क्या गुलाम नबी आजाद कांग्रेस में वापसी का रास्ता तलाश रहे हैं?

क्या गुलाम नबी आजाद कांग्रेस में वापसी का रास्ता तलाश रहे हैं?

Ghulam Nabi Azad Congress

Ghulam Nabi Azad Congress: प्रदेश की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यह चल रहा है कि क्‍या पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद कांग्रेस पार्टी में वापसी का रास्ता तलाश रहे हैं? यह सवाल चर्चा में इसलिए क्‍योंकि उनकी अपनी पार्टी डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी), राजनीति में पूरी तरह नाकाम रही है।

 

याद रहे आजाद ने लगभग 50 साल तक कांग्रेस में काम किया। वे 2005 से 2008 तक जम्मू कश्मीर राज्य के मुख्यमंत्री रहे और केंद्रीय मंत्री के तौर पर भी काम किया। 26 अगस्त 2022 को उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी। सोनिया गांधी को लिखे अपने इस्तीफे में उन्होंने राहुल गांधी पर वरिष्ठ नेताओं को नजरअंदाज करने और अनुभवहीन लोगों को पार्टी चलाने देने का आरोप लगाया था।

बहुत खराब रहा आजाद की पार्टी का प्रदर्शन

अपने इस्‍तीफे के उपरांत एक महीने बाद, 26 सितंबर 2022 को उन्होंने डीपीएपी शुरू की। डीपीएपी की शुरूआत पर उन्होंने कहा था कि यह पार्टी जम्मू कश्मीर के लोगों के लिए काम करेगी। पर उनकी नई पार्टी का प्रदर्शन बहुत खराब रहा। 2024 के लोकसभा चुनावों में, पार्टी के तीन उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई, उन्हें क्रमशः 3.56%, 2.49% और 2.24% वोट मिले। विधानसभा चुनावों में, डीपीएपी ने 23 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन एक भी सीट नहीं जीत पाई, पार्टी का औसत वोट शेयर 5% से थोड़ा ही ज्‍यादा रहा। उन्हें कुल मिलाकर लगभग 80,000 वोट मिले।

 

पांच सीटों पर, डीपीएपी उम्मीदवारों को ‘नोटा’ से भी कम वोट मिले। दरअसल आजाद बीमार थे और ज्‍यादा प्रचार नहीं कर पाए, इसलिए कुछ उम्मीदवारों ने अपना नाम वापस ले लिया। कई लोगों का यह भी मानना ​​था कि डीपीएपी गुप्त रूप से भाजपा की मदद कर रही थी। इस छवि से पार्टी को बहुत नुकसान हुआ।

सीईसी पर टिप्पणियों से कांग्रेस में वापसी की अटकलें

इस हार के बाद, पार्टी के कई वरिष्ठ नेता कांग्रेस में चले गए। अप्रैल 2025 में, आजाद ने डीपीएपी के आफिस और संगठनात्मक कमेटियां बंद कर दीं, जिससे पार्टी के भविष्य को लेकर अटकलें और तेज हो गईं। अब मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार पर आजाद की हालिया टिप्पणियों ने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों को हवा दी है। 26 सितंबर को अनंतनाग में उन्होंने विपक्षी पार्टियों से एकजुट होने और वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (एसआईआर) से जुड़ी चिंताओं को लेकर संसद में सीईसी का मुद्दा उठाने की अपील की।

 

आजाद के लिए, हाल के समय में सार्वजनिक रूप से बोलने का यह कुछ मौकों में से एक था। यह साफ नहीं है कि वह सच में कांग्रेस में लौटेंगे या बस सुर्खियों में बने रहने की कोशिश कर रहे हैं। जो बात साफ है, वह यह है कि 2022 में उन्होंने जो पार्टी शुरू की थी, वह नाकाम रही है और 75 साल के यह नेता एक बार फिर नया रास्ता तलाश रहे हैं।