
-ओंकार सिंह जनौटी
ईरान के साथ अमेरिका के युद्ध ने पूरी दुनिया में ऊर्जा की कीमतों को आग लगा दी है। अब यही लपटें अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को महसूस हो रही हैं। महीने भर बाद अमेरिका में मध्यावधि चुनाव हैं और जनता महंगे तेल और उसके कारण ऊपजी महंगाई से परेशान है। डीजल के दाम नीचे लाने के लिए ट्रंप प्रशासन ने यूरोपीय संघ को चेतावनी दी कि वे अपना रणनीतिक डीजल भंडार, बाजार के लिए खोल दें। इस चेतावनी में खास तौर पर जर्मनी और फ्रांस का नाम लिया गया था। ऐसा ना करने पर अमेरिका ने यूरोप को डीजल बेचने पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी थी।
चेतावनी को सार्वजनिक करते हुए गुरुवार को अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया पर लिखा, “हमारे यूरोपीय साझेदारों को अपने वादे का पालन करते हुए डिलिवरी तेज करनी चाहिए और मौजूदा बाधाओं को देखते हुए अतिरिक्त सप्लाई तुरंत उपलब्ध करानी चाहिए।” आगे उन्होंने लिखा, “अमेरिकी किसान, ट्रक ऑपरेटर और उद्योगों को वैश्विक डीजल संकट का भार उठाने के लिए अकेला नहीं छोड़ा जा सकता।”
यूरोप ने खारिज की अमेरिका की धमकी
अमेरिकी मंत्री की इस चेतावनी के बाद शुक्रवार को यूरोपीय संघ के मुख्यालय ब्रसेल्स में ईयू के नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में अमेरिका को लेकर यूरोपीय नेताओं में साफ तल्खी नजर आ रही थी। बातचीत के बाद यूरोपीय आयोग की प्रवक्ता आना-काइजा इटकोनेन ने कहा, “हम डीजल पर किसी भी तरह के प्रतिबंध को खारिज करते हैं। बैन किसी को फायदा नहीं पहुंचाएगा। एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में अमेरिका पर हमारे भरोसे को भी यह कमजोर करेगा।”
27 देशों के समूह यूरोपीय संघ का कहना है कि वह ऊर्जा संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के साथ काम करने को तैयार है। यूरोपीय संघ के आधिकारिक इनकार से पहले, शुक्रवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों ने डॉनल्ड ट्रंप से बात की। माक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति से अपील करते हुए कहा कि ऊर्जा संकट के मुद्दे पर जी-7 देशों को मिलकर काम करना चाहिए। डीजल पर निर्यात प्रतिबंध ना लगाने की अपील माक्रों ने भी की। ALSO READ: तेल कंपनियों का मुनाफा फिर बंपर, देशों की हालत खस्ता
फ्रांस और यूरोपीय संघ चाहते हैं कि डीजल सप्लाई के मुद्दे पर जी-7 के नेता जल्द से जल्द, शायद शुक्रवार को ही बातचीत करें। असल में इसी हफ्ते की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुख फातिह बिरोल ने कहा कि यूरोपीय देशों को अब भी अपने स्टॉक का हिस्सा रिलीज करना है। स्टॉक से तेल रिलीज करने पर यह सहमति मार्च में बनी थी। मंगलवार को आयरलैंड की राजधानी डबलिन में पत्रकारों से बात करते हुए बिरोल ने कहा, “इस स्टॉक का बड़ा हिस्सा रिलीज किया जा चुका है, लेकिन अब भी कुछ बाकी है, कच्चे तेल और प्रोडक्ट्स के रूप में।”
IEA के 32 सदस्यों के बीच मार्च 2026 में अपने तेल रिजर्व से 40 करोड़ बैरल तेल रिलीज करने पर सहमति बनी थी। यह अब तक का सबसे बड़ा तेल रिलीज है। बिरोल के मुताबिक इसका एक तिहाई हिस्सा अब भी बाजार में नहीं आया है। ALSO READ: 30 अरब डॉलर की टैरिफ कटौती पर सहमत हुए चीन और अमेरिका
कैसे ट्रंप की राजनीति को आग लगा सकता है महंगा डीजल
ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच इस वक्त यूरोप और अमेरिका में डीजल के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं। रूसी ऊर्जा संयंत्रों पर यूक्रेन के हमले संकट को और बढ़ा रहे हैं। अमेरिका में नवंबर के पहले ही हफ्ते में मध्यावधि चुनाव हैं। फिलहाल लग रहा है कि तेल के दाम नीचे नहीं आए तो ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को अच्छा खासा नुकसान झेलना पड़ सकता है। कांग्रेस में उसका बहुमत जा सकता है। बहुमत खोने के बाद ट्रंप के फैसलों को संसदीय रोक टोक व आपत्तियों से गुजरना होगा।
फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमला करने के बाद यूरोपीय संघ और अमेरिका ने रूसी तेल और गैस की खरीद पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद अमेरिका और खाड़ी देश यूरोप के बड़े सप्लायर बन गए। लेकिन इस साल शुरू हुए ईरान युद्ध के बाद से अब मध्य पूर्व से होने वाली पेट्रोलियम सप्लाई बाधित हुई है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस के महंगे दाम के रूप में झलक रहा है। रूसी तेल को लेकर ट्रंप बार-बार भारत और चीन समेत कई देशों को चेतावनी देते रहे हैं। इन सभी कोशिशों के बाद अब अकेला अमेरिका इस हालत में नहीं दिख रहा है कि वह अपनी सप्लाई से अपने घरेलू बाजार और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम नीचे ला सके।


