भारतीय शेयर बाजारों के बुरे दिन खत्म होने वाले हैं। दिग्गज फंड मैनेजर और हेलियोस कैपिटल के फंड मैनेजर समीर अरोड़ा ने कहा है कि भारतीय बाजार को लेकर बना नकारात्मक माहौल अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। आने वाले महीनों में यह बदलाव और साफ दिखाई दे सकता है। इसमें भारतीय कंपनियों की अच्छी अर्निंग्स ग्रोथ, रुपये में स्थिरता और टैक्स को लेकर सरकार के सकारात्मक रुख का हाथ होगा।
बड़ी कंपनियों के शेयरों ने बढ़ाया दबाव
The Wealth Formula with N Mahalakshmi को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में अरोड़ा ने कहा कि भारतीय बाजार का प्रदर्शन वास्तव में उतना कमजोर नहीं रहा है, जितना शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांकों को देखकर लगता है। भारतीय बाजारों में अप्रैल से ही हालात बेहतर होने शुरू हो गए थे। लेकिन बैंकिंग, IT और कुछ बड़ी कंज्यूमर कंपनियों के शेयरों में कमजोरी के कारण बाजार की असल तस्वीर सामने नहीं आ पाई।
मिडकैप और स्मॉलकैप का अच्छा प्रदर्शन
अरोड़ा के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार में अप्रैल से मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन बेहतर रहा। लेकिन, बड़ी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी के कारण बाजार की वास्तविक मजबूती नजर नहीं आई। उनका मानना है कि अब भारतीय कंपनियों की अर्निंग्स बढ़ने और रुपये में स्थिरता से बाजार की तस्वीर बदल सकती है। इसके अलावा, अमेरिका में राजनीतिक समीकरण में बदलाव और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स में राहत से बाजार को सपोर्ट मिल सकता है।
कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ बेहतर रह सकती है
अरोड़ा का मानना है कि कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ अच्छी रहने की उम्मीद है। पिछले दो साल में भारतीय कंपनियों की रुपये में कमाई की ग्रोथ करीब 9-10 फीसदी रही है। इस दौरान रुपये में हर साल 5-6 फीसदी की गिरावट के कारण डॉलर के लिहाज से कमाई की ग्रोथ घटकर सिर्फ 3-5 फीसदी रह गई। अब कंपनियों की रुपये में कमाई की ग्रोथ बढ़कर 14-15 फीसदी तक पहुंच सकती है।
विदेशी निवेशकों की बढ़ सकती है दिलचस्पी
अरोड़ा ने बताया कि भारतीय बाजार के लिए एक और सकारात्मक पहलू यह है कि कुछ विदेशी बाजारों में असाधारण कमाई की ग्रोथ का दौर अब धीमा पड़ सकता है। दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में हाल के वर्षों में कंपनियों की कमाई में तेज बढ़ोतरी वजह कुछ खास प्रोडक्ट्स की कीमतों में भारी उछाल रही है। यह ग्रोथ उतनी मात्रा में बिक्री बढ़ने के कारण नहीं आई थी। अब इस तरह की असाधारण तेजी का दौर कमजोर पड़ता दिख रहा है। ऐसे में भारत की व्यापक और अलग-अलग सेक्टर की ग्रोथ वैश्विक निवेशकों को अट्रैक्ट कर सकती है।
अमेरिकी चुनावों के नतीजे भारत के लिए पॉजिटिव
उन्होंने अमेरिका के मिडटर्म चुनावों के नतीजों को भी भारत के लिए सकारात्मक बताया। उनका कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का रुख भारत के प्रति बहुत सकारात्मक नहीं रहा है। उन्होंने टैरिफ, H-1B वीजा से जुड़े मुद्दों और भारत को लेकर की गई टिप्पणियों का जिक्र किया। भारत के प्रति सख्त रुख रखने वाली सरकार की राजनीतिक ताकत कमजोर होना भारत के लिए अच्छा है। उनका मानना है कि चुनाव नतीजों से अमेरिकी प्रशासन और रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं को भी जनता के रुख का पता चला है।
टैक्स में राहत से लौट सकता है विदेशी निवेश
भारतीय शेयर बाजार का माहौल बेहतर बनाने में टैक्स से जुड़े मसले अहम भूमिका निभा सकते हैं। अरोड़ा ने कहा कि टैक्स की समीक्षा को लेकर सरकार के संकेतों का बाजार पर अच्छा असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि टैक्स रिफॉर्म्स से सरकार को पीछे नहीं हटना चाहिए। उनके मुताबिक, अगर सरकार प्रस्तावित टैक्स ढांचे में बदलाव करती है या नियमों की परिभाषा बदलती है तो इससे निवेशकों का भरोसा फिर से बढ़ सकता है। टैक्स व्यवस्था को विदेशी निवेशकों के लिए ज्यादा अनुकूल बनाने से भारतीय बाजार से जुड़ी एक बड़ी चिंता दूर हो सकती है। इससे विदेशी निवेश की वापसी का रास्ता भी खुल सकता है।

