LIC के एजेंटों के लिए क्या बदल सकता है? IRDAI के प्रस्तावित नए कमीशन नियमों का क्या होगा असर, MD ने समझाया

बीमा नियामक IRDAI कमीशन पर सीमा और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े नए नियम लाने की तैयारी में है। इस पर LIC के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर आर. दोराईस्वामी ने कहा है कि इन नियमों का LIC पर सीमित असर होगा, क्योंकि कंपनी पहले से ही कई प्रस्तावित सीमाओं के अंदर काम कर रही है। ANI को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने ये भी संकेत दिया कि जिन बीमा कंपनियों का डिस्ट्रीब्यूशन खर्च ज्यादा है, नियम फाइनल होने पर उन पर दबाव ज्यादा पड़ेगा।

LIC पर सबसे कम असर क्यों?

दोराईस्वामी के मुताबिक LIC ने कभी डिस्ट्रीब्यूशन पर बहुत ज्यादा खर्च नहीं किया। उन्होंने कहा, “खास तौर पर LIC की बात करें तो LIC डिस्ट्रीब्यूशन पर बहुत ज्यादा खर्च नहीं करता रहा है और कमीशन के साथ-साथ डिस्ट्रीब्यूशन के दूसरे खर्चों पर भी उसकी अपनी अंदरूनी सीमाएं रही हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “रेगुलेटर ने कंसल्टेशन पेपर में जो भी प्रस्ताव रखा है, LIC कई मामलों में कमोबेश उसका पालन कर रहा है, सिवाय कुछ प्रोडक्ट लाइंस और रेगुलर प्रीमियम प्लान के कुछ प्रीमियम भरने की अवधियों के।’

LIC एजेंटों पर क्या होगा असर

एजेंटों के लिए सबसे अहम बात यही है कि बदलाव कहां दिख सकता है। दोराईस्वामी ने कहा कि LIC को नियमों के हिसाब से कुछ प्रोडक्ट्स में बदलाव करना या उन्हें दोबारा फाइल करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा, ‘सिर्फ उस स्थिति में, जब बदले हुए नियमों की वजह से हमें प्रोडक्ट्स वापस लेने पड़ें, दोबारा फाइल करने पड़ें या उनमें बदलाव करना पड़े, तब उसका तुरंत असर हो सकता है।’

साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि ये असर LIC के लिए छोटा होगा। उन्होंने कहा, ‘लेकिन LIC पर इसका सबसे कम असर होगा। रेगुलेटर जिन सीमाओं की बात कर रहा है, उनमें से कई के हम आराम से अंदर हैं।”

दोराईस्वामी ने LIC एजेंटों के लॉन्ग टर्म हितों की रक्षा पर जोर दिया और उन्हें कंपनी का “तरक्की का साथी” बताया। उन्होंने पुष्टि की कि LIC ने रेगुलेटर को अपना फीडबैक भेज दिया है। उन्हें भरोसा है कि नियम फाइनल होने से पहले बीमा कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनर्स की चिंताओं पर विचार किया जाएगा।

IRDAI क्यों ला रहा है नए नियम?

दोराईस्वामी के मुताबिक रेगुलेटर का मकसद डिस्ट्रीब्यूशन खर्च घटाना है। कमीशन पर लगी सीमा हटने और कुल खर्च (एक्सपेंसेज ऑफ मैनेजमेंट) वाले नियमों की ओर बढ़ने के बाद ये खर्च काफी बढ़ गया है।

उन्होंने कहा, “ग्राहक की भलाई के लिए लाइफ इंश्योरेंस का अर्थशास्त्र सुधारने की दिशा में उठाया गया कोई भी कदम इंडस्ट्री को आगे बढ़ने में मदद करेगा।”

VNB मार्जिन 22.3% पर, क्या रही वजह

दोराईस्वामी ने बताया कि LIC का वैल्यू ऑफ न्यू बिजनेस (VNB) मार्जिन बढ़कर 22.3% पर पहुंचा है। इसकी वजह बेहतर प्रोडक्ट मिक्स, नॉन-पार्टिसिपेटिंग प्रोडक्ट्स में बड़ी पॉलिसी और प्रोटेक्शन व सेविंग्स प्रोडक्ट्स पर ज्यादा फोकस है।

उन्होंने कहा, “हम VNB मार्जिन से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को सुधारने पर लगातार काम कर रहे हैं। सबसे पहला है प्रोडक्ट मिक्स। हम आदर्श प्रोडक्ट मिक्स की ओर काफी अच्छी प्रगति कर रहे हैं, जो नॉन-पार और पार में करीब एक-तिहाई और दो-तिहाई का अनुपात है।”

FY27 में इन प्रोडक्ट्स पर रहेगा फोकस

वित्त वर्ष 2027 में LIC का फोकस इंडिविजुअल टर्म इंश्योरेंस, सेविंग्स, एन्युटी और यूलिप (ULIP) बढ़ाने पर रहेगा। साथ ही हेल्थ से जुड़े प्रोडक्ट्स भी मजबूत किए जाएंगे। दोराईस्वामी ने LIC के हेल्थ शील्ड, न्यू कैंसर कवर और जीवन रक्षा का जिक्र किया। जीवन रक्षा एक प्योर टर्म इंश्योरेंस प्रोडक्ट है, जो “मिसिंग मिडिल” यानी बीमा से छूटे मध्यम वर्ग की सुरक्षा जरूरतों के लिए है।

प्राइवेट बीमा कंपनियों से बढ़ती टक्कर पर उन्होंने कहा कि LIC अपना डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क मजबूत करेगा, एजेंटों की उत्पादकता बढ़ाएगा और प्रोडक्ट्स की रेंज बढ़ाएगा। LIC का लक्ष्य देश की हर पंचायत में एक बीमा सखी रखने का है और अब तक करीब 66% पंचायतें इसके दायरे में आ चुकी हैं।

शेयर बाजार में निवेश और 2047 का लक्ष्य

शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर दोराईस्वामी ने कहा कि LIC लॉन्ग टर्म निवेशक है। उन्होंने कहा, “हम ऐसे सेक्टर और कंपनियां देखते हैं जो हमें लॉन्ग टर्म में वैल्यू बनाने के मौके देती हैं, और हम गिरावट में निवेश करते हैं।” बाजार चढ़ने पर LIC मुनाफा भी बुक करता है, ताकि पॉलिसीधारकों को समय पर भुगतान हो सके।

उन्होंने कहा कि विकसित देशों के मुकाबले भारत में बीमा की पहुंच कम है, इसलिए ग्रोथ की बड़ी गुंजाइश है। 2047 तक सबके लिए बीमा के मिशन के तहत LIC ग्रामीण और छोटे शहरों पर खास ध्यान देगा।

Q2 में मुनाफा 20.12% बढ़ा

सितंबर तिमाही (Q2 FY27) में LIC का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 20.12% बढ़कर ₹12,076.02 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹10,053.39 करोड़ था। नेट प्रीमियम इनकम 16.24% बढ़कर ₹1,47,018.18 करोड़ पहुंच गई। सिंगल प्रीमियम इनकम ₹50,802.84 करोड़ से बढ़कर ₹68,402.86 करोड़ रही।