रजत पाटीदार : एक वक्त किसी टीम ने न खरीदा, आज धोनी -रोहित के साथ बराबरी पर है इंदौर का लड़का

 

आईपीएल के इतिहास में कई दिग्गज कप्तान आए और गए, लेकिन लगातार दो सीजन अपनी टीम को चैंपियन बनाना हर किसी के बस की बात नहीं रही। यही वजह है कि जब रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने लगातार दूसरी बार आईपीएल ट्रॉफी अपने नाम की, तो कप्तान रजत पाटीदार का नाम सीधे उन चुनिंदा कप्तानों की सूची में दर्ज हो गया, जहां पहले से सिर्फ महेंद्र सिंह धोनी और रोहित शर्मा जैसे दिग्गज मौजूद थे।

धोनी ने चेन्नई सुपर किंग्स को 2010 और 2011 में लगातार खिताब दिलाया था, जबकि रोहित शर्मा ने मुंबई इंडियंस को 2019 और 2020 में बैक-टू-बैक चैंपियन बनाया। अब इस Elite List में तीसरा नाम रजत पाटीदार का जुड़ चुका है। फर्क सिर्फ इतना है कि पाटीदार का सफर बाकी सभी से कहीं ज्यादा संघर्षों और उतार-चढ़ावों से भरा रहा।

जिस खिलाड़ी को किसी ने नहीं खरीदा, वही बना RCB का सबसे बड़ा हीरो

आज जिस खिलाड़ी के हाथों में दो आईपीएल ट्रॉफियां हैं, कभी वही खिलाड़ी आईपीएल ऑक्शन में अनदेखा कर दिया गया था। मध्य प्रदेश के इंदौर से आने वाले रजत पाटीदार ने आईपीएल में अपना पहला कदम 2021 में रखा था। RCB ने उन्हें उनके बेस प्राइस पर खरीदा, लेकिन शुरुआती सीजन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। उन्हें सिर्फ चार मैच खेलने का मौका मिला और वे महज 71 रन ही बना सके।

सीजन खत्म हुआ और फ्रेंचाइजी ने उन्हें रिलीज कर दिया।

इसके बाद आया 2022 का मेगा ऑक्शन। रजत पाटीदार को उम्मीद थी कि कोई न कोई टीम उन पर भरोसा दिखाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दस टीमों के बीच चली नीलामी में उनका नाम बार-बार आया, मगर कोई बोली नहीं लगी। वे अनसोल्ड रह गए। एक क्रिकेटर के लिए यह पल किसी झटके से कम नहीं होता। लेकिन शायद किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही लिख रखा था।

लवनीत सिसोदिया (Luvneeth Sisodiya) की चोट ने बदल दी जिंदगी

आईपीएल 2022 शुरू होने से पहले RCB को बड़ा झटका लगा जब युवा बल्लेबाज लवनीत सिसोदिया चोटिल हो गए। टीम को रिप्लेसमेंट की जरूरत थी।

तभी फ्रेंचाइजी को रजत पाटीदार की याद आई।

जिस खिलाड़ी को कुछ महीने पहले रिलीज किया गया था और जिसे ऑक्शन में किसी ने नहीं खरीदा था, उसी खिलाड़ी को दोबारा टीम में बुलाया गया। रजत ने मौका स्वीकार किया और यहीं से उनकी जिंदगी ने नई दिशा पकड़ ली।

 एलिमिनेटर की वह सेंचुरी जिसने सब बदल दिया

2022 का सीजन रजत पाटीदार के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उन्होंने मिले हुए मौके का पूरा फायदा उठाया और लगातार शानदार बल्लेबाजी की। लेकिन असली धमाका प्लेऑफ में देखने को मिला। लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ एलिमिनेटर मुकाबले में रजत पाटीदार ने ऐसी पारी खेली जिसने पूरे क्रिकेट जगत का ध्यान उनकी ओर खींच लिया। उन्होंने सिर्फ 49 गेंदों में शतक जड़ते हुए नाबाद 112 रन बनाए।

यह सिर्फ एक शतक नहीं था, बल्कि एक बयान था रजत अब सिर्फ टीम का हिस्सा नहीं, बल्कि टीम का भविष्य बनने जा रहे थे।

