अहमदाबाद में बढ़ेगी ट्रैफिक की परेशानी, 5 महीने की तैयारी के बाद अब पूरा सुभाष ब्रिज होगा ध्वस्त

ahmedabad subhash bridge

ahmedabad subhash bridge

अहमदाबाद का करीब 53 साल पुराना ऐतिहासिक सुभाष ब्रिज अब गुजरे जमाने की बात हो जाएगा। अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) द्वारा इस ब्रिज की केवल मरम्मत करने के बजाय अब इसे पूरी तरह से तोड़कर नया बनाने की आधिकारिक घोषणा की गई है। ब्रिज की मरम्मत का काम पिछले 5 महीनों से चल रहा था, लेकिन इस दौरान इसके पिलर (खंभों) में गंभीर दरारें दिखने के बाद प्रशासन द्वारा इसे पूरी तरह हटाकर नया ब्रिज बनाने का फैसला लिया गया है।

 

IIT रुड़की की रिपोर्ट के बाद म्युनिसिपल कमिश्नर का एलान

ब्रिज के पिलर में दरारें दिखने पर AMC द्वारा IIT रुड़की और गांधीनगर की विशेषज्ञ एजेंसियों से इस संबंध में विशेष सर्वे कराया गया था। म्युनिसिपल कमिश्नर बंछानिधि पानी ने बताया कि कंसल्टेंसी और IIT रुड़की की रिपोर्ट के अनुसार, 53 साल पुराने पिलर कमजोर हो चुके हैं, इसलिए इन्हें भी नया बनाना जरूरी है। अगर ब्रिज के स्पैन और पिलर दोनों पूरी तरह से नए बनाए जाते हैं, तो इस नए ब्रिज की उम्र 100 साल तक बढ़ जाएगी और इसकी मजबूती भी काफी ज्यादा होगी।

 

प्रोजेक्ट की लागत बढ़ेगी और जनता को ट्रैफिक की परेशानी होगी

पहले इस ब्रिज की सिर्फ मरम्मत और आंशिक पुनर्निर्माण के लिए ₹236 करोड़ का टेंडर जारी किया गया था, लेकिन अब पूरा ब्रिज नए सिरे से बनना है, जिससे प्रोजेक्ट का खर्च काफी बढ़ जाएगा। इसके अलावा, जो ब्रिज 9 महीने में तैयार होने वाला था, उसमें अब करीब डेढ़ साल (18 महीने) का समय लगेगा। इस लंबी अवधि के कारण स्थानीय नागरिकों को वाडज से घूमकर पूर्वी इलाके या एयरपोर्ट जाना पड़ेगा, जिससे पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के बीच जनता की परेशानी और ट्रैफिक की समस्या और बढ़ेगी।

 

प्रशासन की घोर लापरवाही पर उठते सवाल

इस पूरे मामले में अहमदाबाद नगर निगम की गंभीर लापरवाही और प्लानिंग की कमी साफ तौर पर सामने आई है। स्थानीय लोग और विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि जब एजेंसी ने शुरुआत में ब्रिज की मरम्मत की रिपोर्ट तैयार की थी, तब पिलर की ये दरारें क्यों नहीं दिखाई दीं? सुभाष ब्रिज पर 5 महीने तक काम चलने और करोड़ों रुपये स्वाहा होने के बाद अचानक ऐसी रिपोर्ट कहां से आ गई? प्रशासन की इस ढुलमुल नीति के कारण जनता के पैसे और समय दोनों की बर्बादी हो रही है।