
दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीन नेताओं अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को रविवार को रिहा कर दिया गया। दिल्ली पुलिस ने इन नेताओं को 10 अक्टूबर को एहतियातन हिरासत में लिया था। CJP 2 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगी। 50-50 हजार के मुचलके पर रिहाई दी गई है। रिहाई के साथ उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त का पालन करना होगा।
CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने बताया कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने तीनों नेताओं को रिहा करने का आदेश दिया। उनके मुताबिक, नेताओं को एक साल तक शांति भंग नहीं करने की शर्त पर छोड़ा गया है। अधिवक्ता सौतिक बनर्जी ने भी तीनों नेताओं की रिहाई की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को रिहा कर दिया गया है और वे वहां से जा सकते हैं।
BNSS की धाराओं के तहत हुई थी गिरफ्तारी
दिल्ली पुलिस के अनुसार, तीनों नेताओं को 10 अक्टूबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत एहतियातन गिरफ्तार किया गया था। रविवार को उन्हें दिल्ली कैंट स्थित उप-मंडल कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत में पेश किया गया।
पुलिस ने कहा कि सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, एक साल तक शांति और अच्छे आचरण को सुनिश्चित करने के लिए 50,000 रुपये का जमानती बांड जमा कराया गया, जिसके बाद अदालत ने उन्हें रिहा कर दिया। रिहाई के बाद CJP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि आखिरकार दिल्ली पुलिस को अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को रिहा करना पड़ा। पार्टी ने अपने पोस्ट में कहा कि कॉकरोच कभी नहीं मरते।”
दिल्ली में सुरक्षा सख्त, 7 हजार से अधिक प्रदर्शनकारी हिरासत में
CJP नेताओं की हिरासत ऐसे समय हुई, जब जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शन में शामिल होने और जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे 7,000 से अधिक लोगों को शहर के अलग-अलग स्थानों पर हिरासत में लिया गया।
प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश के दौरान कई विपक्षी नेताओं को भी हिरासत में लिया गया। इनमें दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार शामिल बताए गए।
CJP और विपक्षी दल विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे पर विपक्ष और निर्वाचन आयोग के बीच विवाद के बीच दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।


