रूस दे रहा है नाटो को परमाणु हथियारों की धमकी, NATO कमांड केन्द्रों पर हो सकते हैं हमले

रूस दे रहा है नाटो को परमाणु हथियारों की धमकी, NATO कमांड केन्द्रों पर हो सकते हैं हमले

Russia NATO Threat

Russia NATO Threat: रूस ने अमेरिकी वर्चस्व वाले “उत्तर अटलांटिक संधि संगठन” नाटो (NATO) को एक दस्तावेज़ भेजा है, जिसे यूरोपीय प्रेक्षक तथाकथित “शीत युद्ध” (कोल्ड वार) वाले ज़माने के बाद से मिली युद्ध की सबसे कड़ी आधिकारिक चेतावनी मान रहे हैं।

 

1991 में विघटित हो गए भूतपूर्व सोवियत संघ के नेतृत्व वाले पूर्वी यूरोपीय कम्य़ुनिस्ट देशों के 1955 में बने “वार्सा संधि संगठन” (Warsaw Pact), और अमेरिकी नेतृत्व वाले पश्चिमी यूरोपीय देशों के 1949 में ही बन गए नाटो संगठन के बीच का शीत युद्ध—1945 में द्वितीय विश्वयुद्ध के अंत के कुछ समय बाद ही— आरोपों-प्रत्यारोपों और घुड़कियों-धमकियों के रूप में शुरू हो गया था। किंतु,1991 में सोवियत संघ में कम्युनिस्ट शासन के अंत, सोवियत संघ के विघटन और देखते ही देखते पूर्वी यूरोप के सभी कम्युनिस्ट देशों में साम्यवाद की अर्थी उठ जाने के बाद एक ऐसा भी शांतिपूर्ण सुखद समय आया कि लगने लगा कि सैन्य गुटबंदियां अब इतिहास का विषय बन जाएंगी। ALSO READ: स्पेन में मोरक्को से घुसपैठ, यूरोपीय संघ में मचा हड़कंप

 

दुर्भाग्य से वह शांतिकाल टिकाऊ सिद्ध नहीं हुआ। वार्सा पैक्ट तो नहीं रहा, पर यूरोप-अमेरिका का नाटो पैक्ट न केवल बना रहा, पूर्वी यूरोप की तरफ अपना विस्तार करने लगा। नाटो के विस्तार से रूस बेचैन होने लगा। उसे रोकने के लिए रूस ने 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण कर उसे बलि का बकरा बनाया। तब से रूस और नाटो आमने-सामने हैं।

 

इस समय जिस रूसी चेतावनी को लेकर सनसनी फैल गई है, उसका सीधा संबंध रूस के बाल्टिक सागरीय शहर और इलाके कालिनिनग्राद से है। 224 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला यह इलाका पूर्वी यूरोप के नाटो देशों से घिरा हुआ है— दक्षिण में पोलैंड और उत्तर में लिथुआनिया है। रूस की पश्चिमी सीमा से वह 663 किलोमीटर दूर और भी अधिक पश्चिम में है। बीच में लातविया, लिथुआनिया और बेलारूस हैं।

 

जो लोग कालिनिनग्राद के बारे में जानते हैं, वे उसकी रणनीतिक संवेदनशीलता से भी परिचित हैं। यहीं पर रूस ने अपने युद्धक जेट विमान और इस्कंदर मिसाइलें तैनात कर रखी हैं, जो परमाणु हथियार ले जाने के भी सक्षम हैं। रूस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस संवेदनशील स्थिति का लाभ उठाने के लिए किस हद तक जा सकता है। उसने “यूरोप के गरम दिमाग वाले लोगों” को धमकी दी है कि कालिनिनग्राद से तो आप दूर ही रहें! ALSO READ: महिलाओं का यौन शोषण यूरोप-अमेरिका में बना नया शौक

 

नाटो को भेजे गए एक राजनयिक दस्तावेज़ में—जिसे समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने देखा है—रूस ने साफ़ तौर पर कहा है: “अगर नाटो के देश कालिनिनग्राद क्षेत्र को रूस के बाकी हिस्सों से अलग-थलग करने की कोई कोशिश करते हैं, तो रूस अपने इलाके की रक्षा के लिए अपनी सभी शक्तियों और क्षमताओं का—जिनमें परमाणु हथियार भी शामिल हैं—उपयोग करने के लिए तैयार रहेगा।” साथ ही, इस दस्तावेज़ में नाटो पर “ख़तरनाक और लापरवाह रास्ता” अपनाने का आरोप भी लगाया गया है, जिससे किसी भी समय “सशस्त्र संघर्ष छिड़ जाने का बड़ा ख़तरा” है।

