
Bihar Flood: बिहार में नदियों के जलस्तर में हुई अप्रत्याशित वृद्धि ने कई जिलों में तबाही मचा दी है। विशेष रूप से गंडक नदी ने अपने रौद्र रूप से राज्य के चार प्रमुख स्थानों— बगहा, डुमरियाघाट, रेवा घाट और लालगंज पर अब तक के उच्चतम बाढ़ स्तर का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। भारी जल प्रवाह के कारण गोपालगंज और सारण जिलों में गंडक नदी के दो तटबंध टूट गए हैं, जिससे निचले इलाकों में पानी तेजी से भर रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ प्रभावित पूर्वी और पश्चिमी चंपारण जिलों का हवाई सर्वेक्षण किया और अधिकारियों को राहत-बचाव कार्य तेज करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों और वाल्मीकिनगर बैराज से छोड़े गए रिकॉर्ड पानी के कारण बिहार में गंडक नदी का जलस्तर अपने चरम पर पहुंच गया है। राज्य जल संसाधन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, गंडक नदी ने चार प्रमुख स्थलों पर अपने पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं और नए उच्चतम बाढ़ स्तर दर्ज किए हैं।
चार स्थानों पर टूटे सर्वकालिक रिकॉर्ड
जल संसाधन विभाग द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, नदी के जलस्तर में हुई इस बेतहाशा बढ़ोतरी से पुराने रिकॉर्ड पीछे छूट गए हैं। बगहा (पश्चिम चंपारण) में गंडक नदी का जलस्तर 91.25 मीटर दर्ज किया गया, जो 29 सितंबर 2024 के पिछले रिकॉर्ड (90.90 मीटर) से 35 सेंटीमीटर अधिक है। डुमरियाघाट (गोपालगंज) में नदी का जलस्तर 64.64 मीटर पर पहुंच गया, जिसने जुलाई 2020 के 64.36 मीटर के सर्वकालिक रिकॉर्ड को 28 सेंटीमीटर से पीछे छोड़ दिया। रेवा घाट (मुजफ्फरपुर) में यहां नदी ने 55.55 मीटर का नया उच्चतम स्तर छुआ, जो पिछले रिकॉर्ड से 9 सेंटीमीटर अधिक है। लालगंज (वैशाली) में जलस्तर 52.19 मीटर दर्ज किया गया, जो पुराने रिकॉर्ड से 7 सेंटीमीटर अधिक है।
बुधवार दोपहर तक निचले इलाकों में स्थिति और गंभीर दर्ज की गई। दोपहर 2:00 बजे रेवा घाट पर जलस्तर बढ़कर 55.63 मीटर तथा लालगंज में 52.26 मीटर तक पहुंच गया। हालांकि, उपरी हिस्सों जैसे बगहा, ठकराहा और डुमरियाघाट में जलस्तर में मामूली गिरावट देखी गई है, लेकिन नदी अभी भी खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है।
गोपालगंज और सारण में टूटे तटबंध, कई गांव जलमग्न
पानी के भीषण दबाव और तेज प्रवाह को सह न पाने के कारण गोपालगंज और सारण जिलों में गंडक नदी के दो रिंग बांध (तटबंध) टूट गए। तटबंध टूटने से दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी अचानक घुस गया, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हजारों एकड़ में लगी फसलें जलमग्न हो गई हैं और ग्रामीण अपने मवेशियों व सामान के साथ ऊंचे स्थानों और एनएच की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया हवाई सर्वेक्षण
बाढ़ के गहराते संकट को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आपदा प्रबंधन और जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पूर्वी और पश्चिमी चंपारण के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। सर्वेक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को पूरी तरह अलर्ट रखा जाए।
प्रभावित परिवारों के बीच सूखी राहत सामग्री, पीने का शुद्ध पानी और दवाइयां तुरंत पहुंचाई जाएं। क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत के लिए आपातकालीन कार्य युद्धस्तर पर शुरू किए जाएं। बाढ़ राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई का संचालन बिना किसी बाधा के जारी रहे।
निचले इलाकों में प्रशासन अलर्ट पर
जल संसाधन विभाग के अभियंताओं की टीम चौबीसों घंटे तटबंधों की निगरानी कर रही है। वैशाली, मुजफ्फरपुर, सारण और गोपालगंज के जिला प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है, क्योंकि गंडक का पानी अब तेजी से गंगा नदी की ओर बढ़ रहा है, जिससे पटना और आसपास के गंगा तटीय इलाकों में भी जलस्तर बढ़ने की आशंका गहरा गई है।


