रानी सराय में 160 पेड़ काटने पर इंदौर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, मेट्रो प्रबंधन ने कोर्ट में दीं अजीब दलीलें

रानी सराय में 160 पेड़ काटने पर इंदौर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, मेट्रो प्रबंधन ने कोर्ट में दीं अजीब दलीलें

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इंदौर शहर के बीचोंबीच स्‍थित रानी सराय के पेड़ों करीब 160 पेड़ों को हटाने के मामले में इंदौर हाईकोर्ट ने फैसला फिलहाल सुरक्षित रख लिया है। बता दें कि यहां से मेट्रो रेल का ट्रैक गुजरना है, जिसके चलते मेट्रो प्रबंधन इन पेड़ों को हटाना चाहता है। बता दें कि ये पेड़ बहुत पुराने, हरेभरे और गहन हैं। इतना ही नहीं, रानी सराय के इन पेड़ों पर हजारों तोते और अन्‍य पक्षियों का आवास है। हजारो पक्षी यहां रहते हैं, उनके घौंसले और उनका आवागमन है। ऐसे में पेड़ हटा दिए गए तो ये हजारों बेजुबान पक्षी और तोते कहां जाएंगे।

मामले में मेट्रो कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने अजीब तर्क दिया है। प्रबंधन का कहना है कि जब दूसरे पेड़ बड़े हो जाएंगे तो पक्षी और तोते फिर लौट आएंगे। वहीं दूसरी तरफ वन्‍य जीवों के लिए काम करने वाले सदस्‍य और पर्यावरण के लिए काम करने वाले नागरिकों ने पेड़ों को हटाए जाने का विरोध किया है। इंदौर हाईकोर्ट ने हालांकि इस मामले में फिलहाल फैसला सुरक्षित रख लिया है। बता दें कि इस मामले में ‘द नेचर वॉलंटियर्स सोसायटी’ ने स्वतंत्र वैज्ञानिक सर्वे की मांग की है।

160 पुराने पेड़ों को हटा रहा है मेट्रो प्रबंधन : द नेचर वॉलंटियर्स सोसायटी के अध्यक्ष पद्मश्री भालू मोंढे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने हस्तक्षेप आवेदन प्रस्तुत कर अपना पक्ष रखा। आवेदन में संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए रानी सराय क्षेत्र में मेट्रो स्टेशन के निर्माण के लिए लगभग 160 पुराने पेड़ों को हटाए जाने की संभावित कार्रवाई पर चिंता जताई गई है। संस्था ने इन पेड़ों पर निर्भर पक्षियों के प्राकृतिक आवास और शहरी जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। विशेष रूप से यह उल्लेख किया गया कि कई पेड़ों पर रोज-रिंग्ड पैराकीट यानी हरे तोते और उनके घोंसले मौजूद हैं।

सर्वे और वैज्ञानिक मूल्यांकन की मांग : सुनवाई के दौरान पक्षियों के प्राकृतिक आवास के सही मूल्यांकन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। याचिकाकर्ता संस्था का तर्क था कि केवल एक दिन के निरीक्षण के आधार पर किसी क्षेत्र के समग्र पक्षी आवास के संबंध में अंतिम निष्कर्ष निकालना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है। संस्था ने मांग की कि पुराने पेड़ों में मौजूद प्राकृतिक खोखलों और घोंसलों के स्थलों का गहन सर्वे कराया जाए तथा इसके लिए किसी स्वतंत्र पक्षी विशेषज्ञ या एवियन इकोलॉजिस्ट की सेवाएं ली जानी चाहिए।

क्‍यों जरूरी हैं रानी सराय के पेड़ : याचिका में पुराने और परिपक्व पेड़ों के पर्यावरणीय योगदान पर बल दिया गया। संस्था के अनुसार, ये पेड़ केवल हरियाली का साधन नहीं हैं, बल्कि पक्षियों को छाया, आश्रय, भोजन और प्रजनन के लिए प्राकृतिक स्थल प्रदान करते हैं। पेड़ों में दशकों में बनने वाली प्राकृतिक गुफाओं और खोखलों की भरपाई नए पौधे लगाकर तुरंत नहीं की जा सकती। इसलिए किसी भी पेड़ को हटाने से पूर्व उसके पर्यावरणीय प्रभाव का व्यापक वैज्ञानिक आकलन अनिवार्य होना चाहिए।

सूखे में पेड़ों को हटाने का फैसला कितना गलत : लोगों का मानना है कि इस साल बारिश नहीं हुई, ऐसे में इंदौर के स्‍थानीय प्रशासन को इन पेड़ों की कटाई रोकना चाहिए। पहले ही शहर में विकास की वजह से कई पेड़ काट दिए गए है। इस बार मानसून बिल्‍कुल नहीं बरसा है। ऐसे में पानी से लेकर तापमान तक की दिक्‍कतें इंदौर को भोगना पडेगी। ऐसे में पेड़ों को हटाने का यह फैसला कितना गलत है।