 फिर आया मुश्किल दौर

जब लगने लगा कि सब कुछ सही दिशा में जा रहा है, तभी किस्मत ने एक और परीक्षा ले ली। 2023 का पूरा सीजन रजत पाटीदार चोट के कारण नहीं खेल सके। उन्हें मैदान से दूर रहना पड़ा। RCB का प्रदर्शन भी उस साल उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा। लेकिन यही वह समय था जिसने रजत को मानसिक रूप से और मजबूत बनाया।

2024 में हुई वापसी, बदला खेल का अंदाज

2024 में रजत पाटीदार ने मैदान पर वापसी की और पहले से ज्यादा आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी की। RCB का अभियान शुरुआत में लड़खड़ाया जरूर, लेकिन टीम ने शानदार वापसी करते हुए प्लेऑफ तक का सफर तय किया। इस दौरान पाटीदार ने आक्रामक बल्लेबाजी से अपनी अलग पहचान बनाई।उनका स्ट्राइक रेट बताता था कि अब वे सिर्फ रन बनाने नहीं, बल्कि मैच का रुख बदलने मैदान पर उतरते हैं। यहीं से उनके भीतर एक नेता की झलक भी दिखाई देने लगी।

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 कप्तानी मिली और टूट गया 17 साल का इंतजार

2025 में RCB ने बड़ा फैसला लेते हुए रजत पाटीदार को टीम की कमान सौंप दी। यह फैसला कई लोगों के लिए चौंकाने वाला था। टीम में विराट कोहली जैसे दिग्गज मौजूद थे, लेकिन फ्रेंचाइजी ने भविष्य पर दांव खेला और कप्तानी पाटीदार को सौंप दी। रजत ने इस भरोसे को सिर्फ सही साबित नहीं किया, बल्कि इतिहास रच दिया।

जिस ट्रॉफी का इंतजार RCB पिछले 17 सालों से कर रही थी, उसे आखिरकार पाटीदार ने टीम की झोली में डाल दिया।

2026: जब कप्तान से लीजेंड बनने लगे रजत
पहली ट्रॉफी जीतना बड़ी बात होती है, लेकिन उसे दोहराना उससे भी मुश्किल।
2026 में हर टीम RCB को हराने के इरादे से मैदान पर उतर रही थी। दबाव पहले से कहीं ज्यादा था।
लेकिन रजत पाटीदार ने साबित कर दिया कि 2025 कोई इत्तेफाक नहीं था।

पूरे सीजन में उन्होंने बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया और कप्तान के तौर पर टीम को लगातार दूसरी बार खिताब तक पहुंचाया। बड़े मुकाबलों में उनका आत्मविश्वास, आक्रामक सोच और निडर बल्लेबाजी RCB की सबसे बड़ी ताकत बन गई।

क्वालिफायर जैसे अहम मुकाबलों में उनकी विस्फोटक पारियों ने टीम की जीत की नींव रखी और आखिरकार RCB ने दूसरी लगातार ट्रॉफी भी अपने नाम कर ली। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

 

 

 

 

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RCB को मिला अपना नया चेहरा

विराट कोहली लंबे समय तक RCB की पहचान रहे हैं। लेकिन पिछले दो वर्षों में रजत पाटीदार ने साबित किया है कि फ्रेंचाइजी का भविष्य सुरक्षित हाथों में है। उन्होंने सिर्फ रन नहीं बनाए, बल्कि टीम को एक नई मानसिकता दी। ऐसी मानसिकता जो दबाव से डरती नहीं, बल्कि उसे चुनौती देती है।

 अनसोल्ड से अनस्टॉपेबल तक

क्रिकेट में अक्सर कहा जाता है कि एक मौका जिंदगी बदल सकता है। रजत पाटीदार इसकी सबसे बड़ी मिसाल हैं। एक समय था जब उन्हें किसी टीम ने खरीदना जरूरी नहीं समझा। फिर एक चोट की वजह से उन्हें दूसरा मौका मिला। उन्होंने उस मौके को इतिहास में बदल दिया।

आज उनके नाम दो आईपीएल ट्रॉफियां हैं, करोड़ों फैंस का प्यार है और आईपीएल इतिहास में एक ऐसी जगह है, जहां पहुंचना हर कप्तान का सपना होता है।

रजत पाटीदार की कहानी सिर्फ सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह विश्वास, धैर्य और मौके को पहचानकर उसे इतिहास में बदल देने की कहानी है। यही वजह है कि आज RCB के लिए रजत सिर्फ कप्तान नहीं, बल्कि एक Era बन चुके हैं।

 

 

 

 

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