
महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में कम बारिश के चलते चीनी का उत्पादन घटने और इसके दाम बढ़ने के जोखिम को टालने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने गन्ने से बने इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाने पर रोक लगा दी है। अब पेट्रोल में ब्लेंडिंग के लिए मक्का, टूटे चावल और अन्य अनाजों से बने इथेनॉल का इस्तेमाल किया जाएगा।
भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने 16 अक्टूबर को पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों की ओर से जारी टेंडर में नवंबर से शुरू होने वाले सप्लाई ईयर के लिए करीब 1100 करोड़ लीटर इथेनॉल की खरीद के लिए बोलियां मांगी हैं। इसका उद्देश्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने की जरूरत को पूरा करना है।
किन चीजों से बने इथेनॉल पर लगी रोक?
खरीद निविदा में गन्ने के रस, चीनी या चीनी की चाशनी और बी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल के लिए बोलियां नहीं मांगी गई हैं।’ इस पाबंदी से पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के कार्यक्रम के लिए कच्चे माल की खरीद की रणनीति में बदलाव होगा।
मक्के से बने इथेनॉल पर प्रोत्साहन राशि घटी
टेंडर में मक्के से बने इथेनॉल पर प्रोत्साहन राशि भी घटाकर 68.86 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जो पहले 71.86 रुपये प्रति लीटर थी। मक्के से बने इथेनॉल पर प्रोत्साहन राशि 5.79 रुपये से घटाकर 2.79 रुपये प्रति लीटर किए जाने से इस अनाज से इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों का मुनाफा घटने की आशंका है।


