
सोशल मीडिया पर यूपीआई (UPI) पेमेंट्स पर शुल्क लगाए जाने की अफवाहों और अटकलों के बीच केंद्रीय वित्त मंत्रालय और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि आम नागरिकों के लिए पर्सन-टू-पर्सन (P2P) और रोजमर्रा के यूपीआई लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। ALSO READ: UPI पर होने वाले अधिकांश ट्रांजैक्शन रहेंगे फ्री, किन पर लगेगा टैक्स, सरकार ने दिया बड़ा अपडेट
संसद में पारित कराधान एवं अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026 (Taxation and Other Laws Amendment Bill, 2026) के बाद यह भ्रम फैला था कि यूपीआई इस्तेमाल करने पर उपयोगकर्ताओं से शुल्क वसूला जाएगा।
वित्त मंत्रालय के बयान की मुख्य बातें
आम नागरिकों के लिए शून्य शुल्क: आम उपभोक्ता जो एक-दूसरे को पैसे भेजते हैं (P2P) या छोटे दुकानदारों (किराना स्टोर, सब्जी विक्रेता आदि) को भुगतान करते हैं, उनसे कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा।
छोटे व्यापारी भी सुरक्षित: छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारियों पर कोई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू नहीं होगा।
सीमित मर्चेंट लेनदेन पर MDR विचार योग्य: भविष्य में यदि कोई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होता भी है, तो वह केवल बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों (Large Merchants) और निर्धारित टर्नओवर/राशि से अधिक के उच्च मूल्य वाले लेनदेन पर ही लागू होगा। ALSO READ: UPI MDR Charges Controversy: UPI लेनदेन शुल्क में 'ट्रंप कनेक्शन' की क्यों हो रही चर्चा?
2026 के विधेयक संशोधन और भ्रम का कारण
हाल ही में संसद द्वारा 'भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007' (Payment and Settlement Systems Act, 2007) की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव पास किया गया है।
1. सक्षमकारी प्रावधान (Enabling Provision): यह संशोधन अपने आप में कोई नया शुल्क लागू नहीं करता, बल्कि सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) को भविष्य के लिए एक नीतिगत ढांचा बनाने का अधिकार देता है।
2. फैसला NPCI के हाथ में: संसद से विधेयक पूर्ण रूप से पारित होने के बाद, NPCI की अध्यक्षता वाली 'यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी' यह तय करेगी कि बड़े मर्चेंट्स पर कोई nominal MDR लागू किया जाए या नहीं।
आखिर क्यों जरूरी है यूपीआई इकोसिस्टम का वित्तीय ढांचा?
वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने स्पष्ट किया कि यूपीआई के तेजी से बढ़ते दायरे के कारण सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर में निरंतर निवेश की आवश्यकता है:
पहलू कारण और प्रभाव
- साइबर सुरक्षा और फ्रॉड रोकथाम बड़े पैमाने पर हो रहे डिजिटल लेनदेन के लिए मजबूत डेटा सुरक्षा और एंटी-फ्रॉड सिस्टम बनाए रखना जरूरी है।
- बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड सर्वर क्रैश और ट्रांजैक्शन फेलियर की समस्याओं को खत्म करने के लिए बैंकों व फिनटेक कंपनियों को बुनियादी ढांचे में सुधार करना पड़ता है।
- सब्सिडी पर निर्भरता कम करना केवल सरकारी सब्सिडी के भरोसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभर रहे इस डिजिटल सिस्टम को लंबे समय तक चला पाना संभव नहीं है।
जुलाई 2026 में यूपीआई के माध्यम से 2,366 करोड़ से अधिक लेनदेन दर्ज किए गए, जिनका कुल मूल्य 29.9 लाख करोड़ रुपए रहा। सरकार ने आश्वस्त किया है कि इस विशाल डिजिटल क्रांति को आम नागरिकों के लिए हमेशा सुलभ और निशुल्क बनाए रखा जाएगा। नागरिकों से अपील की गई है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक खबरों पर विश्वास न करें।

