
ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण सड़क हादसे में 15 श्रद्धालुओं की मौत और 40 से अधिक लोगों के घायल होने के बाद जहां हर कोई शोक में डूबा हुआ था। वहीं जिन पर घायलों के इलाज का जिम्मा था वह वीआईपी नेताओं की आवभगत में जुटे हुए थे। पूरा मामला ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल से जुडा है। मंदिर हादसे में गंभीर रुप से घायल लोगों को इलाजा के लिए जयारोग्य अस्पताल के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। घटना के बाद सुबह मुख्यमंत्री के निर्देश पर मंत्री एदल सिंह कंसान और राकेश शुक्ला के साथ स्थानीय सांसद भारत सिंह कुशवाह अस्पाताल पहुंचे औऱ घायलों का हालचाल जाना और परिजनों से बात की।
वहीं जब दोपहर बाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अस्पताल पहुंचने की जानकारी अस्पताल प्रबंधन को लगी तो सिंधिया के आगमन की तैयारी में अस्पताल परिसर की साफ-सफाई और ग्रीन कार्पेट बिछाई जाने लगी। हादसे के बाद अस्पताल में घायलों और उनके परिजनों के बीच बेचैनी का माहौल था। कोई अपनों की सलामती की दुआ कर रहा था, तो कोई इलाज की जानकारी के लिए इधर-उधर भटक रहा था। ऐसे समय में वीआईपी दौरे की तैयारियों का यह नजारा देख हर कोई हैरान रह गया। मौके पर मौजूद लगों ने जब एक कर्मचारी से इसकी वजह पूछी गई, तो उसने कहा कि आप सब जानते तो हैं सिंधिया जी आने वाले हैं। हम तो कर्मचारी हैं, ऊपर वालों का आदेश मानना पड़ेगा।।
केंद्रीय मंत्री सिंधिया के अस्पताल पहुंचने से पहले परिसर में साफ-सफाई के साथ व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का काम भी होता दिखाई दिया। अस्पताल परिसर में मौजूद टूटी टाइल्स और गड्ढों को सीमेंट-रेत के मसाले से ठीक करने की कवायद की गई। ट्रॉमा सेंटर के बाहर ग्रीन मैट बिछाने की तैयारी और परिसर की मरम्मत की तस्वीरों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए।
हादसे के बाद अस्पताल में घायलों का इलाज और उनके परिजनों को राहत देना सबसे बड़ी चुनौती थी। ऐसे समय में वीआईपी दौरे से पहले साफ-सफाई,मरम्मत और ग्रीन मैट बिछाने की तैयारी ने यह सवाल खड़ा किया कि आपात स्थिति में अस्पताल की प्राथमिकताएं क्या होनी चाहिए।
वहीं अस्पताल पहुंचे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से जब इसको लेकर मीडिया ने सवाल पूछा तो उन्होंने इसे गलत बताते हुए कहा कि मैं ग्वालियर का हूं, ग्वालियर मेरा है। मेरे लिए कहां से ग्रीन कारपेट क्या तमाशा है।


