
Abhijit Deepke on CEC Gyanesh Kumar: चुनाव आयोग में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर आए मतभेदों के दावों के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके और सह-संयोजक आशुतोष रांका ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ‘भारत का दुश्मन’ तक करार दे दिया है। वहीं, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और सपा समेत कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
दरअसल, एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों— डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR प्रक्रिया पर कुल 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिन्हें दरकिनार कर फैसले लागू कर दिए गए। इस बीच, रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने सीईसी ज्ञानेश पर सीधा हमला बोला। ALSO READ: क्यों भड़के CJP नेता आशुतोष रांका? कहा- बंद कर देनी चाहिए चुनाव प्रक्रिया
सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकालते हुए दीपके ने लिखा- ज्ञानेश कुमार भारत के दुश्मन हैं। कथित तौर पर 12 करोड़ से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं, जो 2024 लोकसभा चुनाव के कुल 97 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं का 12.4% है। एनडीए और विपक्ष के बीच महज 2% का अंतर है। ज्ञानेश कुमार चुनाव करा नहीं रहे, बल्कि उसकी पटकथा लिख रहे हैं। उन्होंने एसआईआर (SIR) का नया अर्थ निकालते हुए इसे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिगिंग’ करार दिया। ALSO READ: NEET प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिल्ली समेत 5 राज्यों में FIR रद्द; CJP नहीं करेगी प्रोटेस्ट
लोकतंत्र बर्बाद करने वालों में दर्ज होगा नाम
सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने भी सीईसी पर हमला बोलते हुए कहा कि जब देश का इतिहास लिखा जाएगा, तो लोकतंत्र को बर्बाद करने वालों की सूची में ज्ञानेश कुमार का सबसे ऊपर होगा। उन्होंने दीपके की पोस्ट को शेयर करते हुए दोहराया कि ज्ञानेश कुमार को ‘भारत का दुश्मन’ कहने में किसी को संकोच नहीं होना चाहिए।
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने भी इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाया है। आप के दिल्ली प्रदेश संयोजक और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सभी विपक्षी दलों से चुनाव आयोग के मुद्दे पर एकजुट होने का आह्वान किया है। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा- बाकी सभी मुद्दे बाद में हैं, सबसे पहले सभी विपक्षी दलों को चुनाव आयोग से जुड़े इस गंभीर मुद्दे को उठाना चाहिए और आयोग को व्यवस्थित करने पर ध्यान देना चाहिए।


