
चुनाव आयोग (EC) ने मंगलवार को कहा कि उसे किसी भी राजनीतिक दल की ओर से बैठक के लिए कोई अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है। आयोग ने कहा कि 4 बजे तक कोई परमिशन नहीं ली गई थी। यह बयान ऐसे समय आया है, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और चुनाव आयुक्तों से मुलाकात की मांग की।
इससे पहले INDIA ब्लॉक के नेताओं ने संसद मार्ग से चुनाव आयोग मुख्यालय तक विरोध मार्च निकाला। इस दौरान हाई ड्रामा देखने को मिला। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कुछ अन्य नेता चुनाव आयोग के कार्यालय तक पहुंचने की कोशिश में आकाशवाणी भवन परिसर में दाखिल हो गए।
जब चुनाव आयोग के अधिकारियों से पूछा गया कि क्या राहुल गांधी समेत INDIA ब्लॉक के नेताओं ने मंगलवार को चुनाव आयोग से मुलाकात के लिए अनुरोध किया था, तो अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मंगलवार को किसी भी राजनीतिक दल की ओर से बैठक के लिए कोई अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ।
चुनाव आयोग के इस बयान से विपक्ष के उस दावे पर सवाल खड़े हो गए हैं, जिसमें चुनाव आयुक्तों से मुलाकात की मांग को लेकर प्रदर्शन किए जाने की बात सामने आई थी।
चुनाव आयोग ने अपनी मीडिया रिलीज में कहा कि
1. आज दिन में कुछ राजनीतिक दलों के निर्वाचन आयोग की ओर मार्च के दौरान मीडिया के माध्यम से यह पता चला कि कुछ सांसद अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ आयोग से मिलना चाहते हैं।
आज के घटनाक्रम के संबंध में आयोग यह स्पष्ट करना चाहता है कि आज शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से निर्वाचन आयोग से बैठक के लिए समय नहीं मांगा था।
2. इसके बाद शाम लगभग 4 बजे दिल्ली पुलिस से सूचना मिली कि माननीय नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों (MPs) का एक प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलना चाहता है और ज्ञापन सौंपना चाहता है।
3. भारत निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2025 में राजनीतिक दलों के साथ बैठकों के लिए एक प्रक्रिया निर्धारित की थी। इसकी जानकारी सभी राजनीतिक दलों को दी गई है और वे इसी प्रक्रिया का पालन करते हैं।
जब भी किसी राजनीतिक दल का प्रतिनिधिमंडल या कई दलों का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलना चाहता है, तो वह अपने विधिवत अधिकृत प्रतिनिधि (Authorised Representative) के माध्यम से आयोग से मिलने का समय मांगता है।इसके बाद दोनों पक्षों की आपसी सहमति से तय किए गए समय पर मुलाकात होती है।
4. जब निर्वाचन आयोग, आज शाम 4 बजे के बाद, माननीय सांसदों के उपरोक्त मुलाक़ात के प्रस्ताव पर विचार कर रहा था, तो उन्हें दिल्ली पुलिस के DCP के द्वारा बताया गया कि जिस बैठक की मांग की जा रही थी, वह 240 सांसदों के समूह के साथ होनी थी और बैठक का प्रस्तावित स्थान संसद भवन ‘Annexe’ थी। निर्वाचन आयोग द्वारा विचार किया गया कि यह अनुरोध असामान्य है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है क्यूँकि प्रोटोकॉल के अनुसार ऐसी मुलाकात भारत निर्वाचन आयोग के परिसर में ही होती है।
5. ECI ने प्रस्ताव दिया कि माननीय सांसदों का ज्ञापन लेने के लिए आयोग के सबसे वरिष्ठ कार्यरत अधिकारी को बैठक स्थल पर भेजा जा सकता है, जो कि अपने आप में ही एक अभूतपूर्व कदम होता। हालांकि, इस अनुरोध को भी माननीय सांसदो द्वारा अस्वीकार कर दिया गया।
6. ECI देश की संसदीय और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करता है, और अपने स्वयं के प्रोटोकॉल और परंपराओं का भी सम्मान करता है, जो अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। कोई भी राजनीतिक दल, किसी भी समय, चुनाव आयोग से मिलने का अनुरोध कर सकता है; एवं आयोग समय की अनुकूलता के दृष्टिगत, उनसे मिलने की तिथि और समय निर्धारित कर सकता है। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।
दिल्ली पुलिस ने कहा- करेंगे आवश्यक कार्रवाई
मार्च को लेकर दिल्ली पुलिस का भी बयान सामने आया है। दिल्ली पुलिस को सोशल मीडिया के जरिए पता चला कि INDIA ब्लॉक के नेता, 6 अक्टूबर को सुबह करीब 10. 30 बजे संसद भवन से निर्वाचन आयोग (ECI) के कार्यालय की ओर मार्च निकालेंगे। इसके लिए कोई आवेदन नहीं दिया गया था, इसलिए हमारी तरफ से कोई परमिशन जारी नहीं की गई थी। इस जमावड़े को BNS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा के उल्लंघन की आशंका के चलते सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।
पुलिस ने बार-बार घोषणा कर प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक वापस जाने की अपील की गई। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के निर्देशों का पालन नहीं किया और वहां बने रहे। 260 व्यक्तियों, जिनमें 10 सांसद भी शामिल हैं, को हिरासत में लेकर दिल्ली के विभिन्न पुलिस थानों में ले जाया गया, जहां उनके संबंध में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।


