पुतिन और ट्रंप की डीजल डील क्या है?

पुतिन और ट्रंप की डीजल डील क्या है?

Donald Trump and Vladimir Putin

निखिल रंजन

डीजल की बढ़ती कीमतों से अमेरिका के ट्रक मालिक और किसान बेहद परेशान हैं। इसी साल 3 नवंबर को होने जा रहे मिडटर्म चुनावों के लिहाज से भी यह मतदाताओं और राजनेताओं के लिए बड़ी चिंता है। डॉनल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद अमेरिका में डीजल की कीमतें सोमवार को 0.5 फीसदी घट गईं। ALSO READ: 194 साल का कछुआ जोनाथन बता सकता है लंबे जीवन का रहस्य

 

रूसी तेल से कितना फर्क पड़ेगा

शुक्रवार को डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि रूस 22.5 लाख बैरल 3 लाख (मिट्रीक टन) से ज्यादा डीजल की सप्लाई तुरंत अमेरिका और दुनिया के बाजारों को करेगा। अमेरिका के एनर्जी इन्फॉर्मेशन प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक देश के परिवहन क्षेत्र को हर दिन इससे कहीं ज्यादा डीजल सप्लाई की जरूरत होती है। प्रशासन के मुताबिक यहां रोजाना 29।4 लाख बैरल तेल का इस्तेमाल होता है।

 

ट्रंप का कहना है कि रूस नवंबर में 5 लाख टन तेल की सप्लाई करेगा और “उसके तुरंत बाद” 10 लाख टन और। यह अमेरिकी परिवहन में चार दिन के लिए जितना चाहिए उससे भी कम है।

 

अमेरिका ने रूसी डीजल के निर्यात पर लगा प्रतिबंध हटा लिया है लेकिन यह साफ नहीं है कि क्या टैंकरों का इस्तेमाल तेल की सप्लाई के लिए हो सकता है। बहुत से टैंकरों पर लगा प्रतिबंध अभी जारी है।

 

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के कबाद रूसी तेल के निर्यात पर यूरोपीय संघ ने भी कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। रूस गैरयूरोपीय देशों को पेट्रोल डीजल की सप्लाई करता है लेकिन उनकी ढुलाई और बीमा समेत दूसरी समुद्री सेवाओं को हासिल करने में तमाम बाधाएं आती हैं। कई बार प्रतिबंधित टैंकरों को रास्ते के बंदरगाहों पर रोका भी गया है। 

 

इसके साथ ही यह भी अभी स्पष्ट नहीं है कि रूसी ऊर्जा ठिकानों पर हाल के यूक्रेनी हमलों के बाद उनकी क्या स्थिति है। ALSO READ: कैसे ब्रिटेन को जर्मनी और ईयू के करीब लाए ट्रंप

 

कितना डीजल निर्यात कर सकता है रूस

रूसी रिफाइनरियों पर यूक्रेन के ड्रोन हमले से पहले रूस एक लाख टन डीजल प्रतिदिन निर्यात करता था। रूसी रिफाइनरियों पर ये हमले 2024 में शुरू हुए थे।

 

रिफाइनरियों को हुए नुकसान के बाद रूस ने इस साल जुलाई में डीजल का निर्यात बंद कर दिया था ताकि घरेलू मांग पूरी की जा सके। बाद में जिन देशों के साथ द्वीपक्षीय समझौता नहीं है, उनके लिए यह रोक 31 अक्टूबर तक के लिए बढ़ा दी गई। हालांकि “मित्र देशों” यह सप्लाई जारी रही, इनमें ज्यादातर मध्य एशिया के देश हैं।

 

सूत्रों का कहना है कि रूस इस महीने 3 लाख टन डीजल का उत्पादन कर सकता है मगर इसके लिए देश के यूरोपीय हिस्से में मौजूद एक बड़ी रिफाइनरी को चालू करना होगा। इस रिफाइनरी पर ड्रोन से हमला हुआ था।

 

क्या डीजल के निर्यात से रूसी अर्थव्यवस्था को मदद मिलेगी?

