
अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के अफगानिस्तान में छिपे होने की बात कही जा रही थी। अफगान विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने साफ किया है कि भारत के कई भीषण हमलों का मास्टरमाइंड अजहर उनकी धरती पर मौजूद नहीं है। साथ ही, तालिबान सरकार ने दोहराया है कि अफगान जमीन का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा। ALSO READ: ब्रिटेन में क्यों फंसे हैं विजय माल्या? भगोड़े कारोबारी ने किया बड़ा दावा
मसूद को लेकर क्या था पाकिस्तान का दावा?
ग्रे सूची से बाहर आने के लिए 2021 में पाकिस्तान ने ढोंग रचते हुए कुख्यात आतंकी मसूद अजहर समेत कई आतंकवादियों को उनकी अनुपस्थिति में दोषी ठहराने का नाटक किया था, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने 2019 में ही वैश्विक आतंकवादी घोषित कर दिया था। जानकारों का मानना है कि जैसे ही 2022 में पाकिस्तान को एफएटीएफ की पाबंदियों से राहत मिली, उसने आतंकियों पर कार्रवाई के अपने ही वादों से किनारा करना शुरू कर दिया और अब अपनी नाकामी छिपाने के लिए अजहर के अफगानिस्तान में होने का झूठा राग अलाप रहा है।
FATF का दबाव
इस कूटनीतिक ड्रामे के पीछे असल वजह फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) का दबाव है। एफएटीएफ की आगामी पूर्ण बैठक से ठीक पहले पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों और उनके वित्तीय नेटवर्क पर नकेल कसने को लेकर अंतरराष्ट्रीय शिकंजा कस रहा है। पाकिस्तान पहले ही 2018 से 2022 के बीच टेरर फंडिंग रोकने में नाकाम रहने के कारण एफएटीएफ की 'ग्रे सूची' का खामियाजा भुगत चुका है। ALSO READ: डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से क्यों नाराज हैं भारतीय-अमेरिकी? मिडटर्म इलेक्शन पर दिखेगा असर
कौन है मौलाना मसूद अजहर?
मसूद अजहर आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक है। यह संगठन जम्मू कश्मीर में भी सक्रिय है। भारत ने उसकी आतंकी गतिविधियों की वजह से उसे अपने सबसे वांछित आतंकवादियों की सूची में रखा हुआ है। 1 मई 2019 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किया है।
अजहर मसूद को 1994 में गिरफ्तार किया गया था। दिसंबर 1999 में उसे भारत की सरकार के द्वारा अपहृत विमान इंडियन एयरलाइंस फ्लाइट 814 के यात्रियों के बदले अन्य आतंकियों के साथ छोड़ा गया था। इस विमान को अफगानिस्तान के कंधार ले जाया गया था।
मसूद अजहर ने भारत में कई आतंकी हमलों को अंजाम दिया है। इनमें 2001 में संसद पर हमला, 2008 में मुंबई हमले, 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हमला और 2019 में पुलवामा बम धमाका शामिल हैं।


