दौसा बस हादसे में मारे गए यात्रियों के शव पहुंचे इंदौर, न राजस्‍थान और न ही मध्‍यप्रदेश सरकार ने दिया मुआवजा

bhumo bhor

राजस्थान के दौसा में हुए भीषण बस हादसे में इंदौर के दो लोगों की जान चली गई थी। दोनों का शुक्रवार को अंतिम संस्कार किया गया। नियमों के मुताबिक ऐसे हादसों में मरने वालों के परिजनों को मुआवजा दिया जाना चाहिए। लेकिन न तो राजस्‍थान और न ही मध्‍यप्रदेश की सरकार ने कोई मुआवजा अब तक दिया है। इधर दोनों परिवारों का रो रोकर बुरा हाल है।

दोनों सरकारों ने नहीं दिया मुआवजा: राजस्थान के दौसा में हुए बस हादसे में मृत दो यात्रियों के शव शुक्रवार सुबह इंदौर आए। हादसे में घायल यात्री भी इंदौर आए और इलाज करा रहे हैं। परिजनों का कहना है कि इस तरह के हादसों में सरकार की तरफ से मृतकों के परिवारों व घायलों को आर्थिक मदद या मुआवजा मिलता है, लेकिन इस बारे में न राजस्थान सरकार ने आर्थिक सहायता की घोषणा की और न ही मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से कोई पहल हुई।

डीएनए से हुई भूमि की पहचान : मेघदूत नगर निवासी भूमि का शव उसके पिता व परिजन गुरुवार रात दौसा से लेकर इंदौर के लिए रवाना हुए थे। डीएनए सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन ने उन्हें शव सौंपा था। सुबह 10 बजे भूमि का अंतिम संस्कार मेघदूत नगर मुक्तिधाम में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में रिश्तेदार व रहवासी शामिल हुए। इस हादसे में भूमि के साथ गई उसकी दो सहेलियां भी घायल हुई हैं। दरअसल, हादसे के समय भूमि सोई हुई थी। बस में उसकी सीट आगे की तरफ थी। टक्कर के कारण उसका केबिन ठीक से नहीं खुल रहा था और कांच के शीशे नहीं खुलने के कारण बस में धुआं भर गया था। इस कारण भूमि बाहर नहीं निकल पाई, जबकि उसकी सहेलियां बस से बाहर निकल गईं।

पति बच गए, नहीं बच सकीं पत्‍नी : उधर, हादसे में मृत निर्मला गुप्ता का अंतिम संस्कार रीजनल पार्क मुक्तिधाम में किया गया। निर्मला अपने पति चंदू गुप्ता के साथ बस में सवार थीं। हादसे के कारण उनका पैर फंस गया था, जिसे वे निकाल नहीं पा रही थीं। पति चंदू ने भी कोशिश की, लेकिन बस में मची अफरा-तफरी के कारण वे चाहकर भी पत्नी को बचा नहीं पाए और वह बस में जिंदा जल गईं।हादसे में पति चंदू गुप्ता को भी चोट आई है।