अमेरिकी शेयर बाजारों में गुरुवार को आई बिकवाली की आंधी ने शुक्रवार यानी 6 नवंबर को एशिया सहित दुनियाभर के बाजारों को अपनी चपेट में ले लिया। लेकिन, भारतीय बाजारों में अच्छी तेजी देखने को मिली। यह लगातार सातवां सत्र है, जब भारतीय शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांकों निफ्टी और सेंसेक्स में तेजी दिख रहा है।
भारतीय शेयर बाजारों में लगातार सातवें सत्र तेजी
शुक्रवार को दिन में 1:15 बजे निफ्टी 173 अंक यानी 0.73 फीसदी चढ़कर 24,715 पर चल रहा था। सेंसेक्स भी 1 फीसदी यानी 791 अंक के उछाल के साथ 80,092 अंक पर चल रहा था। यह भारतीय बाजारों में तेजी का लगातार सातवां सत्र है। सवाल है कि जब दुनियाभर के बाजारों में बड़ी बिकवाली दिख रही है तब भारतीय बाजार इससे क्यों अछूता है?
लार्जकैप शेयरों में तेजी की बदौलत सेंसेक्स-निफ्टी में तेजी
Geojit Investments के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का मानना है कि अमेरिकी बाजारों में आई भारी गिरावट का असर एशियाई बाजारों पर पड़ा है। लेकिन भारत पर इसका असर तुलनात्मक रूप से कम है। भारत में आज मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर काफी दबाव दिखा। लेकिन, लार्जकैप शेयरों में अच्छी तेजी से सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान में थे।
AI इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर्स में निवेश में आ सकती है कमी
उन्होंने कहा कि अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद निवेशकों को डर है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर से जुड़े निवेश पर सख्त नियम लागू हो सकते हैं। AI ट्रेड में आने वाली यह कमजोरी भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। उन्होंने बताया कि पिछले पांच कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 35,781 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। यह विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव का संकेत है।
भारतीय शेयर बाजारों में जारी तेजी की ये हैं वजहें
भारत में सितंबर तिमाही के कंपनियों के नतीजे अच्छे हैं। इसका असर कंपनियों के शेयर पर दिख रहा है। आज की बाजार की तेजी में लार्जकैप शेयरों की बड़ी भूमिका है, जिनका वैल्यूएशन हालिया गिरावट के बाद पहले के मुकाबले आकर्षक हो गया है। गुरुवार यानी 5 नवंबर को जहां Sensex में 2.6 फीसदी की तेजी आई थी, वहीं Smallcap 100 इंडेक्स केवल 0.67 फीसदी चढ़ा था। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों का पैसा मुख्य रूप से बड़ी कंपनियों के शेयरों में जा रहा है।
FII की खरीदारी से भारतीय बाजार को मिला सपोर्ट
भारतीय शेयर बाजारों पर विदेशी निवेशकों की वापसी का भी असर दिख रहा है। विदेशी निवेशकों ने पिछले पांच कारोबारी सत्रों में शुद्ध रूप से 20,835 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर खरीदे हैं। यह अक्टूबर में हुई भारी बिकवाली के बाद बड़ा बदलाव है। अक्टूबर तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में करीब 30 अरब डॉलर की रिकॉर्ड बिकवाली कर चुके थे। स्टॉक एक्सचेंजों के प्रोविजनल डेटा के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने गुरुवार को 14,796 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। यह 24 फरवरी 2021 के बाद एक दिन में उनकी सबसे बड़ी खरीदारी है।
करेक्शन के बाद बढ़ा भारतीय बाजार का बढ़ा आकर्षण
Allianz Global Investors में इंडिया इक्विटी पोर्टफोलियो मैनेजर आनंद गुप्ता के मुताबिक, कंपनियों की कमाई में तेजी, औसत से कम वैल्यूएशन और विदेशी निवेशकों की कम हिस्सेदारी भारत को निवेश के लिहाज से आकर्षक बनाती है। Motilal Oswal Financial Services में वेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च प्रमुख सिद्धार्थ खेमका का भी मानना है कि भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान जारी रह सकता है।
अमेरिकी और एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट की वजह
अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी की मिडटर्म चुनाव में जीत के बाद AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली हुई। निवेशकों को आशंका है कि AI कंपनियों पर नियामकीय सख्ती बढ़ सकती है और डेटा सेंटर में बड़े निवेश की योजनाओं को झटका लग सकता है। गुरुवार को Nasdaq Composite 5.52 फीसदी टूटकर 24,315 पर बंद हुआ। यह अक्टूबर में बने अपने रिकॉर्ड स्तर से 10 फीसदी से ज्यादा गिर गया है। इस तरह इंडेक्स टेक्निकल करेक्शन में प्रवेश कर चुका है। S&P 500 में 4.36 फीसदी और Dow Jones Industrial Average में 3.44 फीसदी की गिरावट आई।
एशियाई बाजारों पर भी एआई ट्रेड रिवर्सल का बड़ा असर
एशियाई बाजारों में भी बिकवाली का दबाव रहा। जापान का Nikkei 225 करीब 5 फीसदी से ज्यादा टूट गया और अपने रिकॉर्ड हाई से 20 फीसदी से अधिक नीचे आकर बेयर मार्केट में प्रवेश कर गया। दक्षिण कोरिया का KOSPI शुरुआती कारोबार में 8 फीसदी से ज्यादा गिरा। भारी गिरावट के कारण वहां 20 मिनट के लिए कारोबार रोकना पड़ा। दक्षिण कोरिया की चिप निर्माता कंपनियों SK Hynix और Samsung Electronics के शेयरों में भारी गिरावट आई। जापान में भी सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयर टूटे। ताइवान में TSMC और Hon Hai Precision के शेयरों में भी कमजोरी रही।

