हुई थी। इस दौरान ट्रम्प के प्रतिनिधियों स्टीव विटकॉफ (मिडिल ईस्ट में विशेष दूत) और जेरेड कुशनर (ट्रम्प के दामाद) ने जेलेंस्की को फटकार लगाई।

दोनों ने जब जेलेंस्की से कहा कि ट्रम्प के खिलाफ उनके बयानों ने अमेरिकी राष्ट्रपति को नाराज कर दिया है, तो वे सफाई देने लगे और कहा कि उन्होंने कभी ऐसा कुछ नहीं कहा। इस महीने रूस से डीजल खरीदने के अमेरिकी फैसले, रूस पर कुछ प्रतिबंधों में ढील और यूक्रेन को अमेरिकी मदद सीमित करने जैसे मुद्दों पर ट्रम्प और जेलेंस्की के बीच कई बार बयानबाजी हुई है। ट्रम्प को जवाब देने से बचते हैं वर्ल्ड लीडर्स ट्रम्प के आक्रामक रवैये के कारण कई देशों के नेता उनसे भिड़ने से बचते हैं। उन्हें डर रहता है कि जवाब देने पर ट्रम्प नाराज हो सकते हैं या उनके देश पर नए टैरिफ लगा सकते हैं। ट्रम्प दूसरे देशों के नेताओं से सम्मान और नरमी की उम्मीद करते हैं, लेकिन खुद ऐसा नहीं करते। अपवाद वे नेता हैं, जो उनकी बात मानते हैं या जिनके साथ ट्रम्प अच्छे रिश्ते बनाना चाहते हैं। इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन जैसे नेता शामिल हैं। ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में कई नेताओं को यह तय करना पड़ रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति की आलोचना का जवाब दिया जाए या चुप रहा जाए। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रम्प के दबाव के आगे झुकने के बजाय जवाबी कदम उठाया। उन्होंने अमेरिका के टैरिफ के बराबर कनाडाई टैरिफ लगाए। जेलेंस्की की स्थिति अलग है। कनाडा की तरह यूक्रेन के पास अमेरिका से दूरी बनाने की उतनी गुंजाइश नहीं है। रूस के हमलों का सामना करने के लिए उसे अमेरिकी हथियारों, खुफिया जानकारी और दूसरी मदद की जरूरत है। यही वजह है कि जेलेंस्की को अपनी बात रखने और अमेरिका को नाराज करने के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है। नॉर्वे-फिनलैंड के नेता भी बैठक में मौजूद थे ओस्लो में हुई बैठक का मकसद ट्रम्प और जेलेंस्की के बीच हालिया तनाव को कम करना था। विटकॉफ रूस जाने से पहले नॉर्वे की राजधानी में रुके थे। बीमार होने के कारण कुशनर उनके साथ नहीं आए, लेकिन वीडियो कॉल के जरिए बातचीत में शामिल हुए। ट्रम्प के रूस के प्रति बढ़ते झुकाव को लेकर चर्चा हो रही है कि कहीं इसका संबंध अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों से तो नहीं है। लेकिन बातचीत की जानकारी रखने वाले व्यक्ति के मुताबिक, विटकॉफ और कुशनर ने जेलेंस्की से काफी देर तक इस बात पर जोर दिया कि रूस के प्रति अमेरिकी नीति का घरेलू राजनीति से कोई संबंध नहीं है। इस बैठक में जेलेंस्की के साथ उनके दो समर्थक भी मौजूद थे- नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोर और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब। दोनों यूक्रेन का मजबूती से समर्थन करते हैं। यूरोप के दूसरे नेताओं की तरह वे भी ट्रम्प के रूस की ओर झुकाव से सहमत नहीं हैं। हालांकि, वे ट्रम्प को अनावश्यक रूप से नाराज करने से भी बचना चाहते हैं। —————————-
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