
Divya Mittal Politics Janniti Bharat Party: उत्तर प्रदेश की चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपने राजनीतिक सफर को लेकर एक बड़ा और धमाकेदार ऐलान कर दिया है। उन्होंने न केवल 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में उतरने की घोषणा की है, बल्कि अपनी पार्टी का नाम और अपनी चुनावी सीट भी तय कर ली है। उन्होंने अपनी पार्टी का नाम रखा है ‘जननीति भारत’। साथ ही मिर्जापुर सदर सीट से चुनाव लड़ने का भी ऐलान कर दिया है।
उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा में अपनी अलग छाप छोड़ने वाली पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल अब सियासत के रंग में रंगने को पूरी तरह तैयार हैं। राजनीति में कदम रखने के अपने इरादे को पहले ही जता चुकीं दिव्या मित्तल ने अब सस्पेंस खत्म करते हुए ऐलान किया है कि वह साल 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव ‘मिर्जापुर सदर’ सीट से लड़ेंगी।
चौंकाने वाली बात यह है कि उन्होंने अपनी खुद की पार्टी ‘जननीति भारत’ बनाकर चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है। मिर्जापुर में लंबे समय तक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में तैनात रहीं दिव्या मित्तल की जनता के बीच मजबूत पकड़ मानी जाती है, और उनके इस कदम से मिर्जापुर का राजनीतिक तापमान अभी से चढ़ गया है।
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— Divya Mittal (@divyamittal_IAS) October 15, 2026
क्या कहा दिव्या मित्तल ने?
दिव्या ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर पोस्ट वीडियो में कहा कि जननीति भारत 2027 का यूपी चुनाव लड़ेगी, ताकि सरकार आपके (जनता के) हिसाब से चल सके। उन्होंने अपनी पार्टी के तीन वचन के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि जननीति भारत का पहला वचन है- देश की नीतियों के केन्द्र में लोग होंगे और उन नीतियों को लोग ही तय करेंगे। दूसरी नीति पर उन्होंने कहा कि जन से नीति और नीति से भारत। अर्थात हर फैसला जरूरत देखकर होगा, पहचान देखकर नहीं। तीसरे वचन पर कहा कि हर काम का हिसाब जनता लेगी। जनता को पता होना चाहिए कि क्या हो रहा है और कब तक होगा। उन्होंने अपने वीडियो में युवा, आम आदमी, किसान, व्यापारियों की बात की। भ्रष्टाचार और लेटलतीफी की बात भी की। ALSO READ: IAS दिव्या मित्तल का इस्तीफा मंजूर, जानिए कौन हैं IIT-IIM पासआउट अफसर और क्या मिर्जापुर से लड़ेंगी चुनाव?
क्यों चुनी मिर्जापुर सदर सीट?
हालांकि पहले से ही अटकलें थीं कि दिव्या मिर्जापुर से चुनाव लड़ेंगी, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि उन्होंने यही सीट क्यों चुनी? दरअसल, इस सीट पर सबसे बड़ा वोट बैंक वैश्य (गुप्ता/साहू/व्यापारी) समाज का है, जिनकी संख्या करीब 1.50 लाख के करीब है। दिव्या मित्तल भी वैश्य समाज से आती हैं। साथ ही वे लंबे समय तक मिर्जापुर जिले की कलेक्टर भी रही हैं। ऐसे में स्थानीय लोग उनके कामकाज के तरीके को भी समझते हैं। इसका फायदा भी उन्हें मिल सकता है। वैश्य मतदाताओं के बाद इस सीट पर ब्राह्मण और क्षत्रिय (ठाकुर) मतदाता भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में यूजीसी के खिलाफ चल रहे आंदोलन के चलते सवर्ण वोटर भी उन्हें एक विकल्प के रूप में देख सकते हैं। ALSO READ: यूपी की राजनीति में उतरेंगी पूर्व IAS दिव्या मित्तल, क्या होगा अगला कदम? राजभर ने साधा निशाना
आसान नहीं होगी दिव्या की राह
हालांकि मिर्जापुर सदर सीट पर जीत हासिल करना दिव्या के लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि यह सीट भाजपा और एनडीए का गढ़ मानी जाती है। वर्ष 2017 के भाजपा के कैलाश चौरसिया ने यहां जीत हासिल की थी। वहीं, 2022 में भाजपा के ही रत्नाकर मिश्रा विजयी रहे थे। इसके साथ ही यह क्षेत्र केंद्रीय मंत्री और अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल का संसदीय क्षेत्र भी है। पिछले 20 वर्षों से यहां पटेल परिवार का वर्चस्व रहा है। ऐसे में दिव्या यहां त्रिकोणीय मुकाबले में उलझ भी सकती हैं।