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के मुताबिक तेल रिफाइनरियों पर हमले से रूस की जीडीपी को 1 फीसदी का नुकसान हुआ है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की गणना के मुताबिक यह इसकी कीमत करीब 26।6 अरब अमेरिकी डॉलर है

 

3 लाख टन डीजल के निर्यात से लगभग 40 करोड़ अमेरिकी डॉलर हासिल होंगे। इसका एक बहुत छोटा सा हिस्सा ही रूसी सरकार की बजट में जायएगा। रूस तेल के उत्पादन पर तो टैक्स लगाता है लेकिन तेल और ईंधन के निर्यात पर नहीं।

 

रूस के पास 30 बड़ी तेल रिफाइनरियां हैं जबकि यूक्रेन में इस समय कोई भी रिफाइनरी काम नहीं कर रही है।

 

रूसी डीजल के निर्यात की चुनौतियों के अलावा ईरान युद्ध के कारण दुनिया में खाड़ी के देशों से भी तेल की सप्लाई पर काफी असर पड़ा है।

 

जी7 समूह के सातों देशों हाल ही में रणनीतिक भंडार से ईंधन निकालने पर सहमत हुए हैं।  ये देश अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आयोग आईईए के सदस्य हैं। 32 देशों वाले इस संगठन ने दुनिया के आपातकालीन भंडार से मार्च में 40 करोड बैरल कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की निकासी कराई थी। हाल ही में कई और देशों ने बाजार के लिए तेल जारी करने का प्रस्ताव दिया है।

 

डीजल डील पर प्रतिक्रियाएं

रूस ने शनिवार को कहा कि उसने जुलाई में डीजल के निर्यात पर जो प्रतिबंध लगाया था उसमें आंशिक छूट तुरंत प्रभाव से लागू कर दी गई है।

 

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का कहना है कि  ट्रंप के डीजल सप्लाई डील से यूक्रेन पर रूसी हमले बढ़ेंगे और ज्यादा लोगों की जान जाएगी।

 

अमेरिकी सांसदों ने भी इस डील की आलोचना की है। इसमें ट्रंप की पार्टी के सांसद भी शामिल हैं। रिपब्लिकन सांसद डॉन बेकर ने कहा है कि यह समय संसद से पारित और ज्यादा प्रतिबंधों को लागू करने का है प्रतिबंध उठाने का नहीं।

 

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नम का कहना है कि उनका देश रूस पर प्रतिबंधों को और मजबूत करेगा। जर्मन विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने एक बार फिर यूक्रेन के प्रति समर्थन जताते हुए रूस पर शांति वार्ता बहाल करने के लिए और ज्यादा दबाव बनाने की मांग की है।

 

रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय ने सोमवार को कहा कि युद्धविराम पर बातचीत जारी है। हालांकि यह पूछे जाने पर कि क्या यह सिर्फ तेल रिफाइनरियों से जुड़ा है, कार्यालय ने प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया।

 

भारत पर डील का असर

बाजार में ज्यादा तेल आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा तेल होगा और कीमतें नीचे आएंगी। भारत बड़ी मात्रा में तेल का आयात करता है तो उसके आयात का बिल नीचे जाएगा। ज्यादा तेल की मौजूदगी उसे लेकर भूराजनीतिक और बाजार की चिंताओं को घटाएगी। इसके अलावा सप्लाई में बाधा से उद्योग जगत को जो दिक्कतें हो रही हैं उनमें भी कमी आएगी।

 

भारत लंबे समय से कहता आ रहा है कि रूस तेल खरीदना ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में रूसी तेल को अमेरिकी मंजूरी से भारत के रुख को मजबूती मिलेगी।

 

हालांकि भारत को कुछ नुकसान भी हो सकता है। भारत कच्चे रूसी तेल का आयात कर तैयार उत्पाद दुनिया के बाजारों को बेचता है। नई परिस्थितियों में वे देश खुद भी तेल का आयात कर सकते हैं। ऐसे में भारत का मुनाफा घटेगा। सिर्फ इतना ही नहीं निर्यात की मात्रा भी कम हो सकती है।