नाटो के कमांड केंद्रों पर हो सकते हैं रूसी हमले

इस दस्तावेज़ में साफ तौर पर कहा गया है कि संघर्ष शुरू होते ही “नाटो के सदस्य देशों में स्थित कमांड केंद्रों पर रूस हमले कर सकता है।” कम से कम तीन यूरोपीय देशों में स्थित रूसी दूतावासों ने भी ऐसे ही एक जैसे बयान जारी किए हैं। वे नाटो पर आरोप लगाते हैं कि वह अपने सैन्य अभ्यासों और ऐसी योजनाओं द्वारा तनाव बढ़ा रहा है जिनमें कालिनिनग्राद की घेराबंदी की परिकल्पना की गई है। रूसी सरकार के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इन कदमों को “यूरोप के गरम दिमाग वाले लोगों” के लिए कूटनीतिक चेतावनी बताया है।

 

दूसरी ओर, नाटो ने इस धमकी को पूरी तरह से ठुकरा दिया। बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में वहां के “यूरोन्यूज़” टेलीविज़न चैनल द्वारा आयोजित एक रक्षा सम्मेलन में नाटो के महासचिव मार्क रुटे ने रूस से कहा: “हम एक रक्षात्मक गठबंधन हैं। हमें परमाणु धमकियाँ देना बंद करें। यह बिल्कुल अनुचित और बेकार है।” अपने जवाब में, नाटो गठबंधन ने ज़ोर देकर कहा कि उसके किसी भी सैन्य अभ्यास या गतिविधि से रूसी क्षेत्र को कोई खतरा नहीं है। नाटो ने रूस से अपनी परमाणु धमकियाँ बंद करने और यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध ख़त्म करने का आह्वान किया।

 

रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मरिया ज़खारोवा ने विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर एक टिप्पणी में नाटो देशों के उन बयानों का ज़िक्र किया, जो उनकी नज़र में “रूस-विरोधी सोच” (रूसोफोबिया) और मॉस्को के साथ युद्ध की तैयारी को दर्शाते हैं। ज़खारोवा ने लिखा कि इन लोगों को “ज़मीन पर वापस लाने” की ज़रूरत है। अगर यूरोप रूस पर हमला करता है, तो यह पूरी तरह से एक अलग युद्ध होगा—बहुत अल्पकालिक युद्ध।” ज़खारोवा का कहना है कि इस बीच, कालिनिनग्राद में शीत युद्ध के दौर के एक परमाणु बंकर का नवीकरण किया गया है, जिससे एक ऐसा पुराना सिस्टम पुन: सक्रिय हो गया है जो अपने-आप जवाबी हमला करने में सक्षम है।

रूसी चेतावनी को नाटो कैसे देखता है

ऑस्ट्रिया की राजधानी वियेना में रहने वाले—परमाणु हथियारों के जानकार और रूस के एक पूर्व राजनयिक—निकोलाई सोकोव इस चेतावनी को मॉस्को में कट्टरपंथियों का असर बढ़ने का संकेत मानते हैं। रॉयटर्स के साथ एक ऑनलाइन इंटरव्यू में सोकोव ने कहा, “उन्हें आगे रूस द्वारा और भी नए कदम उठाए जाने की उम्मीद है, जिसमें बाल्टिक सागर की घेराबंदी भी शामिल है— इसे यूरोपीय देश शायद युद्ध की सीमा से ठीक पहले की स्थिति मानेंगे, लेकिन रूस इसे खुली जंग के तौर पर देखता है। मुझे इसमें आपसी ग़लतफहमी होने का ख़तरा भी दिखता है।” सोकोव का कहना है कि यूरोपीय देश भी “हर तरह से दबाव” बना रहे हैं, जबकि रूस गंभीर चेतावनी दे रहा है कि इसमें बहुत जोखिम भरा है।

 

इस बीच, यूरोपीय सरकारें रूस पर यूरोप महाद्वीप में तोड़-फोड़ और आगज़नी जैसी हरकतों के ज़रिए “हाइब्रिड वॉरफेयर” (मिश्रित युद्ध) छेड़ने का आरोप लगा रही हैं। रूस इन दावों को खारिज करता है और किसी नाटो देश पर सैन्य हमले की योजना बनाने से भी इनकार करता है। पर, सच्चाई यह है कि नाटो देश न तो रूस की बातों पर विश्वास करते हैं, और न रूस नाटो देशों की बातों पर विश्वास करता है। दोनों पक्षों के इस पारस्परिक अविश्वास से हो रहा शस्त्रीकरण, दोनों तरफ अपने चरम पर है और किसी भी समय एक ऐसे अनिष्टकारी पारस्परिक युद्ध का कारण बन सकता है, जिससे बाक़ी दुनिया भी पूरी तरह बची नहीं रह सकती।