Agni 4 Missile : भारत ने अग्नि-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया, 4,000 KM तक मारक क्षमता

agni 4

भारत ने गुरुवार, 6 अगस्त को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से परमाणु क्षमता से लैस मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 का सफल परीक्षण किया। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह परीक्षण स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड (SFC) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की ओर से किया गया।

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रक्षा मंत्रालय ने कहा, “मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 का 6 अगस्त को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से सफल परीक्षण किया गया।” मंत्रालय के अनुसार, परीक्षण के दौरान मिसाइल के सभी परिचालन और तकनीकी मानकों का सफलतापूर्वक सत्यापन किया गया।

राजनाथ सिंह ने DRDO और SFC को दी बधाई

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अग्नि-4 के सफल परीक्षण के लिए DRDO और SFC को बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि यह सफल मिशन भारत की अत्याधुनिक तकनीक के जरिए देश की रक्षा करने की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। रक्षा मंत्री ने DRDO के वैज्ञानिकों और उद्योग जगत के साझेदारों के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे परीक्षण भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक और मिसाइल विकास कार्यक्रम को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

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4,000 किलोमीटर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम

 

अग्नि-4 एक दो चरणों वाली सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है। इसमें सॉलिड-फ्यूल रॉकेट मोटर का इस्तेमाल किया गया है। यह मिसाइल 4,000 किलोमीटर तक की दूरी पर लक्ष्य को निशाना बनाने में सक्षम है।अग्नि-1 से अग्नि-4 तक की मिसाइलों की मारक क्षमता करीब 700 किलोमीटर से 3,500 किलोमीटर तक बताई गई है और ये मिसाइलें पहले से तैनात हैं।

पिनाका रॉकेट का भी हुआ था सफल परीक्षण

 

इससे पहले जुलाई में DRDO ने पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR) का सफल उड़ान परीक्षण किया था। यह परीक्षण 8 जुलाई को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में किया गया था। रॉकेट का परीक्षण 60 किलोमीटर की निर्धारित न्यूनतम दूरी के लिए किया गया। DRDO के मुताबिक, परीक्षण ने अपने सभी निर्धारित उद्देश्यों को पूरा किया। रॉकेट ने उड़ान के दौरान जरूरी तकनीकी गतिविधियां पूरी कीं और तय उड़ान पथ का अनुसरण करते हुए निर्धारित लक्ष्य को सटीकता से निशाना बनाया।

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स्वदेशी लॉन्ग रेंज क्रूज मिसाइल का भी परीक्षण

 

DRDO ने जून में ओडिशा के तट के पास अपनी स्वदेशी लॉन्ग-रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LRLACM) का भी सफल उड़ान परीक्षण किया था। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मिसाइल ने परीक्षण के दौरान सभी निर्धारित उद्देश्यों को पूरा किया। विभिन्न ट्रैकिंग सिस्टम से मिले आंकड़ों से पुष्टि हुई कि उड़ान के दौरान मिसाइल ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन किया।

DRDO और भारतीय उद्योग की साझेदारी से विकसित हुई LRLACM

 

LRLACM को देश में ही विकसित किया गया है। इसके प्रमुख सिस्टम और कंपोनेंट्स DRDO की अलग-अलग प्रयोगशालाओं ने भारतीय उद्योग जगत के साझेदारों के सहयोग से तैयार किए हैं। इस परियोजना का नेतृत्व बेंगलुरु स्थित एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ADE) कर रहा है। अग्नि-4 के परीक्षण को देखने के लिए DRDO के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।