Dhanteras या दिवाली पर पत्नी के नाम से खरीद रहे हैं सोना? पहले टैक्स के नियमों को जान लें फिर खरीदें

धनतेरस पर पत्नी के नाम से सोना खरीदने की परंपरा है। कई लोग अपनी कमाई से सोने के गहने, सिक्के और बार खरीदते हैं, लेकिन उसका बिल पत्नी के नाम पर बनवाते हैं। इससे खरीदारी के समय तो टैक्स की देनदारी नहीं बनती है। लेकिन बाद में पत्नी के इस सोने को बेचने पर टैक्स से जुड़े नियम लागू हो सकते हैं।

इनकम में क्लबिंग के प्रावधान लागू हो सकते है

इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि सोना खरीदने के लिए पैसे किसने दिए। अगर पति अपनी कमाई से पत्नी के नाम से सोना खरीदता है या उसे पैसे गिफ्ट करता है और पत्नी उन पैसों से सोना खरीदती हैं, तो इनकम टैक्स के क्लबिंग प्रावधान लागू हो सकते हैं। ऐसे में सोना बेचने से होने वाला मुनाफा पत्नी के बजाय पति की आय में जोड़ा जा सकता है।

गिफ्ट या गिफ्ट के पैसे से होने वाली कमाई पर टैक्स

सिर्फ पत्नी के नाम से सोना खरीदने पर अलग से इनकम टैक्स के नियम लागू नहीं होते हैं। लेकिन अगर पति बगैर पैसे लिए पत्नी को कोई संपत्ति ट्रांसफर करता है, तो उससे होने वाली आय पति की कुल आय में जोड़ी जा सकती है। इस नियम को ठीक तरह से समझ लेना जरूरी है।

गिफ्ट से होने वाली कमाई पर क्लबिंग लागू

लंदन स्थित एक कंसल्टिंग फर्म में फाइनेंस लीड और CA एवं CS ऋचा कुमारी के मुताबिक, इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के सेक्शन 99 के तहत पति की ओर से पत्नी को बिना पर्याप्त भुगतान के ट्रांसफर की गई संपत्ति से होने वाली आय पति की आय में क्लब की जा सकती है।

कैपिटल गेंस पर पति को चुकाना होगा टैक्स

ClearTax की टैक्स एक्सपर्ट चांदनी आनंद के मुताबिक, अगर पत्नी पति के दिए हुए पैसों से सोना खरीदती हैं और बाद में उसे बेचने पर कैपिटल गेन्स होता हैं, तो क्लबिंग के नियम लागू हो सकते हैं। हालांकि, अगर पत्नी अपनी कमाई से सोना खरीदती हैं या पति से मिले पिन मनी यानी व्यक्तिगत और घरेलू खर्चों के लिए मिलने वाले भत्ते से खरीदारी करती हैं, तो स्थिति अलग हो सकती है।

पत्नी को दिए गए गिफ्ट पर नहीं लगता है टैक्स

पति की ओर से पत्नी को दिया गया पैसा इनकम टैक्स के लिहाज से गिफ्ट माना जाता है। पति-पत्नी एक-दूसरे के रिश्तेदारों की श्रेणी में आते हैं, इसलिए पत्नी को पति से मिले गिफ्ट पर आमतौर पर कोई इनकम टैक्स नहीं देना होता। इस तरह के गिफ्ट के लिए कोई तय मौद्रिक सीमा भी नहीं है। लेकिन यहां एक जरूरी बात समझनी होगी। पति से मिले पैसे पर गिफ्ट टैक्स नहीं लगने का मतलब यह नहीं है कि उन पैसों से खरीदा गया सोना बेचने पर होने वाला मुनाफा भी पत्नी के हाथों में टैक्स फ्री होगा। ऐसे मामले में क्लबिंग के प्रावधान लागू हो सकते हैं।

टैक्स का रेट होल्डिंग पीरियड पर निर्भर करता है

अगर पत्नी ने पति से मिले पैसों से सोना खरीदा है और बाद में उसे बेचकर मुनाफा कमाया है, तो क्लबिंग प्रावधानों के तहत यह कैपिटल गेन पति की आय में जोड़ा जा सकता है। टैक्स की दर इस बात पर निर्भर करेगी कि सोना कितने समय तक अपने पास रखा गया था।

24 महीने या उससे कम समय तक रखा गया सोना: इसे शॉर्ट टर्म कैपिटल एसेट माना जाएगा। इससे होने वाला मुनाफा पति की इनकम में जोड़ दी जाएगी। फिर पति के टैक्स स्लैब के मुताबिक इस पर टैक्स लगेगा।

24 महीने से ज्यादा समय तक रखा गया सोना: इसे लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट माना जाएगा। इस पर बिना इंडेक्सेशन के 12.5 फीसदी की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगेगा।

कैपिटल गेंस का कैलकुलेशन: कैपिटल गेंस का कैलकुलेशन करते समय सोना बेचने से मिली रकम में से उसकी खरीद की मूल लागत और बिक्री से जुड़े पात्र खर्च घटाए जाते हैं।

इनकम टैक्स विभाग पूछ सकता है सवाल

पत्नी के नाम से सोना खरीदना अपने आप में इनकम टैक्स नियमों का उल्लंघन नहीं है। हालांकि, अगर पत्नी की घोषित आय के मुकाबले सोने की खरीदारी काफी ज्यादा है, तो इनकम टैक्स विभाग इस खरीदारी के लिए पैसे के स्रोत के बारे में सवाल पूछ सकता है।

बिल पेमेंट की रसीद संभालकर रखें 

ऋचा कुमारी के मुताबिक, पति-पत्नी को सोने की खरीदारी से जुड़े बिल, पेमेंट रसीदें, बैंक स्टेटमेंट और गिफ्ट से जुड़े दस्तावेज संभालकर रखने चाहिए। इससे यह साबित करने में मदद मिलती है कि खरीदारी के लिए पैसा कहां से आया था।

पैसे का स्रोत पूछ सकता है इनकम टैक्स विभाग

उन्होंने बताया कि इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के सेक्शन 103 और 104 में अनएक्सप्लेंड इनवेस्टमेंट और अनएक्सप्लेंड एसेट से जुड़े प्रावधान हैं। अगर पत्नी सोना खरीदने के लिए इस्तेमाल किए गए पैसे का संतोषजनक स्रोत नहीं बता पाती हैं, तो संबंधित निवेश या संपत्ति को अनएक्सप्लेंड माना जा सकता है।

पैसे ट्रांसफर का रिकॉर्ड भी रखें

चांदनी आनंद भी सलाह देती हैं कि पति से पत्नी के बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने का स्पष्ट रिकॉर्ड रखा जाए। इसके साथ ही सोने की खरीदारी के बिल और जहां जरूरी हो, वैल्यूएशन सर्टिफिकेट भी संभालकर रखना चाहिए। इस तरह के दस्तावेज रखने से भविष्य में इनकम टैक्स विभाग की ओर से पूछताछ होने पर खरीदारी और पैसे के स्रोत की जानकारी देना आसान हो जाता है।