
एआई से डरना नहीं, सीखना होगा… भारतीय पत्रकारिता महोत्सव में नई पीढ़ी और मीडिया के भविष्य पर मंथन
इंदौर में स्टेट प्रेस क्लब, मध्यप्रदेश के भारतीय पत्रकारिता महोत्सव का 18वां सीजन शुरू हो गया है। 2 अक्टूबर से शुरू हुआ यह तीन दिवसीय आयोजन इस बार जेन ज़ी और अल्फा पीढ़ी को समर्पित है। महोत्सव में देशभर से आए पत्रकार, मीडिया विशेषज्ञ और पत्रकारिता के विद्यार्थी पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, नई तकनीक और मीडिया की भूमिका जैसे मुद्दों पर संवाद कर रहे हैं।
महोत्सव के दौरान पत्रकारिता और मीडिया से जुड़े विभिन्न विषयों पर सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें पत्रकारों के साथ आम लोगों और पत्रकारिता के विद्यार्थियों को भी सीधे संवाद का अवसर मिल रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे पत्रकार अपने अनुभव साझा करने के साथ बदलती मीडिया दुनिया की चुनौतियों और संभावनाओं पर भी चर्चा कर रहे हैं।
एआई और पत्रकारिता पर ढाई घंटे चला संवाद
2 अक्टूबर की शाम आयोजित सत्र में वेबदुनिया के एडिटोरियल एवं डिजिटल कंटेंट हेड संदीप सिंह सिसोदिया, एनडीटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के हेड कपिल शर्मा और पिंपरी चिंचवड़ की डॉ. अनुष्का शर्मा ने हिस्सा लिया। सत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई और पत्रकारिता के बदलते संबंधों पर विस्तार से चर्चा हुई।
संदीप सिंह सिसोदिया ने कहा कि पत्रकार को समय और तकनीक के साथ खुद को बदलना होगा। जो पत्रकार बदलती तकनीक को समझने और सीखने के लिए तैयार नहीं होगा, उसके लिए आगे बने रहना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा कि एआई से डरने के बजाय पत्रकारों और कंटेंट से जुड़े लोगों को इसे सीखना चाहिए और इसका इस्तेमाल अपने काम को बेहतर बनाने के लिए करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एआई भी इंसान ने बनाया है और यह इंसानों द्वारा तैयार किए गए कंटेंट और उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर सामग्री प्रस्तुत करता है। ऐसे में सिर्फ एआई से तैयार सामग्री पर निर्भर रहने के बजाय उसमें मानवीय सोच और संवेदनशीलता को शामिल करना जरूरी है।
सिसोदिया ने कहा कि किसी बेहतर आलेख या कंटेंट के लिए एआई के साथ एचआई यानी ह्यूमन इंटेलिजेंस और ईआई यानी इमोशनल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल भी जरूरी है। एआई भाषा को बेहतर बनाने और सामग्री को व्यवस्थित करने में मदद कर सकता है, लेकिन उसमें अपनी सोच, अनुभव और दृष्टिकोण पत्रकार को ही जोड़ना होगा।
जेन ज़ी के सामने फेक न्यूज की चुनौती
सत्र के दौरान पत्रकारिता के विद्यार्थियों और मीडिया कर्मियों ने भी कई सवाल पूछे। एक विद्यार्थी ने सवाल किया कि जेन ज़ी का एक बड़ा वर्ग इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर न्यूज देखता है। ऐसे में वह कैसे तय करे कि सामने आई खबर सही है या फेक?
इसके जवाब में संदीप सिंह सिसोदिया ने कहा कि नई पीढ़ी को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली किसी खबर को तुरंत सच मानने के बजाय उसके बारे में सर्च करना चाहिए और अलग-अलग विश्वसनीय स्रोतों से उसकी पुष्टि करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जेन ज़ी को विश्वसनीय मीडिया संस्थानों से आने वाली खबरों पर भरोसा करना चाहिए, लेकिन किसी भी सूचना को आंख मूंदकर स्वीकार करने के बजाय उसकी सत्यता जांचने की आदत भी विकसित करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि वेबदुनिया में किसी भी समाचार को प्रकाशित करने से पहले उसकी जांच-पड़ताल की जाती है।
सोशल मीडिया से कमाई के लिए कंटेंट का दायरा बढ़ाएं
सोशल मीडिया में काम करने वाले युवाओं के लिए संभावनाओं पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में सिसोदिया ने कहा कि सिर्फ हार्डकोर न्यूज तक सीमित रहने के बजाय कंटेंट का दायरा बढ़ाना चाहिए। उन्होंने ऑटोमोबाइल और गैजेट्स जैसे क्षेत्रों में रिव्यू कंटेंट तैयार करने को भी आमदनी बढ़ाने का एक माध्यम बताया।
उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वालों को अलग-अलग तरह के कंटेंट के साथ प्रयोग करना चाहिए। इससे उनके लिए कमाई के नए रास्ते खुल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में यूट्यूब के जरिए एक लाख रुपये प्रतिमाह कमाने वाले लोगों की संख्या करीब 5 हजार बताई जाती है।
पत्रकारिता में एआई के बदलाव पर कपिल शर्मा ने रखी बात
सत्र में एनडीटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के हेड कपिल शर्मा ने भी एआई के आने के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में हो रहे बदलावों पर अपनी बात रखी। उन्होंने तकनीक के बढ़ते प्रभाव और इसके कारण पत्रकारिता के काम करने के तरीके में आ रहे बदलावों पर चर्चा की।
कार्यक्रम का संचालन पंकज क्षीरसागर ने अपने चुटीले और सहज अंदाज में किया। सत्र के लिए निर्धारित समय एक घंटे का था, लेकिन दर्शकों और विद्यार्थियों की लगातार भागीदारी के कारण यह संवाद करीब ढाई घंटे तक चला। सवाल-जवाब का सिलसिला अंत तक जारी रहा। कार्यक्रम में स्टेट प्रेस क्लब मध्यप्रदेश के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल भी मौजूद रहे।
फोटो पत्रकारिता को भी मिली प्रमुखता
भारतीय पत्रकारिता महोत्सव में प्रिंट, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ फोटो पत्रकारिता को भी प्रमुखता दी गई है। महोत्सव के दौरान फोटो पत्रकारों द्वारा खींचे गए चुनिंदा और महत्वपूर्ण तस्वीरों की प्रदर्शनी लगाई गई है।
प्रदर्शनी में ऐसी तस्वीरें शामिल हैं, जिनके जरिए समाचार और महत्वपूर्ण घटनाओं को कैमरे की नजर से दर्ज किया गया है। कई प्रभावशाली तस्वीरें न केवल फोटो पत्रकारिता की ताकत को सामने ला रही हैं, बल्कि महोत्सव में आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र भी बनी हुई हैं।
तीन दिन तक चलने वाला भारतीय पत्रकारिता महोत्सव पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, नई पीढ़ी की मीडिया आदतों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और मीडिया की सामाजिक भूमिका से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर संवाद का मंच बन रहा है। जेन ज़ी और अल्फा पीढ़ी को केंद्र में रखकर आयोजित इस महोत्सव में तकनीक के दौर में पत्रकारिता के भविष्य पर भी गंभीर मंथन हो रहा है।


