
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। देश के सबसे बड़े अरब राजनीतिक गठबंधन ‘जॉइंट लिस्ट’ और रा’म पार्टी ने गुरुवार को पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट को अगली सरकार बनाने के लिए समर्थन देने का ऐलान किया। इसके बाद 27 अक्टूबर को हुए चुनाव के बाद आइजेनकोट के प्रधानमंत्री बनने की संभावनाएं मजबूत हो गई हैं।
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इजरायल के राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग लगातार दूसरे दिन राजनीतिक दलों के साथ चर्चा कर रहे हैं। इन बैठकों का मकसद यह तय करना है कि अगली सरकार बनाने की जिम्मेदारी किस नेता को सौंपी जाए। चुनाव में न तो नेतन्याहू और न ही आइजेनकोट को स्पष्ट बहुमत मिला है। नेतन्याहू दक्षिणपंथी राजनीति के प्रमुख चेहरे हैं और पिछले तीन वर्षों से युद्ध के दौरान इजरायल का नेतृत्व कर रहे हैं। वहीं, आइजेनकोट ने देश में राष्ट्रीय एकता बहाल करने का वादा किया है।
राष्ट्रपति को सरकार बनाने के लिए किसी नेता को आमंत्रित करने का अधिकार है, लेकिन परंपरा के अनुसार वह आमतौर पर उसी उम्मीदवार को मौका देते हैं, जिसे सबसे अधिक सांसदों का समर्थन हासिल होता है। ताजा समर्थन के बाद आइजेनकोट की स्थिति मजबूत हुई है।
अरब पार्टियां बनीं किंगमेकर, चुनाव में मिलीं 19 सीटें
इजरायल के चुनाव में अरब बहुल राजनीतिक दलों ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए कुल 19 सीटें हासिल की हैं। ऐसे में सरकार गठन के दौरान उनकी भूमिका निर्णायक हो सकती है। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि आइजेनकोट का समर्थन करने वाली ये पार्टियां औपचारिक रूप से उनके गठबंधन में शामिल होंगी या नहीं।
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11 सीटें जीतने वाली जॉइंट लिस्ट ने बयान जारी कर कहा कि वह राष्ट्रपति हर्जोग को अपनी सिफारिश से अवगत कराएगी और आइजेनकोट को सरकार बनाने का मौका देने का समर्थन करेगी। वहीं, आठ सीटें जीतने वाली रा’म पार्टी ने भी आइजेनकोट के समर्थन का ऐलान किया है। इस समर्थन के बाद आइजेनकोट को नई नेसेट (इजरायल की संसद) के 67 सांसदों की सिफारिश मिलने की संभावना है। इजरायल की संसद में कुल 120 सीटें हैं।
नेतन्याहू को सत्ता से बाहर रखना अरब दलों का साझा मकसद
जॉइंट लिस्ट ने कहा कि उसके तीनों घटक दलों ने सर्वसम्मति से आइजेनकोट का समर्थन करने का फैसला किया है। गठबंधन के मुताबिक, यह फैसला जनता की उस मांग के जवाब में लिया गया है, जिसमें नेतन्याहू और उनकी सरकार को दोबारा सत्ता में आने से रोकने की बात कही गई है।
हालांकि, गठबंधन ने यह भी स्वीकार किया कि विपक्षी खेमे ने अभी तक नेतन्याहू की राजनीतिक नीतियों को चुनौती देने और अरब नागरिकों के खिलाफ कथित भड़काऊ बयानों को रोकने के मामले में पर्याप्त इच्छाशक्ति नहीं दिखाई है। अरब नागरिकों की राजनीतिक भागीदारी की वैधता पर सवाल उठाने की कोशिशों को लेकर भी गठबंधन ने चिंता जताई।
इसके बावजूद जॉइंट लिस्ट का मानना है कि आइजेनकोट को समर्थन देने से नेतन्याहू और उनके बीच राजनीतिक अंतर बढ़ेगा। इससे मौजूदा सरकार को बदलने की संभावनाएं मजबूत होंगी और ऐसी एकता सरकार बनने की आशंका कम होगी, जिसमें नेतन्याहू सत्ता में बने रह सकें। जॉइंट लिस्ट का एक प्रतिनिधिमंडल गुरुवार दोपहर राष्ट्रपति हर्जोग के सामने अपनी सिफारिश पेश करने वाला था।
सरकार बनाने के लिए मिलेंगे 28 दिन
इजरायल के राष्ट्रपति जब किसी सांसद को औपचारिक रूप से सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपेंगे, तो उस नेता को इसके लिए 28 दिन का समय मिलेगा। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति 14 दिन का अतिरिक्त समय भी दे सकते हैं। यदि तय समय में नेता सरकार बनाने में नाकाम रहता है, तो राष्ट्रपति किसी दूसरे सांसद को यह जिम्मेदारी सौंप सकते हैं।
चुनाव के बाद नेतन्याहू और आइजेनकोट की स्थिति क्या है?
आइजेनकोट को मिल रहे समर्थन के बावजूद नेतन्याहू का गठबंधन संसदीय सीटों के मामले में आगे है। रिपोर्ट के मुताबिक, यूनाइटेड टोरा जूडिज्म सहित नेतन्याहू के खेमे के पास नई संसद में 53 सीटें हैं, जबकि आइजेनकोट के विपक्षी खेमे के पास 48 सीटें हैं।
नेतन्याहू की दक्षिणपंथी सरकार के खिलाफ व्यापक नाराजगी के बीच अरब बहुल दलों ने चुनाव में ऐतिहासिक बढ़त हासिल की है। निवर्तमान सरकार के कई मंत्रियों को गाजा और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों को लेकर उनके रुख के कारण आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है।
आइजेनकोट अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन ऐसा करने से विपक्ष के कुछ सांसद नाराज हो सकते हैं। इनमें अविग्दोर लिबरमैन भी शामिल हैं। वह पहले नेतन्याहू के सहयोगी रहे हैं, लेकिन अब प्रधानमंत्री के मुखर आलोचक हैं। हालांकि, फिलिस्तीनियों के मुद्दे पर लिबरमैन का रुख भी निवर्तमान सरकार की तरह सख्त माना जाता है।
नेतन्याहू विपक्ष पर अरब सांसदों के साथ गठबंधन बनाने की संभावनाओं को लेकर लगातार निशाना साधते रहे हैं। बुधवार को प्रधानमंत्री कार्यालय में रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार अभियान में विदेशी ताकतों की ओर से फंडिंग किए जाने को लेकर गंभीर संदेह हैं।


